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कोर्ट में पुलिस की किरकिरीः जांच अधिकारी की इस करतूत पर जज ने कहा- मैं हैरान हूं

Thu, 07 Nov 2019 01:08 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 07 Nov 2019 01:08 PM IST
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judge asked where Caesar Memo is in case details, investigating officer said forgot to bring
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
जम्मू में एक मामले में पकड़े गए आरोपियों की रिमांड लेने कोर्ट पहुंची पुलिस की किरकिरी हुई। कोर्ट ने मामले की जांच करने वाले अधिकारियों के खिलाफ स्ट्रक्चर पास कर दिया। एसएसपी जम्मू को जांच अधिकारी और जिला उपायुक्त को तहसीलदार के खिलाफ पंद्रह दिन में जांच करने और इसकी जिम्मेदारी तय करने के आदेश दिए।
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पुलिस बुधवार को नानक नगर के रहने वाले कमलजीत सिंह और इंदिरा नगर के रहने वाले सौरभ सूदन की रिमांड लेने कोर्ट पहुंची थी। तहसीलदार की ओर से बतौर एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट रिमांड देने पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई।
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अतिरिक्त जिला जज ताहिर खुर्शीद रैना ने बुधवार को गंग्याल पुलिस की तरफ से आरोपियों को रिमांड पर लेने के आवेदन को खारिज कर दिया। बुधवार शाम 4 बजे पुलिस के सब इंस्पेक्टर बी एस चाढ़क ने कमल और सौरभ के खिलाफ रिमांड आवेदन पेश किया।
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जज ने पुलिस से इस मामले की केस डिटेल मांगी और दोनों आरोपियों को पेश करने का आदेश दिया। केस डिटेल की फाइल खुली तो कमलजीत ने कहा ‘हमारे खिलाफ पुलिस ने झूठा मामला दर्ज किया है। एसएचओ गंग्याल ने कहा था कि एसएसपी जम्मू ने कहा है कि हमें पकड़ें और हमारे खिलाफ एनडीपीएस के तहत एफआईआर दर्ज करो।’

 

यह है केस डिटेल

केस डिटेल के अनुसार 30 अक्तूबर को कांस्टेबल नरेश कुमार मरखारी में गश्त कर रहे थे। तभी एक सैंट्रो कार पीबी602एएक्स, 0652 की तलाशी लेने पर एक सफेद रंग का पॉलीथिन मिला। इन दोनों के पास से 550 ग्राम और 650 ग्राम हेरोइन मिली। इसके बाद मामले की जांच शुरू हो गई।

31 अक्तूबर को तहसीलदार जम्मू ने आरोपियों के खिलाफ पुलिस को रिमांड की मंजूरी दी। छह दिन के लिए यह रिमांड दी गई। बुधवार को पुलिस ने जिला स्पेशल जज के पास रिमांड लेने का आवेदन किया। जिला जज ने यह मामला अतिरिक्त जज के पास भेज दिया।

केस डिटेल पढ़ने के बाद जज ने माना कि जांच अधिकारी ने सीजर मेमो का रिकॉर्ड इसमें नहीं रखा था। जब जज ने पूछा कि इस महत्वपूर्ण दस्तावेज के बिना कैसे जांच कर ली, तो जांच अधिकारी का कोई जवाब नहीं आया। कहा कि दस्तावेज थाने में पड़ा है। उसे दस्तावेज लाने का समय दिया जाए। जज ने जांच अधिकारी को समय दिया। अफसर थाने गया और सीजर मेमो लेकर आया।

 

मैं हैरान हूं कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने रिमांड कैसे दे दी

जांच अधिकारी ने जज से कहा कि यह सीजर मेमो थाने में नहीं, बल्कि जांच अधिकारी के साथ आए एक हेड कांस्टेबल के बैग में पड़ा था। जज ने कहा कि कैसे इतना महत्वपूर्ण दस्तावेज जांच अधिकारी केस डिटेल फाइल में शामिल करना भूल सकता है। या फिर बैग में रह सकता है।

अब सवाल आता है एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा रिमांड देने का। तो पहला सवाल मामले को पढ़कर यह आता है कि कैसे जांच अधिकारी एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेट के सामने रिमांड लेने पहुंच गया। जबकि उसे ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास जाना चाहिए था। पुलिस को पहली रिमांड ज्यूडिशियल अफसर से लेनी होती है। एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के पास तब ही जाते हैं, जब ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट उपलब्ध न हो।

जज ने कहा ‘मैं हैरान हूं कि कैसे एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने रिमांड दे दी। छह दिन हो गए। एक व्यक्ति का बयान तक नहीं लिया गया। पुलिस के इस केस को देखकर लगता है कि पुलिस के पास रिमांड लेने का कोई आधार नहीं।’

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