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Jammu News: शहर में दौड़ने लगे सार्वजनिक वाहन, सवारियों का इंतजार
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दूसरे रूटों पर चलने वाले वाहनों को भी नहीं मिल पा रही गति
पटरी पर आने में लगेंगे 15 से 20 दिन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। हालात सामान्य होने पर शहर में सार्वजनिक यात्री वाहन सड़कों पर दौड़ने लगे हैं, लेकिन आम दिनों के मुकाबले उन्हें अधिक सवारियों का इंतजार है। ग्रामीण क्षेत्रों से काफी कम संख्या में यात्री शहर का रुख कर रहे हैं और जो आ रहे हैं वे भी सिर्फ जरूरी काम के लिए।
पाकिस्तान की ओर से लगातार सीजफायर के उल्लंघन की घटनाओं से सार्वजनिक वाहनों के पहिए भी थमे हैं। शहर के विभिन्न रूटों पर रोजाना 1200 के करीब मेटाडोर चलती हैं, लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ 700-800 तक ही बहाल हो पाई हैं। इसका एक कारण कई वाहनों के चालकों का घरों को लौट जाना है और दूसरा अभी उतनी सवारियां नहीं मिल पा रही हैं।
आल जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन कर्ण सिंह वजीर के अनुसार सीमांत से जुड़े इलाकों में अभी कम सार्वजनिक वाहन चल रहे हैं। सीमांत इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों की दिनचर्या घर से बंकर और फिर बंकर से घर तक ही रह रही है, जिससे लोग खरीदारी या दूसरे कार्यों के लिए शहर या अन्य दूसरे रूटों पर नहीं जा रहे हैं। इससे यात्री वाहनों में सवारियां न के बराबर पहुंच रही हैं।
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इसी तरह रेलवे स्टेशन से ही कटड़ा के लिए रोजाना 30-35 यात्री बसें जाती थीं, जो अब मात्र दो-तीन जा रही हैं। इसी तरह भद्रवाह, किश्तवाड़, डोडा, राजोरी आदि हिस्सों में भी जाने वाले यात्री वाहनों की यही हालत है। जिस तरह से हालात लग रहे हैं उससे लगता है कि 15 से 20 दिन सार्वजनिक यात्री वाहनों को पटरी पर आने में लग जाएंगे। गर्मियों का सीजन प्रभावित होने से यात्री वाहन संचालकों को नुकसान हो रहा है।
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पटरी पर आने में लगेंगे 15 से 20 दिन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। हालात सामान्य होने पर शहर में सार्वजनिक यात्री वाहन सड़कों पर दौड़ने लगे हैं, लेकिन आम दिनों के मुकाबले उन्हें अधिक सवारियों का इंतजार है। ग्रामीण क्षेत्रों से काफी कम संख्या में यात्री शहर का रुख कर रहे हैं और जो आ रहे हैं वे भी सिर्फ जरूरी काम के लिए।
पाकिस्तान की ओर से लगातार सीजफायर के उल्लंघन की घटनाओं से सार्वजनिक वाहनों के पहिए भी थमे हैं। शहर के विभिन्न रूटों पर रोजाना 1200 के करीब मेटाडोर चलती हैं, लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ 700-800 तक ही बहाल हो पाई हैं। इसका एक कारण कई वाहनों के चालकों का घरों को लौट जाना है और दूसरा अभी उतनी सवारियां नहीं मिल पा रही हैं।
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आल जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन कर्ण सिंह वजीर के अनुसार सीमांत से जुड़े इलाकों में अभी कम सार्वजनिक वाहन चल रहे हैं। सीमांत इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों की दिनचर्या घर से बंकर और फिर बंकर से घर तक ही रह रही है, जिससे लोग खरीदारी या दूसरे कार्यों के लिए शहर या अन्य दूसरे रूटों पर नहीं जा रहे हैं। इससे यात्री वाहनों में सवारियां न के बराबर पहुंच रही हैं।
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इसी तरह रेलवे स्टेशन से ही कटड़ा के लिए रोजाना 30-35 यात्री बसें जाती थीं, जो अब मात्र दो-तीन जा रही हैं। इसी तरह भद्रवाह, किश्तवाड़, डोडा, राजोरी आदि हिस्सों में भी जाने वाले यात्री वाहनों की यही हालत है। जिस तरह से हालात लग रहे हैं उससे लगता है कि 15 से 20 दिन सार्वजनिक यात्री वाहनों को पटरी पर आने में लग जाएंगे। गर्मियों का सीजन प्रभावित होने से यात्री वाहन संचालकों को नुकसान हो रहा है।