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Jammu News: कांग्रेस-नेकां में 3-2 के फार्मूले पर गठबंधन संभव
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इस बार अनंतनाग-राजोरी सीट पर मुकाबला रोचक होने की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर की पांच लोकसभा सीटों पर कांग्रेस और नेकां के बीच 3-2 के फार्मूले पर सीट गठबंधन हो सकता है। गठबंधन की सूरत में नेकां, कांग्रेस के लिए जम्मू और उधमपुर की सीट छोड़ सकती है, जबकि पहले से जीती हुई तीन सीटों पर नेकां की दावेदारी कायम रहेगी। इस बार अनंतनाग के बजाय परिसीमन के बाद नई सीट अनंतनाग-राजोरी जोड़ी गई है, जिससे इस सीट पर मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष विकार रसूल वानी भी नेकां और पीडीपी से सीट गठबंधन पर हो रही बातचीत का खुलासा कर चुके हैं। हालांकि अभी किसी भी पार्टी की ओर से सीट गठबंधन को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में नेकां ने श्रीनगर, बारामुला और अनंतनाग सीट अपने नाम की थी। जबकि जम्मू और उधमपुर की सीट भाजपा के खाते में गई थी। कांग्रेस के हाथ कोई भी सीट नहीं लगी थी। इसमें जम्मू की सीट पर भाजपा के जुगल किशोर ने 858066 वोट लेकर जीत हासिल की थी और उनके प्रतिद्वंद्वी में कांग्रेस के रमण भल्ला ने दूसरे स्थान पर 555191 वोट हासिल किए थे। इसी तरह उधमपुर सीट पर भाजपा के डाॅ. जितेंद्र सिंह ने 724311 और दूसरे स्थान पर कांग्रेस से विक्रमादित्य सिंह ने 367059 वोट हासिल किए थे। श्रीनगर सीट पर सांसद बने नेकां अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला ने सर्वाधिक 106750 वोटों से जीत हासिल की थी। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार नेकां की ओर से उनके द्वारा जीती गई सभी सीटों पर दावा किया जा रहा है। इस बार अनंतनाग-राजोरी सीट के लिए भाजपा भी पूरी ताकत झोंक रही है, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर नेकां के सामने रहने की उम्मीद है। हाल ही में भाजपा ने नेकां के कई पहाड़ी, गुज्जर नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करवाने में सफलता हासिल की है, जिससे उनके समर्थक वोटों से भाजपा अनंतनाग-राजोरी सीट पर लाभ पाना चाहती है। अगर सीट गठबंधन पर बात बन जाती है तो कांग्रेस को जम्मू और उधमपुर सीट मिल सकती है। जबकि श्रीनगर, बारामुला और अनंतनाग-राजोरी सीट पर नेकां खुद लड़ेगी। हालांकि अभी कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है। वहीं, कश्मीर संभाग में पीडीपी का मौजूदा सीटों पर खास दावा नहीं देखा जा रहा है, जिससे कांग्रेस नेकां पर अधिक जोर देगी। वहीं, नेकां अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला सभी सीटों पर खुद लड़ने की बात कह चुके हैं, लेकिन उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने अभी इस पर कुछ स्पष्ट नहीं होने की बात कही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर की पांच लोकसभा सीटों पर कांग्रेस और नेकां के बीच 3-2 के फार्मूले पर सीट गठबंधन हो सकता है। गठबंधन की सूरत में नेकां, कांग्रेस के लिए जम्मू और उधमपुर की सीट छोड़ सकती है, जबकि पहले से जीती हुई तीन सीटों पर नेकां की दावेदारी कायम रहेगी। इस बार अनंतनाग के बजाय परिसीमन के बाद नई सीट अनंतनाग-राजोरी जोड़ी गई है, जिससे इस सीट पर मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष विकार रसूल वानी भी नेकां और पीडीपी से सीट गठबंधन पर हो रही बातचीत का खुलासा कर चुके हैं। हालांकि अभी किसी भी पार्टी की ओर से सीट गठबंधन को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में नेकां ने श्रीनगर, बारामुला और अनंतनाग सीट अपने नाम की थी। जबकि जम्मू और उधमपुर की सीट भाजपा के खाते में गई थी। कांग्रेस के हाथ कोई भी सीट नहीं लगी थी। इसमें जम्मू की सीट पर भाजपा के जुगल किशोर ने 858066 वोट लेकर जीत हासिल की थी और उनके प्रतिद्वंद्वी में कांग्रेस के रमण भल्ला ने दूसरे स्थान पर 555191 वोट हासिल किए थे। इसी तरह उधमपुर सीट पर भाजपा के डाॅ. जितेंद्र सिंह ने 724311 और दूसरे स्थान पर कांग्रेस से विक्रमादित्य सिंह ने 367059 वोट हासिल किए थे। श्रीनगर सीट पर सांसद बने नेकां अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला ने सर्वाधिक 106750 वोटों से जीत हासिल की थी। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार नेकां की ओर से उनके द्वारा जीती गई सभी सीटों पर दावा किया जा रहा है। इस बार अनंतनाग-राजोरी सीट के लिए भाजपा भी पूरी ताकत झोंक रही है, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर नेकां के सामने रहने की उम्मीद है। हाल ही में भाजपा ने नेकां के कई पहाड़ी, गुज्जर नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करवाने में सफलता हासिल की है, जिससे उनके समर्थक वोटों से भाजपा अनंतनाग-राजोरी सीट पर लाभ पाना चाहती है। अगर सीट गठबंधन पर बात बन जाती है तो कांग्रेस को जम्मू और उधमपुर सीट मिल सकती है। जबकि श्रीनगर, बारामुला और अनंतनाग-राजोरी सीट पर नेकां खुद लड़ेगी। हालांकि अभी कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है। वहीं, कश्मीर संभाग में पीडीपी का मौजूदा सीटों पर खास दावा नहीं देखा जा रहा है, जिससे कांग्रेस नेकां पर अधिक जोर देगी। वहीं, नेकां अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला सभी सीटों पर खुद लड़ने की बात कह चुके हैं, लेकिन उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने अभी इस पर कुछ स्पष्ट नहीं होने की बात कही है।
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