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जन मुद्दों का अंबार, वादे पूरे करे उमर सरकार : शिवसेना
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न्यूनतम वेतन, डेलीवेजरों को पक्का करने, 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शिवसेना (यूबीटी) जम्मू-कश्मीर इकाई ने कैबिनेट बैठक में जन मुद्दों व वादों को पूरा करने को लेकर कोई चर्चा नहीं करने पर रोष जताया है। साथ ही राज्य दर्जा बहाली की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने और जम्मू को प्रदेश की स्थाई राजधानी घोषित करने की मांग उठाई।
पार्टी प्रदेश मध्यवर्ती कार्यालय में मंगलावार को आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष मनीष साहनी ने उमर सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 20 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में डेलीवेजरों को पक्का करने, न्यूनतम वेतन लागू करने और 200 यूनिट निःशुल्क बिजली देने और स्वच्छ पेयजल आदि अपने वादों को पूरा करने को लेकर कोई चर्चा व फैसला नहीं लिया गया।
राज्य दर्जा बहाली की मांग को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। सरकार के अभी तक के कार्यकाल पर नजर दौड़ाएं तो मुख्यमंत्री ने दिल्ली व मंत्रियों ने विभिन्न विभागों के औचक दौरों के सिवाय कुछ खास नहीं किया।
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सरकार से उन्होंने आंगनबाड़ी, सरकारी स्कूलों के तैनात कुक, आशा वर्करों आदि को केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम दैनिक वेतन देने, विभिन्न विभागों में तैनात दिहाड़ी मजदूरों को नियमित किया जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शिवसेना (यूबीटी) जम्मू-कश्मीर इकाई ने कैबिनेट बैठक में जन मुद्दों व वादों को पूरा करने को लेकर कोई चर्चा नहीं करने पर रोष जताया है। साथ ही राज्य दर्जा बहाली की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने और जम्मू को प्रदेश की स्थाई राजधानी घोषित करने की मांग उठाई।
पार्टी प्रदेश मध्यवर्ती कार्यालय में मंगलावार को आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष मनीष साहनी ने उमर सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 20 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में डेलीवेजरों को पक्का करने, न्यूनतम वेतन लागू करने और 200 यूनिट निःशुल्क बिजली देने और स्वच्छ पेयजल आदि अपने वादों को पूरा करने को लेकर कोई चर्चा व फैसला नहीं लिया गया।
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राज्य दर्जा बहाली की मांग को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। सरकार के अभी तक के कार्यकाल पर नजर दौड़ाएं तो मुख्यमंत्री ने दिल्ली व मंत्रियों ने विभिन्न विभागों के औचक दौरों के सिवाय कुछ खास नहीं किया।
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सरकार से उन्होंने आंगनबाड़ी, सरकारी स्कूलों के तैनात कुक, आशा वर्करों आदि को केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम दैनिक वेतन देने, विभिन्न विभागों में तैनात दिहाड़ी मजदूरों को नियमित किया जाए।