{"_id":"631ad87a1849e102eb01726d","slug":"jammu-university-chandrasekhar-wife-allega-head-of-department-aarti-bakshi-did-not-want-he-become-hod","type":"story","status":"publish","title_hn":"JU Professor Death: पत्नी का आरोप- विभागाध्यक्ष आरती बख्शी नहीं चाहती थीं कि चंद्रशेखर बनें HOD","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
JU Professor Death: पत्नी का आरोप- विभागाध्यक्ष आरती बख्शी नहीं चाहती थीं कि चंद्रशेखर बनें HOD
Fri, 09 Sep 2022 02:36 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 09 Sep 2022 02:36 PM IST
सार
एडवोकेट एवं चंद्रशेखर के भाई विनोद कुमार ने कहा कि आमतौर पर जब भी कोई फंदे पर लटकता हुआ मिलता है, तो उसको तत्काल उतारकर देखा जाता है कि सांस चल रही या नहीं। लेकिन विवि के लोगों ने दरवाजा तोड़ने के बाद 15 मिनट तक उनको फंदे से उतारा तक नहीं।
विज्ञापन
Jammu University
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जम्मू विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की मौत को उनके परिवार ने सोची समझी साजिश करार दिया है। उनकी पत्नी का कहना है कि उनको प्रताड़ित किया जाता था। वह एचओडी बनने वाले थे, जो मौजूदा एचओडी आरती बख्शी को बिलकुल पसंद नहीं था। यह खुदकुशी नहीं हत्या है। उनको मरने पर मजबूर किया गया। इसकी उच्च स्तरीय जांच के साथ दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उधर, डॉ. चंद्रशेखर के शव को वीरवार को पोस्टमार्टम के बाद पैतृक गांव मुरादनगर(उत्तर प्रदेश) भेज दिया गया। मुरादनगर से वीरवार को डॉ. चंद्रशेखर के भाई, बहनोई आदि जम्मू पहुंचे थे।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता ने कहा कि वे ठीक थे, लेकिन दो-तीन दिनों से कुछ परेशान थे। मैंने पूछा भी था कि क्या बात है। इस पर उन्होंने कहा कि छोटा-मोटा चलता रहता है विभाग में। बुधवार सुबह उन्हें ब्रेकफास्ट दिया। इसके बाद जाते वक्त लंच भी दिया। साढ़े दस बजे उन्हें फोन किया था और बेटी के जन्म प्रमाणपत्र की बात की थी। शाम चार बजे तक मेरी उनसे बात हो रही थी। लेकिन साढ़े चार बजे के बाद उनसे बात नहीं हुई। सात बजे विश्वविद्यालय के कुछ लोग आए और कहा कि उनकी तबीयत खराब है। वह उन्हें लेकर अस्पताल चले गए। वहां पहुंचने पर पता चला कि पति की मौत हो चुकी है।
Jammu University: सब सच है क्योंकि कहानी झूठी है... लिखकर प्रोफेसर चंद्रशेखर ने लगा लिया फंदा
विज्ञापन
उन्होंने कहा, 'मेरे पति खुदकुशी नहीं कर सकते थे। उनको विभाग में तंग किया जा रहा था। विशेष रूप से मनोविज्ञान विभाग की एचओडी आरती बख्शी उनको प्रताड़ित कर रही थीं। जब भी विभाग में कोई कार्यक्रम होता या फिर सेमिनार होता तो उनके बैठने के लिए सीट तक नहीं होती थी। मैं तो इसे जातपात का नाम भी दूंगी। क्योंकि हम लोग दलित समाज के हैं। कुछ समय पहले की ही बात है। पति को विभाग की एचओडी से हस्ताक्षर कराने थे। इसके लिए उन्हें घंटों इंतजार कराया गया। जिस विभाग में 15 साल सेवाएं दीं, उसी विभाग की एचओडी उनसे कहती हैं कि हस्ताक्षर कराने के लिए पहचान पत्र दिखाओ। छोटे-छोटे अवसरों पर उनको नीचा दिखाने की कोशिश की जाती थी।'
... तब एचओडी से तंग आकर दे दिया था इस्तीफा
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता का कहना है कि एचओडी आरती बख्शी उनको लगातार तंग करती आ रही थीं। एक बार तो उन्होंने अपना इस्तीफा तक दे दिया था, जिसे वीसी ने फाड़ दिया और कहा था कि ऐसी छोटी-मोटी बातों को लेकर इस्तीफा नहीं देते।
मैडम के रिटायर होने के समय ही यौन उत्पीड़न के आरोप क्यों लगे
