आपातकाल के चलते यहां की विधानसभा हो गई 6 साल की
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देश की लोकसभा से लेकर हर राज्य की विधानसभा का कार्यकाल अमूमन पांच साल का होता है। लेकिन भारत में एक राज्य ऐसा भी है जहां की विधानसभा का कार्यकाल छह साल का होता है।
जम्मू कश्मीर भारत का एक मात्र ऐसा राज्य है जिसकी विधानसभा का कार्यकाल छह साल का होता है। लेकिन यह अवधि राज्य की संविधान सभा ने तय नहीं की है। यह अवधि आपातकाल की देन है।
जब 25 जून 1975 को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू किया था। आपातकाल के दौरान ही इंदिरा गांधी ने छह साल की विधानसभा और संसद का कानून लाया था।
हालांकि जम्मू कश्मीर के लोग यह मानते हैं कि हमारी राज्य विधानसभा का कार्यकाल छह साल का सिर्फ अलग संविधान और धारा 370 के कारण है। लेकिन यह सच नहीं है।
शेख अब्दुल्ला ने नहीं बदला कानून
आपातकाल के समय जम्मू कश्मीर में कांग्रेस की मदद से शेख मुहम्मद अब्दुल्ला की सरकार चल रही थी। शेख अब्दुल्ला ने इंदिरा गांधी के प्रस्ताव का समर्थन किया।
1977 में जम्मू कश्मीर की विधानसभा में संशोधन प्रस्ताव लाया और उसके बाद से यहां की विधानसभा का कार्यकाल छह साल का हो गया।
आपातकाल हट जाने के बाद इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर जाना पड़ा क्योंकि इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हार हुई। सत्ता में जनता पार्टी की सरकार आई। नई सरकार ने पिछली सरकार के सभी फैसलों को बदला दिया।
लेकिन जम्मू-कश्मीर में यह संभव नहीं हो पाया, क्योंकि यहां राज्य विधानसभा की मंजूरी जरूरी होती है। तब तक शेख अब्दुल्ला ने पूरे जम्मू कश्मीर में अपना दबदवा कायम कर लिया।