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Jammu News: सामुदायिक रेडियो स्टेशन द्रास ने गांधी जयंती पर विशेष पॉडकास्ट रूबरू रिकॉर्ड किया
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Special podcast at Community Radio Station Drass on the occassion of Gandhi Jayanti. Source - C
संवाद न्यूज एजेंसी
कारगिल। गांधी जयंती के अवसर पर सामुदायिक रेडियो स्टेशन द्रास ने शुक्रवार को अपनी लोकप्रिय शृंखला रूबरू के तहत एक विशेष पॉडकास्ट रिकॉर्ड किया। महात्मा गांधी की जयंती को समर्पित यह एपिसोड 2 अक्तूबर 2025 को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर प्रसारित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में राष्ट्रपिता के जीवन, दर्शन और स्थायी विरासत पर चर्चा के लिए एक विशेष पैनल आमंत्रित किया गया। आमंत्रित अतिथियों में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज द्रास में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर श्री त्सावांग ग्याल्तसन और प्रोफेसर डॉ. इरफान बशीर शामिल थे। चर्चा में युवा आवाज़ों को प्रतिनिधित्व देते हुए जीडीसी द्रास के छात्र मोहम्मद नूमान रज़ा और शबाना परवीन ने भी भाग लिया।
यह संवाद गांधी के सत्य, अहिंसा और सादगी के सिद्धांतों पर केंद्रित रहा, साथ ही आज की दुनिया में उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला गया। पैनल ने गांधी जयंती को न केवल एक राष्ट्रीय अवकाश के रूप में, बल्कि शांति, अहिंसा और नागरिक उत्तरदायित्व के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि के अवसर के रूप में रेखांकित किया।
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स्वच्छ भारत अभियान जैसे आंदोलनों को प्रेरित करने वाले गांधी के दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें नागरिकों, विशेषकर युवाओं को एक स्वच्छ और अधिक करुणामय समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने की याद दिलाई गई।
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कारगिल। गांधी जयंती के अवसर पर सामुदायिक रेडियो स्टेशन द्रास ने शुक्रवार को अपनी लोकप्रिय शृंखला रूबरू के तहत एक विशेष पॉडकास्ट रिकॉर्ड किया। महात्मा गांधी की जयंती को समर्पित यह एपिसोड 2 अक्तूबर 2025 को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर प्रसारित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में राष्ट्रपिता के जीवन, दर्शन और स्थायी विरासत पर चर्चा के लिए एक विशेष पैनल आमंत्रित किया गया। आमंत्रित अतिथियों में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज द्रास में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर श्री त्सावांग ग्याल्तसन और प्रोफेसर डॉ. इरफान बशीर शामिल थे। चर्चा में युवा आवाज़ों को प्रतिनिधित्व देते हुए जीडीसी द्रास के छात्र मोहम्मद नूमान रज़ा और शबाना परवीन ने भी भाग लिया।
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यह संवाद गांधी के सत्य, अहिंसा और सादगी के सिद्धांतों पर केंद्रित रहा, साथ ही आज की दुनिया में उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला गया। पैनल ने गांधी जयंती को न केवल एक राष्ट्रीय अवकाश के रूप में, बल्कि शांति, अहिंसा और नागरिक उत्तरदायित्व के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि के अवसर के रूप में रेखांकित किया।
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स्वच्छ भारत अभियान जैसे आंदोलनों को प्रेरित करने वाले गांधी के दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें नागरिकों, विशेषकर युवाओं को एक स्वच्छ और अधिक करुणामय समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने की याद दिलाई गई।