डॉ. नीता का कहना है कि आरती बख्शी इसी महीने 22 सितंबर को रिटायर होने वाली हैं। मनोविज्ञान विभाग में आरती बख्शी एचओडी हैं। प्रो. चंद्रशेखर दूसरे स्थान पर थे। अब उन्हीं को एचओडी बनाया जाना था। उनका प्रमोशन भी हो चुका था। लेकिन साजिश के तहत उनको फंसाया गया। वरना ऐसे कैसे हो सकता है कि मैडम के रिटायर होने के समय ही उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगे। एक नहीं, दो नहीं, 22 छात्राओं से एक साथ कैसे यौन उत्पीड़न कर दिया। यह सब इसलिए किया गया, ताकि वो एचओडी न बने। डॉ. नीता का कहना है कि प्रो. चंद्रशेखर ने एक वर्कशाप करनी थी, जिसकी एचओडी ने अनुमति नहीं दी और कहा उनके होते और रिटायर होने के बाद भी वह ऐसा नहीं कर पाएंगे।
JU Professor Death: जम्मू विवि में छात्रों का प्रदर्शन, बोले- आत्महत्या नहीं, यह संस्थानिक हत्या का मामला
एक कमरे में बर्थडे सेलिब्रेशन, दूसरे में इंतजार कर रही थी मौत, आधे घंटे में बदल गया मंजर
एक कमरे में मनोविज्ञान विभाग की एचओडी आरती बख्शी का बर्थडे सेलिब्रेशन हो रहा था, तो दूसरे में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की मौत उनके आने का इंतजार कर रही थी। महज आधे घंटे में ही सारा माहौल बदल गया और विश्वविद्यालय से अस्पताल की तरफ दौड़ लग गई।
सूत्रों का कहना है कि बर्थडे सेलिब्रेशन में भी प्रो. चंद्रशेखर के साथ बदसलूकी की गई थी। इसके बाद वह इस शिकायत को लेकर यौन उत्पीड़न आंतरिक शिकायत जांच समिति के पास गए थे। लेकिन वहां से भी अच्छा रिस्पांस नहीं मिला। इससे आहत होकर वह अपने कमरे में चले गए थे।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता का कहना है कि 4.30 बजे तो मेरी उनके साथ बात हुई थी। तब उन्होंने बताया था कि आरती मैडम का बर्थडे सेलिब्रेट हो रहा है। इसके बाद वह अपने कमरे में पहुंच जाते हैं। फिर फंदा लगाने के लिए उन्हें पीले रंग की रस्सी भी मिल जाती है। आधे घंटे में उन्हें निलंबित करने का पत्र मिलता है। इसी आधे घंटे में वो रस्सी भी लाते हैं, फंदे पर लटक जाते हैं और मौत हो जाती है। मुझे तो लगता है कि उनको मारकर फंदे पर लटकाया गया।
15 मिनट तक देखते रहे, लेकिन फंदे से किसी ने नहीं उतारा
एडवोकेट एवं चंद्रशेखर के भाई विनोद कुमार ने कहा कि आमतौर पर जब भी कोई फंदे पर लटकता हुआ मिलता है, तो उसको तत्काल उतारकर देखा जाता है कि सांस चल रही या नहीं। लेकिन विवि के लोगों ने दरवाजा तोड़ने के बाद 15 मिनट तक उनको फंदे से उतारा तक नहीं। यह देखना भी जरूरी नहीं समझा कि सांस चल रही या नहीं। अहम बात तो यह है कि उनके पास रस्सी कैसे आई। विवि प्रशासन कहता है कि उनको 4.30 बजे निलंबन का पत्र दिया गया। पांच बजे उनकी मौत हो जाती है। आधे घंटे में ही उन्होंने रस्सी कहां से ली और कैसे सबकुछ हो गया। किसी पर भी आरोप लगाने पर उसका पक्ष सुना जाता है। उनको मौका तक नहीं दिया गया। ऐसे कैसे राह चलते आरोप लगा देंगे कि यौन उत्पीड़न किया गया है। हम यह सवाल जरूर करेंगे और इसका जवाब देना होगा। विभाग की एचओडी आरती बख्शी उनको तंग करती थीं। उनके मरने के बाद वह न अस्पताल पहुंचीं, न उनके घर पहुंचीं।
'सर ऐसा नहीं कर सकते थे'
प्रोफेसर इशा इस समय शहर के एक कालेज में प्रोफेसर हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सर से ही पढ़ाई की हुई है। उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है, यह बिल्कुल नहीं हो सकता। ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं है।
चार डॉक्टरों के बोर्ड ने तहसीलदार की मौजूदगी में किया पोस्टमार्टम
एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर का वीरवार को पोस्टमार्टम कर शव पैतृक गांव मुरादनगर भेज दिया गया। 4 डॉक्टरों के बोर्ड ने तहसीलदार की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया। साथ ही इसकी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई। डॉक्टरों के बोर्ड में पैथोलॉजी विभाग की लेक्चरर डॉ. सूबी सिंह, मेडिसन विभाग के लेक्चरर जोगिंदर सिंह, ईएनटी के लेक्चरर अचल गुप्ता और फोरेंसिक मेडिसिन की रजिस्ट्रार डॉ. आलिया शाहीन शामिल रहीं।
आरोप लगाने वाली छात्राओं से हो सकती है पूछताछ
एसोसिएट प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली सभी छात्राएं नए बैच की हैं। एकसाथ सभी छात्राओं का आरोप लगाने की प्रमुखता से जांच होनी तय है। ऐसे में मामले की जांच करने वाली पुलिस आरोप लगाने वाली छात्राओं से भी पूछताछ करेगी। हालांकि इस मामले की शिकायत पुलिस के पास नहीं थी। लेकिन मृतक डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी ने पुलिस को दिए अधिकारिक बयान में साफ कहा है कि उनके पति को तंग किया जाता था। एक साजिश के तहत उनको फंसाया गया है। ऐसे में पुलिस प्रोफेसर पर लगे आरोपों की गहनता से जांच कर सकती है। साथ ही यह मामला 174 से 306 में तब्दील हो सकता है। संभव है कि इस मामले में पुलिस विशेष जांच कमेटी भी बने।
Jammu University: फंदे पर लटकते मिले जम्मू विवि मनोविज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर, यौन उत्पीड़न के लगे थे आरोप
जरूरत पड़ने पर गठित की जा सकती है एसआईटी
फिलहाल तो इस मामले में 174 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जो कुछ भी सामने आएगा, उसके मुताबिक जरूरत पड़ने पर एसआईटी का गठन किया जा सकता है। उक्त धारा को दूसरी धारा में तब्दील भी किया जा सकता है। अभी पोस्टमार्टम करवाया गया है। - चंदन कोहली, एसएसपी, जम्मू।
'विश्वविद्यालय प्रशासन मामले को दबा रहा'
सोची समझी साजिश के तहत ऐसा किया गया है। जाति विशेष की वजह से डॉ. चंद्रशेखर को तंग किया जाता था। वह एचओडी बनने वाले थे और उन पर आरोप लगा दिया। विवि में इससे पहले भी इस तरह के मामले आए हैं। ऐसा क्या था कि दो सितंबर को एक साथ दो-तीन नहीं 22 छात्राएं यौन उत्पीड़न की शिकायत लेकर पहुंच जाती हैं। यूं तो ऐसे मामलों की जांच के लिए महीनों लग जाते हैं, यहां जांच पूरी हुए बिना ही पांच दिन में प्रो. चंद्रशेखर को निलंबित कर दिया जाता है। विवि प्रशासन इस मामले को पूरी तरह से दबा रहा है। इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन होना चाहिए। - पवन कुंडल, एडवोकेट।
विज्ञापन
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता ने कहा कि वे ठीक थे, लेकिन दो-तीन दिनों से कुछ परेशान थे। मैंने पूछा भी था कि क्या बात है। इस पर उन्होंने कहा कि छोटा-मोटा चलता रहता है विभाग में। बुधवार सुबह उन्हें ब्रेकफास्ट दिया। इसके बाद जाते वक्त लंच भी दिया। साढ़े दस बजे उन्हें फोन किया था और बेटी के जन्म प्रमाणपत्र की बात की थी। शाम चार बजे तक मेरी उनसे बात हो रही थी। लेकिन साढ़े चार बजे के बाद उनसे बात नहीं हुई। सात बजे विश्वविद्यालय के कुछ लोग आए और कहा कि उनकी तबीयत खराब है। वह उन्हें लेकर अस्पताल चले गए। वहां पहुंचने पर पता चला कि पति की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
Jammu University: सब सच है क्योंकि कहानी झूठी है... लिखकर प्रोफेसर चंद्रशेखर ने लगा लिया फंदा
विज्ञापन
