Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर में आरटीआई का बढ़ता भरोसा, 19 महीनों में 65 हजार से ज्यादा आवेदन
जम्मू-कश्मीर के ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल पर 19 महीनों में 65,243 आरटीआई आवेदन और 9,033 पहली अपीलें दर्ज हुईं जो लोगों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती हैं।
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जम्मू-कश्मीर में ऑनलाइन सूचना के अधिकार (आरटीआई ) पोर्टल का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। पोर्टल शुरू होने के करीब 19 महीनों में नागरिकों ने 65 हजार से अधिक आरटीआई आवेदन दाखिल किए हैं, जबकि 9 हजार से ज्यादा पहली अपील भी दर्ज की गई हैं।
65,243 आरटीआई आवेदन हुए दाखिल
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से आरटीआई कार्यकर्ता रमन कुमार शर्मा की ओर से दायर आवेदन के जवाब में ये आंकड़े सामने आए हैं। विभाग के मुताबिक, 10 जनवरी 2025 से 26 अगस्त 2026 के बीच ऑनलाइन पोर्टल पर कुल 65,243 आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए। इसी अवधि में 9,033 पहली अपील भी दाखिल की गईं। जम्मू-कश्मीर का ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जनवरी 2025 में शुरू किया था।
निचले स्तर के कार्यालयों को पोर्टल से जोड़ने की मांग
आरटीआई कार्यकर्ता रमन कुमार शर्मा ने कहा कि कम समय में इतनी बड़ी संख्या में आवेदन मिलना बताता है कि लोग सरकारी जानकारी हासिल करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था पर भरोसा कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पोर्टल पर जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर के अधिक से अधिक सरकारी कार्यालयों को शामिल किया जाए, ताकि आम लोगों को जानकारी हासिल करने के लिए दूर-दराज के दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
शिक्षा और पुलिस विभाग का उदाहरण
शर्मा ने शिक्षा विभाग का उदाहरण देते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर के निदेशालय स्तर के जन सूचना अधिकारी (सीईओ) पोर्टल पर उपलब्ध हैं, लेकिन मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) कार्यालयों की जानकारी पोर्टल पर नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस और ग्रामीण विकास विभाग के जिला स्तर के कार्यालयों को लेकर भी ऐसी ही स्थिति है।
पारदर्शी नीति बनाने की अपील
शर्मा ने जीएडी से नए विभागों और अधिकारियों को पोर्टल पर जोड़ने के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल आवेदनों को एनआईसी को ट्रांसफर करने के बजाय संबंधित स्थानीय कार्यालयों को सीधे ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर इसे तेज करने की अपील की ताकि आरटीआई कानून के जरिए पारदर्शिता का लाभ आम लोगों तक आसानी से पहुंच सके।