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Jammu News: कांग्रेस ने की नई बस्ती के दुकानदारों के पुनर्वास की मांग
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश कांग्रेस ने नई बस्ती के दुकानदारों के पुनर्वास की मांग की है। साथ ही भाजपा पर इसे मामले को लेकर राजनीतिक करने का आरोप लगाया। रविवार पत्रकार वार्ता में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला ने कहा कि दुकानदारों की आजीविका का सवाल है। हर कोई उनके मुद्दे का समर्थन करता है, लेकिन एलजी प्रशासन प्रतिबद्धता का सम्मान करने में विफल रहा और चौड़ीकरण केंद्रीय विभाग के अधीन है।
भाजपा लोकसभा और विधानसभा में जनादेश प्राप्त करने के बाद वादों से मुकर रही है। कुछ साल पहले हवाई अड्डे के बाहर पार्किंग स्थल से उजाड़े गए तीस शरणार्थी परिवारों का जिक्र करते हुए भल्ला ने कहा कि ये महिलाएं रायपुर रख में उनके लिए निर्धारित स्थान पर अपने बसने और पुनर्वास के लिए दर-दर भटक रही हैं।
वे बहुत गरीब हैं और किराए के घरों में रह रहे हैं। इन परिवारों के 27 सदस्य इस अवधि के दौरान तनाव और संघर्ष में अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन उन्हें निर्धारित स्थान पर बसाया नहीं गया। अब नई बस्ती के दुकानदारों को लालीपप दिया जा रहा है। सरकार को पहले इनको दुकानें बनाकर देनी चाहिए थी। फिर नोटिस देना चाहिए था। लेकिन पहले दुकानों से निकाला जा रहा है। इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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जम्मू। प्रदेश कांग्रेस ने नई बस्ती के दुकानदारों के पुनर्वास की मांग की है। साथ ही भाजपा पर इसे मामले को लेकर राजनीतिक करने का आरोप लगाया। रविवार पत्रकार वार्ता में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला ने कहा कि दुकानदारों की आजीविका का सवाल है। हर कोई उनके मुद्दे का समर्थन करता है, लेकिन एलजी प्रशासन प्रतिबद्धता का सम्मान करने में विफल रहा और चौड़ीकरण केंद्रीय विभाग के अधीन है।
भाजपा लोकसभा और विधानसभा में जनादेश प्राप्त करने के बाद वादों से मुकर रही है। कुछ साल पहले हवाई अड्डे के बाहर पार्किंग स्थल से उजाड़े गए तीस शरणार्थी परिवारों का जिक्र करते हुए भल्ला ने कहा कि ये महिलाएं रायपुर रख में उनके लिए निर्धारित स्थान पर अपने बसने और पुनर्वास के लिए दर-दर भटक रही हैं।
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वे बहुत गरीब हैं और किराए के घरों में रह रहे हैं। इन परिवारों के 27 सदस्य इस अवधि के दौरान तनाव और संघर्ष में अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन उन्हें निर्धारित स्थान पर बसाया नहीं गया। अब नई बस्ती के दुकानदारों को लालीपप दिया जा रहा है। सरकार को पहले इनको दुकानें बनाकर देनी चाहिए थी। फिर नोटिस देना चाहिए था। लेकिन पहले दुकानों से निकाला जा रहा है। इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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