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Jammu News: सुहागिनों के पर्व से बाजार गुलजार, कतलम्मे-फैनियों का बड़ा कारोबार
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-करवाचौथ व्रत एक को, खरीदारी में जुटीं महिलाएं, मठियाई की दुकानें सजीं, अच्छे व्यापार की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ ही बाजार गुलजार हैं। नवरात्र व दशहरा के बाद अब एक नवंबर को करवाचौथ है। यह व्रत महिलाओं के लिए न सिर्फ सजने-संवरने का होता है, बल्कि आस्था और विश्वास का भी त्योहार है। वहीं, इस पर्व को लेकर कतलम्मे-फैनियों की मांग बढ़ गई है। सुहागिनों ने खरीदारी शुरू कर दी है। नए कपड़े और सजावट का सामान खरीद रही हैं। दुकानदारों को भी अच्छे व्यापार की उम्मीद है।
मठियाई दुकानदार कई तरह की वैरायटी तैयार कर रहे हैं। करवाचौथ पर सरगी के मौके पर सबसे पहले कतलम्मे और फैनिया खाई जाती हैं। प्राचीन काल से चली आ रही इस प्रथा को सुहागिनें पूरे रीति रिवाज से पालन करती हैं। दुकानदारों ने भी फैनियां और कतलम्मे बनाने शुरू कर दिए हैं। कई दुकानकार रिफाइंड से बनाते हैं। लेकिन, महिलाओं की पसंद देसी घी में बने कतलम्मे और फैनियां हैं। बाजार में देसी घी के कतलम्मे और फैनियां करीब 480 रुपए किलो मिल रही हैं। बाजार में मीठे और नमकीन दोनों तरह के कतलम्मे उपलब्ध हैं।
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करवाचौथ आस्था और विश्वास का पर्व है। यह परंपरा वर्षों पुरानी है। इसे लेकर खरीदारी शुरू कर दी है। सरगी के मौके पर कतलम्मे और फैनियां खाने की परंपरा है। इसे पूरे रीति रिवाज के साथ निभाया जाना चाहिए।
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वनिता कोहली
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करवाचौथ पर्व पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। सरगी के मौके पर कतलम्मे खाना पहली पसंद है। खोया वाले कतलम्मे सबसे ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं। वहीं, अन्य खरीदारी भी की जा रही है।
मल्लिका बजाज
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करवाचौथ व्रत को लेकर हर सुहागिनें उत्सुक रहती हैं। सजने-संवरने के सामान की खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में त्योहार को लेकर कई तरह की वैरायटी उपलब्ध हैं। सरगी के मौके पर खाने के लिए कतलम्मे और फैनियां खरीदेंगे।
टीना आनंद
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102 साल से बेच रहे कतलम्मे और फैनियां
रावालपिंडी दुकानदार आशु गुप्ता और प्रवीण गुप्ता ने बताया कि उनका परिवार 102 साल से कतलम्मे और फैनियां बनाते आ रहे हैं। आम दिनों में भी इसकी अच्छी मांग रहती है। करवाचौथ पर मांग बढ़ जाती है। दोनों वैरायटी शुद्ध देसी घी की बनाते हैं। बाजार में इनकी कीमत 480 से 500 रुपए है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ ही बाजार गुलजार हैं। नवरात्र व दशहरा के बाद अब एक नवंबर को करवाचौथ है। यह व्रत महिलाओं के लिए न सिर्फ सजने-संवरने का होता है, बल्कि आस्था और विश्वास का भी त्योहार है। वहीं, इस पर्व को लेकर कतलम्मे-फैनियों की मांग बढ़ गई है। सुहागिनों ने खरीदारी शुरू कर दी है। नए कपड़े और सजावट का सामान खरीद रही हैं। दुकानदारों को भी अच्छे व्यापार की उम्मीद है।
मठियाई दुकानदार कई तरह की वैरायटी तैयार कर रहे हैं। करवाचौथ पर सरगी के मौके पर सबसे पहले कतलम्मे और फैनिया खाई जाती हैं। प्राचीन काल से चली आ रही इस प्रथा को सुहागिनें पूरे रीति रिवाज से पालन करती हैं। दुकानदारों ने भी फैनियां और कतलम्मे बनाने शुरू कर दिए हैं। कई दुकानकार रिफाइंड से बनाते हैं। लेकिन, महिलाओं की पसंद देसी घी में बने कतलम्मे और फैनियां हैं। बाजार में देसी घी के कतलम्मे और फैनियां करीब 480 रुपए किलो मिल रही हैं। बाजार में मीठे और नमकीन दोनों तरह के कतलम्मे उपलब्ध हैं।
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करवाचौथ आस्था और विश्वास का पर्व है। यह परंपरा वर्षों पुरानी है। इसे लेकर खरीदारी शुरू कर दी है। सरगी के मौके पर कतलम्मे और फैनियां खाने की परंपरा है। इसे पूरे रीति रिवाज के साथ निभाया जाना चाहिए।
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वनिता कोहली
करवाचौथ पर्व पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। सरगी के मौके पर कतलम्मे खाना पहली पसंद है। खोया वाले कतलम्मे सबसे ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं। वहीं, अन्य खरीदारी भी की जा रही है।
मल्लिका बजाज
करवाचौथ व्रत को लेकर हर सुहागिनें उत्सुक रहती हैं। सजने-संवरने के सामान की खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में त्योहार को लेकर कई तरह की वैरायटी उपलब्ध हैं। सरगी के मौके पर खाने के लिए कतलम्मे और फैनियां खरीदेंगे।
टीना आनंद
102 साल से बेच रहे कतलम्मे और फैनियां
रावालपिंडी दुकानदार आशु गुप्ता और प्रवीण गुप्ता ने बताया कि उनका परिवार 102 साल से कतलम्मे और फैनियां बनाते आ रहे हैं। आम दिनों में भी इसकी अच्छी मांग रहती है। करवाचौथ पर मांग बढ़ जाती है। दोनों वैरायटी शुद्ध देसी घी की बनाते हैं। बाजार में इनकी कीमत 480 से 500 रुपए है।