उन्होंने कहा, 'मेरे पति खुदकुशी नहीं कर सकते थे। उनको विभाग में तंग किया जा रहा था। विशेष रूप से मनोविज्ञान विभाग की एचओडी आरती बख्शी उनको प्रताड़ित कर रही थीं। जब भी विभाग में कोई कार्यक्रम होता या फिर सेमिनार होता तो उनके बैठने के लिए सीट तक नहीं होती थी। मैं तो इसे जातपात का नाम भी दूंगी। क्योंकि हम लोग दलित समाज के हैं। कुछ समय पहले की ही बात है। पति को विभाग की एचओडी से हस्ताक्षर कराने थे। इसके लिए उन्हें घंटों इंतजार कराया गया। जिस विभाग में 15 साल सेवाएं दीं, उसी विभाग की एचओडी उनसे कहती हैं कि हस्ताक्षर कराने के लिए पहचान पत्र दिखाओ। छोटे-छोटे अवसरों पर उनको नीचा दिखाने की कोशिश की जाती थी।'
... तब एचओडी से तंग आकर दे दिया था इस्तीफा
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता का कहना है कि एचओडी आरती बख्शी उनको लगातार तंग करती आ रही थीं। एक बार तो उन्होंने अपना इस्तीफा तक दे दिया था, जिसे वीसी ने फाड़ दिया और कहा था कि ऐसी छोटी-मोटी बातों को लेकर इस्तीफा नहीं देते।
मैडम के रिटायर होने के समय ही यौन उत्पीड़न के आरोप क्यों लगे
डॉ. नीता का कहना है कि आरती बख्शी इसी महीने 22 सितंबर को रिटायर होने वाली हैं। मनोविज्ञान विभाग में आरती बख्शी एचओडी हैं। प्रो. चंद्रशेखर दूसरे स्थान पर थे। अब उन्हीं को एचओडी बनाया जाना था। उनका प्रमोशन भी हो चुका था। लेकिन साजिश के तहत उनको फंसाया गया। वरना ऐसे कैसे हो सकता है कि मैडम के रिटायर होने के समय ही उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगे। एक नहीं, दो नहीं, 22 छात्राओं से एक साथ कैसे यौन उत्पीड़न कर दिया। यह सब इसलिए किया गया, ताकि वो एचओडी न बने। डॉ. नीता का कहना है कि प्रो. चंद्रशेखर ने एक वर्कशाप करनी थी, जिसकी एचओडी ने अनुमति नहीं दी और कहा उनके होते और रिटायर होने के बाद भी वह ऐसा नहीं कर पाएंगे।
JU Professor Death: जम्मू विवि में छात्रों का प्रदर्शन, बोले- आत्महत्या नहीं, यह संस्थानिक हत्या का मामला
एक कमरे में बर्थडे सेलिब्रेशन, दूसरे में इंतजार कर रही थी मौत, आधे घंटे में बदल गया मंजर
एक कमरे में मनोविज्ञान विभाग की एचओडी आरती बख्शी का बर्थडे सेलिब्रेशन हो रहा था, तो दूसरे में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की मौत उनके आने का इंतजार कर रही थी। महज आधे घंटे में ही सारा माहौल बदल गया और विश्वविद्यालय से अस्पताल की तरफ दौड़ लग गई।
सूत्रों का कहना है कि बर्थडे सेलिब्रेशन में भी प्रो. चंद्रशेखर के साथ बदसलूकी की गई थी। इसके बाद वह इस शिकायत को लेकर यौन उत्पीड़न आंतरिक शिकायत जांच समिति के पास गए थे। लेकिन वहां से भी अच्छा रिस्पांस नहीं मिला। इससे आहत होकर वह अपने कमरे में चले गए थे।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता का कहना है कि 4.30 बजे तो मेरी उनके साथ बात हुई थी। तब उन्होंने बताया था कि आरती मैडम का बर्थडे सेलिब्रेट हो रहा है। इसके बाद वह अपने कमरे में पहुंच जाते हैं। फिर फंदा लगाने के लिए उन्हें पीले रंग की रस्सी भी मिल जाती है। आधे घंटे में उन्हें निलंबित करने का पत्र मिलता है। इसी आधे घंटे में वो रस्सी भी लाते हैं, फंदे पर लटक जाते हैं और मौत हो जाती है। मुझे तो लगता है कि उनको मारकर फंदे पर लटकाया गया।
15 मिनट तक देखते रहे, लेकिन फंदे से किसी ने नहीं उतारा
