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Jammu News: प्रेम ही परमात्मा, उसे पाने का सूत्र भी प्रेम
Mon, 04 Dec 2023 01:41 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Mon, 04 Dec 2023 01:41 AM IST
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सतवारी के मैदान में साहिब बंदगी के सद् गुरु ने संगत को किया प्रचवनों से निहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यौड़ियां। प्रेम ही परमात्मा है और उसे पाने का सूत्र भी प्रेम ही है। प्रेम ही सबसे बड़ी चीज है। प्रेम हैवान को इंसान बना देता है। प्रेम इंसान को भगवान बना देता है। प्रेम सदियों की दुश्मनी को मिटा देता है। यह ज्ञान साहिब बंदगी के सद् गुरु मधु परमहंस महाराज ने रविवार को सतवारी के मैदान में आयोजित सत्संग में संगत को दिया है।
उन्होंने कहानी सुनाते हुए कहा कि एक रानी थी, जो बहुत सुंदर थी लेकिन राजा बूढ़ा था। दासी उसका श्रृंगार कर रही थी। उसने कहा कि तुम्हारी सुंदरता देखते हुए राजा तुम्हारे काबिल नहीं है। इस राज्य में एक ब्राह्मण है, जो बहुत सुन्दर है। वह तुम्हारे योग्य है। एकाएक रानी के हृदय में उस ब्राह्मण के प्रति एक भाव उत्पन्न हो गया। इसका मतलब है कि जो हमारे प्रेम की तरंगें हैं, वो बड़ी प्रबल हैं। आप जिसका भी ध्यान करेंगे, आपकी तरंगें उसके पास जाएंगी। प्रबल प्रेम के बस में प्रभु का नियम भी बदल जाता है। बिना देखें, बिना बूझे हम सब परमात्मा का ध्यान करते हैं। सबसे पहले परमात्मा के प्रति हमारे हृदय में प्रेम तब उत्पन्न होता है, जब हम उसके लिए सोचते हैं। तो हमारी तरंगें परमात्मा तक पहुंचती हैं। धीरे-धीरे उस ब्राह्मण के प्रेम का आकर्षण रानी को अपनी तरफ खींचने लगा। कोई शारीरिक संबंधन नहीं। प्रेम में आनन्द है। अनायास ही रानी उस ब्राह्मण के पास पहुंची और उससे प्रेम करने लगी। राजा को जब पता चला तो वो गुस्सा हुआ। तलवार लेकर वहां पहुंचा और ब्राह्मण पर कई वार किए। ब्राह्मण पर कुछ असर नहीं पड़ा। राजा ने पूछा कि हे पापात्मा, मेरे ये प्रहार तुमपर कोई असर क्यों नहीं डाल रहे। बोला-हे राजन, मेरे अंदर का मैं खत्म हो चुका है। मैं रानीमय हो गया हूं। आदमी का सुख-दुख तब तक है, जब तक उसमें अहंकार है, जब तक उसमें मैं है। इसलिए यहां बोला कि गुरुमय हो जाओ। फिर राजा ने रानी पर प्रहार किये। रानी भी नहीं मरी। मेरे शस्त्र तुम पर प्रभावित क्यों नहीं हो रहे हैं। बोला-हे राजन, मैं ब्राह्मणमय हो चुकी हूं। साहिब ने प्रेम पर बहुत कुछ कहा। प्रेम में अपना वजूद नहीं रहता है। जिसमें जिसका प्रेम है, वो वहीं रहेगा। बाकी चीजें भूल जाता है और एक ही चीज में एकाग्र हो जाता है। अपने को मिटाना पड़ता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यौड़ियां। प्रेम ही परमात्मा है और उसे पाने का सूत्र भी प्रेम ही है। प्रेम ही सबसे बड़ी चीज है। प्रेम हैवान को इंसान बना देता है। प्रेम इंसान को भगवान बना देता है। प्रेम सदियों की दुश्मनी को मिटा देता है। यह ज्ञान साहिब बंदगी के सद् गुरु मधु परमहंस महाराज ने रविवार को सतवारी के मैदान में आयोजित सत्संग में संगत को दिया है।
उन्होंने कहानी सुनाते हुए कहा कि एक रानी थी, जो बहुत सुंदर थी लेकिन राजा बूढ़ा था। दासी उसका श्रृंगार कर रही थी। उसने कहा कि तुम्हारी सुंदरता देखते हुए राजा तुम्हारे काबिल नहीं है। इस राज्य में एक ब्राह्मण है, जो बहुत सुन्दर है। वह तुम्हारे योग्य है। एकाएक रानी के हृदय में उस ब्राह्मण के प्रति एक भाव उत्पन्न हो गया। इसका मतलब है कि जो हमारे प्रेम की तरंगें हैं, वो बड़ी प्रबल हैं। आप जिसका भी ध्यान करेंगे, आपकी तरंगें उसके पास जाएंगी। प्रबल प्रेम के बस में प्रभु का नियम भी बदल जाता है। बिना देखें, बिना बूझे हम सब परमात्मा का ध्यान करते हैं। सबसे पहले परमात्मा के प्रति हमारे हृदय में प्रेम तब उत्पन्न होता है, जब हम उसके लिए सोचते हैं। तो हमारी तरंगें परमात्मा तक पहुंचती हैं। धीरे-धीरे उस ब्राह्मण के प्रेम का आकर्षण रानी को अपनी तरफ खींचने लगा। कोई शारीरिक संबंधन नहीं। प्रेम में आनन्द है। अनायास ही रानी उस ब्राह्मण के पास पहुंची और उससे प्रेम करने लगी। राजा को जब पता चला तो वो गुस्सा हुआ। तलवार लेकर वहां पहुंचा और ब्राह्मण पर कई वार किए। ब्राह्मण पर कुछ असर नहीं पड़ा। राजा ने पूछा कि हे पापात्मा, मेरे ये प्रहार तुमपर कोई असर क्यों नहीं डाल रहे। बोला-हे राजन, मेरे अंदर का मैं खत्म हो चुका है। मैं रानीमय हो गया हूं। आदमी का सुख-दुख तब तक है, जब तक उसमें अहंकार है, जब तक उसमें मैं है। इसलिए यहां बोला कि गुरुमय हो जाओ। फिर राजा ने रानी पर प्रहार किये। रानी भी नहीं मरी। मेरे शस्त्र तुम पर प्रभावित क्यों नहीं हो रहे हैं। बोला-हे राजन, मैं ब्राह्मणमय हो चुकी हूं। साहिब ने प्रेम पर बहुत कुछ कहा। प्रेम में अपना वजूद नहीं रहता है। जिसमें जिसका प्रेम है, वो वहीं रहेगा। बाकी चीजें भूल जाता है और एक ही चीज में एकाग्र हो जाता है। अपने को मिटाना पड़ता है।
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