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जम्मू विश्वविद्यालय: उर्दू साहित्य के विकास में गैर-मुस्लिमों के योगदान पर दो दिवसीय सम्मेलन का आगाज
Wed, 01 May 2024 03:21 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Wed, 01 May 2024 03:21 PM IST
सार
उर्दू भाषा और साहित्य के विकास में गैर-मुस्लिम उर्दू लघु कथाकारों के योगदान पर दो दिवसीय सम्मेलन का आगाज बुधवार को जम्मू विश्वविद्यालय में हुआ। इसमें देशभर से आए उर्दू के साहित्यकारों ने भाग लिया।
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जम्मू विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उर्दू भाषा और साहित्य के विकास में गैर-मुस्लिम उर्दू लघु कथाकारों के योगदान पर दो दिवसीय सम्मेलन का आगाज बुधवार को जम्मू विश्वविद्यालय में हुआ। इसमें देशभर से आए उर्दू के साहित्यकारों ने भाग लिया। सम्मेलन में जम्मू कश्मीर कला संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव सुरेश गुप्ता मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति व भाषा अकादमी उर्दू के उत्थान के लिए विभिन्न प्रयास कर रही है। अकादमी हर वर्ष सिराज नामक पुस्तिक का प्रकाशन करती है, जिसमें उर्दू भाषा के विद्वान अपनी रचनाएं लिखते हैं।
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जम्मू विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रमुख ने कहा कि दो दिवस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य गैर मुस्लिम साहित्यकारों की उर्दू में योगदान को उजागर करना है। उर्दू किसी एक धर्म के लोगों की भाषा नहीं है। जम्मू कश्मीर में डोगरा शासको ने उर्दू भाषा को राज्य की भाषा बनाया था। दो दिवस से सम्मेलन में ऐसे साहित्यकारों के योगदान को याद किया जाएगा।
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