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Jammu News: स्वच्छता के उच्च मानक बनाए रखने के निर्देश
Fri, 11 Apr 2025 02:16 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Fri, 11 Apr 2025 02:16 AM IST
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एसडीएम पाडर ने की मचैल माता यात्रा की तैयारियों की समीक्षा
होटल-पेइंग गेस्ट संचालकों और ढाबा-रेस्तरां मालिकों के साथ किया मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
किश्तवाड़। उपायुक्त राजेश कुमार शवन के निर्देश पर एसडीएम पाडर डॉ. अमित कुमार ने श्री मचैल माता यात्रा-2025 की तैयारियों की वीरवार को समीक्षा की। इस संबंध में एसडीएम ने होटल व्यवसायियों, पेइंग गेस्ट संचालकों, ढाबा-रेस्तरां संचालकों और स्थानीय व्यापारिक हितधारकों के साथ बैठक की।
इस दौरान उन्होंने सभी आवासों और खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता के उच्च मानकों को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। तीर्थ यात्रियों के लिए साफ चादरें, कंबल और शौचालय सुनिश्चित करने का निर्देश। एसडीएम ने बताया कि यात्रा अवधि के दौरान आवास सुविधाओं, इसके आसपास स्वच्छता मानकों की निगरानी और रखरखाव के लिए नियमित निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने ढाबों, रेस्तरां व खुदरा दुकानों के मालिकों को सभी वस्तुओं के लिए स्वीकृत दर सूची का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया।
एसडीएम ने विनम्र सेवा प्रदान करने और भक्तों को गर्मजोशी से आतिथ्य प्रदान करने के महत्व और तीर्थ यात्रियों के लिए सहज व आध्यात्मिक रूप से पूर्ण अनुभव सुनिश्चित करने की कुंजी के रूप में उजागर किया। एसडीएम ने दोहराया कि स्थानीय व्यापारिक समुदाय श्री मचैल माता यात्रा की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी हितधारकों से श्रद्धालुओं के लिए यादगार यात्रा बनाने में प्रशासन के साथ पूर्ण सहयोग करने का आग्रह किया।
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तीन माह बाद वैसाखी वाले दिन खुलेंगे मंदिर के कपाट
मचैल माता मंदिर के कपाट तीन माह बाद वैसाखी वाले दिन 13 अप्रैल को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुलेंगे। मकर संक्रांति के दिन प्राचीन परंपरा के चलते कपाट बंद किए गए थे। मां चंडी की मूर्ति को वहां से उठाकर गांव के ही एक छोटे से मंदिर जो कि एक मकान के छत पर बना है, में स्थापित किया गया था। लगातार वहीं पर पूजा-अर्चना की जा रही थी। 13 अप्रैल को मंदिर को सुंदर तरीके से सजाया जाएगा। सैकड़ों लोग उस दिन मचैल माता के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। मकर संक्रांति के दिन मुख्य मंदिर से मूर्ति को गांव में ही पहलवान के निवास स्थान की छत पर स्थित मां काली के मंदिर में विराजमान किया गया था। वैसाखी के दिन मूर्ति को दोबारा मुख्य मंदिर में सुशोभित किया जाएगा। ढोल-नगाड़ों व भजन संकीर्तन के साथ उसी दिन वहां मेला भी लगेगा।
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होटल-पेइंग गेस्ट संचालकों और ढाबा-रेस्तरां मालिकों के साथ किया मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
किश्तवाड़। उपायुक्त राजेश कुमार शवन के निर्देश पर एसडीएम पाडर डॉ. अमित कुमार ने श्री मचैल माता यात्रा-2025 की तैयारियों की वीरवार को समीक्षा की। इस संबंध में एसडीएम ने होटल व्यवसायियों, पेइंग गेस्ट संचालकों, ढाबा-रेस्तरां संचालकों और स्थानीय व्यापारिक हितधारकों के साथ बैठक की।
इस दौरान उन्होंने सभी आवासों और खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता के उच्च मानकों को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। तीर्थ यात्रियों के लिए साफ चादरें, कंबल और शौचालय सुनिश्चित करने का निर्देश। एसडीएम ने बताया कि यात्रा अवधि के दौरान आवास सुविधाओं, इसके आसपास स्वच्छता मानकों की निगरानी और रखरखाव के लिए नियमित निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने ढाबों, रेस्तरां व खुदरा दुकानों के मालिकों को सभी वस्तुओं के लिए स्वीकृत दर सूची का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया।
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एसडीएम ने विनम्र सेवा प्रदान करने और भक्तों को गर्मजोशी से आतिथ्य प्रदान करने के महत्व और तीर्थ यात्रियों के लिए सहज व आध्यात्मिक रूप से पूर्ण अनुभव सुनिश्चित करने की कुंजी के रूप में उजागर किया। एसडीएम ने दोहराया कि स्थानीय व्यापारिक समुदाय श्री मचैल माता यात्रा की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी हितधारकों से श्रद्धालुओं के लिए यादगार यात्रा बनाने में प्रशासन के साथ पूर्ण सहयोग करने का आग्रह किया।
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तीन माह बाद वैसाखी वाले दिन खुलेंगे मंदिर के कपाट
मचैल माता मंदिर के कपाट तीन माह बाद वैसाखी वाले दिन 13 अप्रैल को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुलेंगे। मकर संक्रांति के दिन प्राचीन परंपरा के चलते कपाट बंद किए गए थे। मां चंडी की मूर्ति को वहां से उठाकर गांव के ही एक छोटे से मंदिर जो कि एक मकान के छत पर बना है, में स्थापित किया गया था। लगातार वहीं पर पूजा-अर्चना की जा रही थी। 13 अप्रैल को मंदिर को सुंदर तरीके से सजाया जाएगा। सैकड़ों लोग उस दिन मचैल माता के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। मकर संक्रांति के दिन मुख्य मंदिर से मूर्ति को गांव में ही पहलवान के निवास स्थान की छत पर स्थित मां काली के मंदिर में विराजमान किया गया था। वैसाखी के दिन मूर्ति को दोबारा मुख्य मंदिर में सुशोभित किया जाएगा। ढोल-नगाड़ों व भजन संकीर्तन के साथ उसी दिन वहां मेला भी लगेगा।