एडवोकेट एवं चंद्रशेखर के भाई विनोद कुमार ने कहा कि आमतौर पर जब भी कोई फंदे पर लटकता हुआ मिलता है, तो उसको तत्काल उतारकर देखा जाता है कि सांस चल रही या नहीं। लेकिन विवि के लोगों ने दरवाजा तोड़ने के बाद 15 मिनट तक उनको फंदे से उतारा तक नहीं। यह देखना भी जरूरी नहीं समझा कि सांस चल रही या नहीं। अहम बात तो यह है कि उनके पास रस्सी कैसे आई। विवि प्रशासन कहता है कि उनको 4.30 बजे निलंबन का पत्र दिया गया। पांच बजे उनकी मौत हो जाती है। आधे घंटे में ही उन्होंने रस्सी कहां से ली और कैसे सबकुछ हो गया। किसी पर भी आरोप लगाने पर उसका पक्ष सुना जाता है। उनको मौका तक नहीं दिया गया। ऐसे कैसे राह चलते आरोप लगा देंगे कि यौन उत्पीड़न किया गया है। हम यह सवाल जरूर करेंगे और इसका जवाब देना होगा। विभाग की एचओडी आरती बख्शी उनको तंग करती थीं। उनके मरने के बाद वह न अस्पताल पहुंचीं, न उनके घर पहुंचीं।
'सर ऐसा नहीं कर सकते थे'
प्रोफेसर इशा इस समय शहर के एक कालेज में प्रोफेसर हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सर से ही पढ़ाई की हुई है। उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है, यह बिल्कुल नहीं हो सकता। ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं है।
चार डॉक्टरों के बोर्ड ने तहसीलदार की मौजूदगी में किया पोस्टमार्टम
एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर का वीरवार को पोस्टमार्टम कर शव पैतृक गांव मुरादनगर भेज दिया गया। 4 डॉक्टरों के बोर्ड ने तहसीलदार की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया। साथ ही इसकी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई। डॉक्टरों के बोर्ड में पैथोलॉजी विभाग की लेक्चरर डॉ. सूबी सिंह, मेडिसन विभाग के लेक्चरर जोगिंदर सिंह, ईएनटी के लेक्चरर अचल गुप्ता और फोरेंसिक मेडिसिन की रजिस्ट्रार डॉ. आलिया शाहीन शामिल रहीं।
आरोप लगाने वाली छात्राओं से हो सकती है पूछताछ
एसोसिएट प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली सभी छात्राएं नए बैच की हैं। एकसाथ सभी छात्राओं का आरोप लगाने की प्रमुखता से जांच होनी तय है। ऐसे में मामले की जांच करने वाली पुलिस आरोप लगाने वाली छात्राओं से भी पूछताछ करेगी। हालांकि इस मामले की शिकायत पुलिस के पास नहीं थी। लेकिन मृतक डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी ने पुलिस को दिए अधिकारिक बयान में साफ कहा है कि उनके पति को तंग किया जाता था। एक साजिश के तहत उनको फंसाया गया है। ऐसे में पुलिस प्रोफेसर पर लगे आरोपों की गहनता से जांच कर सकती है। साथ ही यह मामला 174 से 306 में तब्दील हो सकता है। संभव है कि इस मामले में पुलिस विशेष जांच कमेटी भी बने।
Jammu University: फंदे पर लटकते मिले जम्मू विवि मनोविज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर, यौन उत्पीड़न के लगे थे आरोप
जरूरत पड़ने पर गठित की जा सकती है एसआईटी
फिलहाल तो इस मामले में 174 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जो कुछ भी सामने आएगा, उसके मुताबिक जरूरत पड़ने पर एसआईटी का गठन किया जा सकता है। उक्त धारा को दूसरी धारा में तब्दील भी किया जा सकता है। अभी पोस्टमार्टम करवाया गया है। - चंदन कोहली, एसएसपी, जम्मू।
'विश्वविद्यालय प्रशासन मामले को दबा रहा'
सोची समझी साजिश के तहत ऐसा किया गया है। जाति विशेष की वजह से डॉ. चंद्रशेखर को तंग किया जाता था। वह एचओडी बनने वाले थे और उन पर आरोप लगा दिया। विवि में इससे पहले भी इस तरह के मामले आए हैं। ऐसा क्या था कि दो सितंबर को एक साथ दो-तीन नहीं 22 छात्राएं यौन उत्पीड़न की शिकायत लेकर पहुंच जाती हैं। यूं तो ऐसे मामलों की जांच के लिए महीनों लग जाते हैं, यहां जांच पूरी हुए बिना ही पांच दिन में प्रो. चंद्रशेखर को निलंबित कर दिया जाता है। विवि प्रशासन इस मामले को पूरी तरह से दबा रहा है। इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन होना चाहिए। - पवन कुंडल, एडवोकेट।