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जम्मू: गुपकार समझौते की बैठक के विरोध में शिवसेना का प्रदर्शन
Sat, 07 Nov 2020 02:22 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sat, 07 Nov 2020 02:22 PM IST
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गुपकार समझौते को लेकर बैठक
- फोटो : amar ujala
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गुपकार एलायंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के घर जारी शनिवार को जारी बैठक में विभिन्न संगठनों के लोग भी पहुंचे हैं। उनकी इस बैठक का शिवसेना और डोगरा फ्रंट द्वारा विरोध भी किया जा रहा है। इसी के चलते फारुख अब्दुल्ला के घर के बाहर शिवसेना कार्यकर्ता पहुंचे तो शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
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इसी बीच, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग की मौजूदगी में प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप ने बैठक कर गुपकार गठबंधन को घेरने की रणनीति बनाई। जम्मू में फारूक अब्दुल्ला के घर पर गठबंधन की बैठक के जवाब में भाजपा ने भी शनिवार को जम्मू में सभी प्रमुख नेताओं को बुला लिया है। भाजपा की इस बैठक में पीएमओ में राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह समेत सांसद, पूर्व मंत्री और विधायकों के साथ सभी प्रमुख नेता शामिल होंगे।
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बजरंग दल ने भी किया विरोध, फूंका पुतला
आज राष्ट्रीय बजरंग दल ने बठिंडी रोड गुपकार एजेंडे पर जो बैठक फारूक अब्दुल्लाह के घर पर हो रही है उसका जोरदार विरोध किया और उसका पुतला फूंका। इस प्रदर्शन की अध्यक्षता राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष राकेश बजरंगी ने की।
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राकेश बजरंगी ने कहा कि यह एजेंडा जम्मू के लोगों ने नकार दिया है जिस प्रकार से दो दिन से महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला बैठक कर रहे हैं, इन बैठकों में जम्मू के लोग गैरहाजिर रहे कुछ गिने-चुने लोग ही इनकी मीटिंग में कल शामिल हुए, जो इनके मुंह पर जम्मू के लोगों की तरफ से एक जोरदार तमाचा है।
राकेश ने आगे कहा कि, अब इनका जनाधार जम्मू में खत्म होता नजर आ रहा है। आज जो बैठक इन्होंने यहां पर रखी है, उस मीटिंग में भी जम्मू के नेता न के बराबर हैं, जिससे पता चलता है कि जम्मू के लोग अब इनकी राजनीति को समझ चुके हैं।
वह आगे बोले कि, यह कश्मीर में देश के खिलाफ बोलते हैं, देश के संविधान को नहीं मानते हैं, देश के कानून को नहीं मानते हैं, लेकिन जम्मू में आकर राष्ट्रवादी हो जाते हैं। देशभक्त हो जाते हैं। यहां पर आकर यह धर्म की राजनीति शुरू कर देते हैं, यहां पर आकर यह जम्मू के फेवर में बोलते हैं गले में और सर में पगड़ी भगवा पहनते हैं। इस मौके पर अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे, जिसमें रजत सुमित, ऋषभ, आस्तिक, रोहित, सौरभ,, अभिषेक अनुभव, अवरुद्ध, राहुल, दिव्यांशु कपाही, अकेश पंडित, राजन, अश्वनी आदि अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
क्या है गुपकार समझौता
चार अगस्त 2019 को फारूक अब्दुल्ला के गुपकार स्थित आवास पर एक सर्वदलीय बैठक हुई थी। यहां एक प्रस्ताव जारी किया गया था, जिसे गुपकार समझौता कहा गया। इसके अनुसार पार्टियों ने निर्णय किया कि वे जम्मू-कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और उसके विशेष दर्जे को बनाए रखने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करेंगे।
गुपकार समझौते के तहत कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और विशेष दर्जे की रक्षा और बचाव के लिए हम सभी नेता प्रतिबद्ध हैं। नेताओं ने यह भी कहा था कि राज्य का बंटवारा कश्मीर और लद्दाख के लोगों के खिलाफ जुल्म है। 370 समाप्त करने के फैसले को इन नेताओं ने असंवैधानिक करार दिया था।
इस समझौते में जम्मू-कश्मीर के छह बड़े राजनीतिक दल शामिल हैं। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस समेत तीन और दल हैं। बता दें कि गुपकार समझौते के अगले ही दिन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया गया था और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख तो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया था।