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जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर पुलवामा हमला दोहराने की थी कोशिश, मिला आतंकियों का पत्र
Sun, 31 Mar 2019 02:50 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 31 Mar 2019 02:50 PM IST
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इनसेट में बनिहाल हमले के बाद मिला पत्र
- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर के बनिहाल में हाईवे पर जिस जगह कार में धमाका हुआ है वहां से एक पत्र भी बरामद किया गया है। सूत्रों के अनुसार पत्र में कलमा के बाद लिखा गया है कि मैं हिजबुल मुजाहिदीन जम्मू-कश्मीर का एक मुजाहिद हूं। नाम ओवैस अमीन है। सोशल मीडिया के माध्यम से चंद बातें शेयर करना चाहता हूं। उम्मीद है कि आप मेरी इन बातों को ध्यान में रखेंगे।
पत्र में उसने कश्मीरियों के साथ की जा रही ज्यादतियों का भी हवाला दिया है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की ओर से सोशल मीडिया पर वायरल इस पत्र के बारे में कोई पुष्टि नहीं की गई है। यह भी कहा जा रहा है कि पुलवामा हमले की तरह वीडियो बनाने के लिए यह स्क्रिप्ट तैयार की गई होगी।
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बता दें कि श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बार फिर शनिवार को पुलवामा जैसे हमले की कोशिश की गई। रामबन जिले के जवाहर टनल के पास गैस सिलिंडर से लदी एक सेंट्रो कार सीआरपीएफ के काफिले से टकरा गई। जोरदार विस्फोट में कार के पूरी तरह परखच्चे उड़ गए। हालांकि, इसमें सीआरपीएफ जवानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है। काफिले की बस की खिड़की टूट गई है और पीछे की ओर हल्का सा नुकसान हुआ है। कार चालक धमाके से पहले ही फरार हो गया।
घटना के बाद पूरे इलाके को घेरकर देर शाम तक तलाशी अभियान चलाया गया। मौके से तेल भरी बोतलें तथा यूरिया खाद बरामद हुई है। इसके चलते सुरक्षा एजेंसियों को यह धमाका आतंकी घटना का शक है। कार में रखे छोटे सिलिंडर में धमाका हुआ है जबकि दूसरा बड़ा (19 किलोग्राम) सिलिंडर सुरक्षित है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यदि दूसरा सिलिंडर भी फट गया होता तो स्थिति भयावह हो सकती थी। घटना शनिवार सुबह 10.30 मिनट पर तेतहार गांव के पास हुई।
घटना के बाद एनआईए की टीम ने मौके पर डेरा डाल दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ करने के अलावा मौके से सैंपल एकत्र किए। सूत्रों ने बताया कि जांच टीम को मौके से विस्फोटक तथा अन्य प्रकार के सामग्री के सबूत भी मिले हैं। बताया जाता है कि शनिवार को श्रीनगर से जम्मू की तरफ सीआरपीएफ का काफिला आ रहा था। जवाहर टनल के थोड़ा आगे एक मोड़ पर पीछे से सफेद रंग की सेंट्रो कार आई।
कार का पिछला कोना सीआरपीएफ की बस से टकराया। इससे कार साइड हो गई। इससे पहले की सीआरपीएफ के जवान कुछ समझ पाते कार में जोरदार धमाका हुआ और कार के परखच्चे उड़ गए। कार चालक के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है। सुरक्षा एजेंसियां धमाके के कारणों के बारे में पता लगाने में जुटी हैं। हादसे के बाद पूरे इलाके को सेना, सीआरपीएफ, पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप ने घेर लिया और इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया।
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पत्र में उसने कश्मीरियों के साथ की जा रही ज्यादतियों का भी हवाला दिया है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की ओर से सोशल मीडिया पर वायरल इस पत्र के बारे में कोई पुष्टि नहीं की गई है। यह भी कहा जा रहा है कि पुलवामा हमले की तरह वीडियो बनाने के लिए यह स्क्रिप्ट तैयार की गई होगी।
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बता दें कि श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बार फिर शनिवार को पुलवामा जैसे हमले की कोशिश की गई। रामबन जिले के जवाहर टनल के पास गैस सिलिंडर से लदी एक सेंट्रो कार सीआरपीएफ के काफिले से टकरा गई। जोरदार विस्फोट में कार के पूरी तरह परखच्चे उड़ गए। हालांकि, इसमें सीआरपीएफ जवानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है। काफिले की बस की खिड़की टूट गई है और पीछे की ओर हल्का सा नुकसान हुआ है। कार चालक धमाके से पहले ही फरार हो गया।
