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जीवन में दूसरों को दुख देने का अर्थ है स्वयं का दुखी होना : स्वामी
Sun, 27 Apr 2025 02:19 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 27 Apr 2025 02:19 AM IST
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मिश्रीवाला। दूसरों को दुख देने का अर्थ है स्वयं का दुखी होना। संसार सभी का है इस पर जीने का अधिकार सभी को है। अगर हम सभी को अपने-अपने अधिकार से जीने देंगे तो इस सृष्टि पर हर एक सुख चैन से जी सकेगा।
यह ज्ञान स्वामी गिरिधर गोपाल व्यास देव ने श्रीरघुनाथ मंदिर जसवां में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान संगत को दिया। शनिवार को तीसरे दिन उन्होंने बताया कि अपने अधिकार का दुरुपयोग करने से भी दूसरों को दुख मिलता है। आज नैतिक मूल्यों का हास हो चुका है। वास्तव में हर मनुष्य को सदगुणों को आचरण में लाना चाहिए।
ईमानदारी, सत्यता, नम्रता, सहनशीलता, अनुशासन, सम्मान, मधुरता आदि मानवीय मूल्य हैं। कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन 30 अप्रैल को होगा। संवाद
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यह ज्ञान स्वामी गिरिधर गोपाल व्यास देव ने श्रीरघुनाथ मंदिर जसवां में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान संगत को दिया। शनिवार को तीसरे दिन उन्होंने बताया कि अपने अधिकार का दुरुपयोग करने से भी दूसरों को दुख मिलता है। आज नैतिक मूल्यों का हास हो चुका है। वास्तव में हर मनुष्य को सदगुणों को आचरण में लाना चाहिए।
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ईमानदारी, सत्यता, नम्रता, सहनशीलता, अनुशासन, सम्मान, मधुरता आदि मानवीय मूल्य हैं। कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन 30 अप्रैल को होगा। संवाद