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करिगल विजय गाथा: स्कूल से देश सेवा का लिया प्रण, शहीद उदयमान ने गोली लगने के बाद भी दुश्मन को खदेड़ा
Wed, 26 Jul 2023 01:35 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jul 2023 01:35 PM IST
सार
जम्मू के शहीद उदयमान सिंह ने टाइगर हिल पर दुश्मनों से सीधा मुकाबला किया। बहादुरी के साथ लड़ते हुए उन्हें एक गोली लगी। घायल होने के बाद दुश्मनों के छक्के छुड़ाए।
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करगिल शहीद उदयमान सिंह के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कारगिल युद्ध के योद्धा उदयमान सिंह की दो बहनें वंदना लंगेह और कंचन बाला हैं। भाई के शहीद होने के बाद बड़ी बहन वंदना शिक्षक बनीं। परिजनों ने कहा कि किसी स्कूल का नाम उदयमान रखा जाए। वह बताते हैं - उदयमान ने 12 हजार फीट की ऊंचाई पर दुश्मनों से अंतिम सांस तक लोहा लिया।
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टाइगर हिल पर सीधा मुकाबला किया। बहादुरी के साथ लड़ते हुए एक गोली लगी। घायल होने के बाद दुश्मनों के छक्के छुड़ाए। उदयमान का जन्म झिड़ी के पास शामा चक्क में 1978 में हुआ था। स्कूल से ही फौज में भर्ती होने का मन था। माता-पिता चाहते थे कि उच्च शिक्षा हासिल करें, लेकिन शायद उनके हिस्से में भारत माता की सेवा लिखी थी।
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26 अगस्त, 1996 को जबलपुर में सेना में भर्ती हुए। ट्रेनिंग समाप्त होने पर 18 ग्रेनेडियर यूनिट में भेजा गया। उस दौरान यूनिट गंगानगर में थी। इसके बाद यूनिट को कश्मीर भेजा गया। आंतकियों के साथ मुठभेड़ में भी कई बार वह शामिल रहे।
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रात को ही जंग में कूद पड़े
4 जुलाई, 1999 को यूनिट को दुश्मनों से टाइगर हिल खाली कराने की जिम्मेदारी मिली। पूरी रात रस्सियों के सहारे दुर्गम चढ़ाई चढ़कर जवान आगे बढ़े। पांच जुलाई सुबह आठ बजे उदयमान साथियों के साथ चोटी पर पहुंचे। साहस और बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।