घटना के बाद पूरे इलाके को घेरकर देर शाम तक तलाशी अभियान चलाया गया। मौके से तेल भरी बोतलें तथा यूरिया खाद बरामद हुई है। इसके चलते सुरक्षा एजेंसियों को यह धमाका आतंकी घटना का शक है। कार में रखे छोटे सिलिंडर में धमाका हुआ है जबकि दूसरा बड़ा (19 किलोग्राम) सिलिंडर सुरक्षित है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यदि दूसरा सिलिंडर भी फट गया होता तो स्थिति भयावह हो सकती थी। घटना शनिवार सुबह 10.30 मिनट पर तेतहार गांव के पास हुई।
घटना के बाद एनआईए की टीम ने मौके पर डेरा डाल दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ करने के अलावा मौके से सैंपल एकत्र किए। सूत्रों ने बताया कि जांच टीम को मौके से विस्फोटक तथा अन्य प्रकार के सामग्री के सबूत भी मिले हैं। बताया जाता है कि शनिवार को श्रीनगर से जम्मू की तरफ सीआरपीएफ का काफिला आ रहा था। जवाहर टनल के थोड़ा आगे एक मोड़ पर पीछे से सफेद रंग की सेंट्रो कार आई।
कार का पिछला कोना सीआरपीएफ की बस से टकराया। इससे कार साइड हो गई। इससे पहले की सीआरपीएफ के जवान कुछ समझ पाते कार में जोरदार धमाका हुआ और कार के परखच्चे उड़ गए। कार चालक के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है। सुरक्षा एजेंसियां धमाके के कारणों के बारे में पता लगाने में जुटी हैं। हादसे के बाद पूरे इलाके को सेना, सीआरपीएफ, पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप ने घेर लिया और इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया।
कार 2011 मॉडल की, अब मालिक तक पहुंचने की कोशिश
हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। उस पर लगा नंबर भी मिट गया है। अब सुरक्षा एजेंसियां गाड़ी के चेसिस तथा इंजन नंबर से उसके मालिक की तलाश करने में जुटी हैं। सूत्रों ने बताया कि गाड़ी 2011 मॉडल की है। सुरक्षा एजेंसियों ने हुंडई के विशेषज्ञों को लेकर मौके पर जांच पड़ताल की। गाड़ी मालिक की पहचान कर ली गई है, लेकिन उसका नाम गोपनीय रखा गया है।
पांच घंटे रोका गया काफिला
घटना के बाद काजीगुंड में सीआरपीएफ के वाहनों को रोक दिया गया। करीब पांच घंटे तक काजीगुंड से लेकर रामबन तक हाइवे को खंगालने के बाद सीआरपीएफ के काफिले को आगे बढ़ने की मंजूरी दी गई।
पुलवामा में हुआ था इसी तरह का हमला
डेढ़ महीना पहले ही 14 फरवरी को पुलवामा में इसी तरह का हमला हुआ था। हाइवे पर एक आत्मघाती आतंकी ने सीआरपीएफ बस से बारूद से भरी कार टकरा दी थी। कार में 200 किलो विस्फोटक सामग्री थी। इससे सीआरपीएफ का वाहन उड़ गया था। हादसे में 40 जवान शहीद हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।
एफएसएल की टीम ने सैंपल लिए
शुरूआती जांच में पता चला है कि कार में एक सिलेंडर 19 किलो और दूसरा 5 किलो का था। इस पहलू पर भी जांच की जा रही है कि इसमें कोई विस्फोट सामग्री का इस्तेमाल तो नहीं हुआ। एफएसएल और विशेषज्ञों की टीम ने मौके से कई तरह के सैंपल उठाए हैं। कार का चालक मौके से फरार हो गया। आशंका है कि उसे चोट आई है और वह आसपास ही इलाज कराने गया होगा।
हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। उस पर लगा नंबर भी मिट गया है। अब सुरक्षा एजेंसियां गाड़ी के चेसिस तथा इंजन नंबर से उसके मालिक की तलाश करने में जुटी हैं। सूत्रों ने बताया कि गाड़ी 2011 मॉडल की है। सुरक्षा एजेंसियों ने हुंडई के विशेषज्ञों को लेकर मौके पर जांच पड़ताल की। गाड़ी मालिक की पहचान कर ली गई है, लेकिन उसका नाम गोपनीय रखा गया है।
पांच घंटे रोका गया काफिला
घटना के बाद काजीगुंड में सीआरपीएफ के वाहनों को रोक दिया गया। करीब पांच घंटे तक काजीगुंड से लेकर रामबन तक हाइवे को खंगालने के बाद सीआरपीएफ के काफिले को आगे बढ़ने की मंजूरी दी गई।
पुलवामा में हुआ था इसी तरह का हमला
डेढ़ महीना पहले ही 14 फरवरी को पुलवामा में इसी तरह का हमला हुआ था। हाइवे पर एक आत्मघाती आतंकी ने सीआरपीएफ बस से बारूद से भरी कार टकरा दी थी। कार में 200 किलो विस्फोटक सामग्री थी। इससे सीआरपीएफ का वाहन उड़ गया था। हादसे में 40 जवान शहीद हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।
एफएसएल की टीम ने सैंपल लिए
शुरूआती जांच में पता चला है कि कार में एक सिलेंडर 19 किलो और दूसरा 5 किलो का था। इस पहलू पर भी जांच की जा रही है कि इसमें कोई विस्फोट सामग्री का इस्तेमाल तो नहीं हुआ। एफएसएल और विशेषज्ञों की टीम ने मौके से कई तरह के सैंपल उठाए हैं। कार का चालक मौके से फरार हो गया। आशंका है कि उसे चोट आई है और वह आसपास ही इलाज कराने गया होगा।