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Jammu News: मैदान में उतरने से पहले सुरक्षा की हर चुनौती के लिए तराशे जा रहे पुलिस के नए जवान
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-आतंकवाद से लेकर कानून-व्यवस्था संभालने तक, भर्ती कांस्टेबलों को नियमित प्रशिक्षण के बाद एक बमन का विशेष प्रशिक्षण
-सीटीसी सुंजवां में बैच-I का कोर्स पूरा, अनुशासन, शारीरिक क्षमता और ऑपरेशनल तैयारी पर फोकस
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आतंकवाद की चुनौती हो या अचानक बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति, पुलिस के जवानों को हर परिस्थिति में मोर्चा संभालने के लिए तैयार रहना पड़ता है। इसी जरूरत को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस अपने नए भर्ती कांस्टेबलों को नियमित प्रशिक्षण के अलावा विशेष प्रशिक्षण भी दे रही है। इसका उद्देश्य जवानों को सिर्फ ड्यूटी नहीं बल्कि फील्ड में हर परिस्थितियों से निपटने के लिए सक्षम बनाना है।
कमांडो ट्रेनिंग सेंटर (सीटीसी) सुंजवां में भर्ती कांस्टेबलों को एक महीने का विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम करवाया जाता है। इसमें जवानों को विभिन्न प्रशिक्षण मॉड्यूल, गतिविधियों और कौशल के माध्यम से तैयार किया गया। प्रशिक्षण में अनुशासन, शारीरिक फिटनेस, पेशेवर दक्षता और ऑपरेशनल तैयारियों पर विशेष जोर दिया जाता है। यह प्रशिक्षण इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि फील्ड में जवानों को सिर्फ नियमित पुलिसिंग ही नहीं, बल्कि बदलती सुरक्षा परिस्थितियों और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।
ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई बातों को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने की क्षमता विकसित करना अहम है। प्रशिक्षण के समापन पर जवानों के प्रदर्शन का विभिन्न मानकों पर आकलन भी किया जाता है ताकि उनमें बेहतर करने की भावना बनी रहे। शुक्रवार को आईजी जम्मू जोन तेजिंदर सिंह ने सीटीसी सुंजवां में भर्ती कांस्टेबलों के बैच-I के समापन समारोह में भाग लिया था।
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उन्होंने जवानों प्रशिक्षण के दौरान सीखे कौशल और ज्ञान का इस्तेमाल फील्ड ड्यूटी में करने को कहा। उन्होंने अनुशासन, पेशेवर रवैये, शारीरिक फिटनेस और ऑपरेशनल तैयारियों को बनाए रखने पर जोर दिया।
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जंगल युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े कौशल पर जोर
सीटीसी सुंजवां में पुलिस की अलग-अलग इकाइयों के लिए विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम होते हैं। पीएसओ के लिए रिफ्रेशर कोर्स के साथ-साथ कमांडो टैक्टिक्स कोर्स करवाया जाता है। इसमें जंगल युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े कौशल पर जोर दिया जाता है। एसओजी जवानों के लिए विशेष प्रशिक्षण के साथ-साथ डीएसपी प्रोबेशनरों का एक महीने का विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम होता है।
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-सीटीसी सुंजवां में बैच-I का कोर्स पूरा, अनुशासन, शारीरिक क्षमता और ऑपरेशनल तैयारी पर फोकस
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आतंकवाद की चुनौती हो या अचानक बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति, पुलिस के जवानों को हर परिस्थिति में मोर्चा संभालने के लिए तैयार रहना पड़ता है। इसी जरूरत को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस अपने नए भर्ती कांस्टेबलों को नियमित प्रशिक्षण के अलावा विशेष प्रशिक्षण भी दे रही है। इसका उद्देश्य जवानों को सिर्फ ड्यूटी नहीं बल्कि फील्ड में हर परिस्थितियों से निपटने के लिए सक्षम बनाना है।
कमांडो ट्रेनिंग सेंटर (सीटीसी) सुंजवां में भर्ती कांस्टेबलों को एक महीने का विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम करवाया जाता है। इसमें जवानों को विभिन्न प्रशिक्षण मॉड्यूल, गतिविधियों और कौशल के माध्यम से तैयार किया गया। प्रशिक्षण में अनुशासन, शारीरिक फिटनेस, पेशेवर दक्षता और ऑपरेशनल तैयारियों पर विशेष जोर दिया जाता है। यह प्रशिक्षण इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि फील्ड में जवानों को सिर्फ नियमित पुलिसिंग ही नहीं, बल्कि बदलती सुरक्षा परिस्थितियों और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।
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ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई बातों को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने की क्षमता विकसित करना अहम है। प्रशिक्षण के समापन पर जवानों के प्रदर्शन का विभिन्न मानकों पर आकलन भी किया जाता है ताकि उनमें बेहतर करने की भावना बनी रहे। शुक्रवार को आईजी जम्मू जोन तेजिंदर सिंह ने सीटीसी सुंजवां में भर्ती कांस्टेबलों के बैच-I के समापन समारोह में भाग लिया था।
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उन्होंने जवानों प्रशिक्षण के दौरान सीखे कौशल और ज्ञान का इस्तेमाल फील्ड ड्यूटी में करने को कहा। उन्होंने अनुशासन, पेशेवर रवैये, शारीरिक फिटनेस और ऑपरेशनल तैयारियों को बनाए रखने पर जोर दिया।
जंगल युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े कौशल पर जोर
सीटीसी सुंजवां में पुलिस की अलग-अलग इकाइयों के लिए विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम होते हैं। पीएसओ के लिए रिफ्रेशर कोर्स के साथ-साथ कमांडो टैक्टिक्स कोर्स करवाया जाता है। इसमें जंगल युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े कौशल पर जोर दिया जाता है। एसओजी जवानों के लिए विशेष प्रशिक्षण के साथ-साथ डीएसपी प्रोबेशनरों का एक महीने का विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम होता है।