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Jammu News: सरकार को वक्फ अधिनियम के तहत ट्रिब्यूनल गठित करने का निर्देश
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जम्मू। एक ऐतिहासिक फैसले में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजीव कुमार ने सरकार को वक्फ अधिनियम के तहत अनिवार्य एक या अधिक ट्रिब्यूनल गठित करने का निर्देश दिया। यह निर्देश याचिकों की सुनवाई के दौरान दिए गए हैं। इस संबंध में मासिक किराए में मनमानी, तर्कहीनता और अत्यधिक वृद्धि के संबंध में याचिका दायर की गई थी।
याचिकाकर्ताओं के पेश वकील ने तर्क दिया कि वक्फ बोर्ड से निष्पक्ष और सार्वजनिक हित में कार्य करने की उम्मीद की जाती है। वक्फ बोर्ड ने याचिकाकर्ताओं के कब्जे वाली संपत्तियों का किराया एकतरफा और उन्हें सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना बढ़ा दिया। न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने फैसला करते हुए कहा कि धारा 83 की उपधारा (1) से स्पष्ट होता है कि प्रत्येक राज्य सरकार जिसमें केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल होगा, को आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी करके एक या एक से अधिक न्यायाधिकरणों का गठन करने के लिए बाध्य किया गया है। इससे यह भी पता चलता है कि राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा गठित ट्रिब्यूनल/ट्रिब्यूनल के पास वक्फ या वक्फ संपत्ति से संबंधित किसी भी विवाद, प्रश्न या अन्य मामले, किरायेदार को बेदखल करने या अधिकारों और दायित्वों के निर्धारण का अधिकार क्षेत्र होगा। इन याचिकाओं में उठाया गया विवाद ट्रिब्यूनल के निर्णय के अंतर्गत आता है। यह कहना पर्याप्त होगा कि वैधानिक वैकल्पिक उपचार की उपलब्धता के बावजूद पार्टियों को वैकल्पिक उपाय या अनुच्छेद 226 के तहत याचिका पर विचार करने का सवाल तभी उठेगा जब इस न्यायालय के पास याचिका पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र होगा। याचिकाओं को सुनवाई योग्य नहीं माना जाता है और तदनुसार, उन्हें खारिज कर दिया गया। इस पर सरकार को एक या एक से अधिक न्यायाधिकरणों का गठन करने का निर्देश दिया। जेएनएफ
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याचिकाकर्ताओं के पेश वकील ने तर्क दिया कि वक्फ बोर्ड से निष्पक्ष और सार्वजनिक हित में कार्य करने की उम्मीद की जाती है। वक्फ बोर्ड ने याचिकाकर्ताओं के कब्जे वाली संपत्तियों का किराया एकतरफा और उन्हें सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना बढ़ा दिया। न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने फैसला करते हुए कहा कि धारा 83 की उपधारा (1) से स्पष्ट होता है कि प्रत्येक राज्य सरकार जिसमें केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल होगा, को आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी करके एक या एक से अधिक न्यायाधिकरणों का गठन करने के लिए बाध्य किया गया है। इससे यह भी पता चलता है कि राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा गठित ट्रिब्यूनल/ट्रिब्यूनल के पास वक्फ या वक्फ संपत्ति से संबंधित किसी भी विवाद, प्रश्न या अन्य मामले, किरायेदार को बेदखल करने या अधिकारों और दायित्वों के निर्धारण का अधिकार क्षेत्र होगा। इन याचिकाओं में उठाया गया विवाद ट्रिब्यूनल के निर्णय के अंतर्गत आता है। यह कहना पर्याप्त होगा कि वैधानिक वैकल्पिक उपचार की उपलब्धता के बावजूद पार्टियों को वैकल्पिक उपाय या अनुच्छेद 226 के तहत याचिका पर विचार करने का सवाल तभी उठेगा जब इस न्यायालय के पास याचिका पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र होगा। याचिकाओं को सुनवाई योग्य नहीं माना जाता है और तदनुसार, उन्हें खारिज कर दिया गया। इस पर सरकार को एक या एक से अधिक न्यायाधिकरणों का गठन करने का निर्देश दिया। जेएनएफ
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