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विस तय करे राज्यपाल चाहिए या सदर-ए-रियासत?

Mon, 28 Dec 2015 05:24 PM IST
Updated Mon, 28 Dec 2015 05:24 PM IST
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JK's sadri riyasat post: High Court puts ball into JK govt

जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 1965 में सदर-ए-रियासत पद को राज्यपाल के रूप में बदलने का मामला राज्य के संविधान के खिलाफ था।

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हालांकि उच्च न्यायालय ने गेंद सरकार के पाले में डालते हुए कहा कि यह विधानसभा तय करे कि राज्यपाल पद को बरकरार रखा जाए या फिर इसे फिर सदर-ए-रियासत बनाया जाए।
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रियासत के संविधान की धारा 26 के अनुसार राज्य का प्रमुख (सदर-ए-रियासत) का चयन धारा 27 के प्रावधान के तहत किया जाना चाहिए। संविधान की धारा 27 के अनुसार राज्य के प्रमुख का चयन लोगों द्वारा चुने गए विधानसभा के सदस्य करेंगे।
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राज्यपाल हो या सदर-ए-रियासत

JK's sadri riyasat post: High Court puts ball into JK govt

जम्मू कश्मीर (छठे संशोधन) अधिनियम 1965 के जरिए राज्य के संविधान में संशोधन कर सदर-ए-रियासत पद को राज्यपाल के रूप में बदला गया था। संशोधन के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करेंगे और वह राज्य के प्रमुख होंगे।

अदालत ने कहा कि जम्मू कश्मीर के संविधान (छठे संशोधन) अधिनियम 1965 को चुनौती के अभाव में यह उचित होगा कि इस मामले पर विचार करने के लिए मुद्दे को विधानसभा सदस्यों पर छोड़ दिया जाए। सदस्य संविधान को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

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