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J&K: रसोई का जायका बदलने के साथ कैंसर में भी राहत देगी जंगली मशरूम, 400 से अधिक प्रजातियां खोजी
Sun, 08 Jan 2023 02:46 PM IST
kumar गुलशन कुमार
मंगेश कुमार, जम्मू
मंगेश कुमार, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Sun, 08 Jan 2023 02:46 PM IST
सार
प्रो. यशपाल शर्मा के नेतृत्व में टीम ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जंगलों में उगने वाली मशरूम का अध्ययन किया है। अभी तक करीब चार सौ से अधिक मशरूम की प्रजातियों का पता लगाया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जम्मू विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जंगली मशरूम की 400 से अधिक प्रजातियों की तलाश की है। इनमें 70 किस्मों से औषधि तैयार करने के साथ खाने योग्य बताई गई हैं। ये विटामिन डी और प्रोटीन की कमी दूर करने के साथ कैंसर की बीमारी से भी लड़ने में मदद करेंगी।
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पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय मिशन फॉर हिमालयन स्टडीज (एनएसएमएस) की ओर से वनस्पति विज्ञान विभाग को परियोजना, 2020 में मिली थी। इस परियोजना के तहत पहले शोध में औषधि की 50 प्रजातियों की पहचान की गई थी। उसके बाद 20 और प्रजातियां पहचानी गईं। यह तीन साल की परियोजना मार्च में समाप्त होगी।
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इसके तहत विभाग की टीम ने प्रो. यशपाल शर्मा के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जंगलों में उगने वाली मशरूम का अध्ययन किया है। अभी तक करीब चार सौ से अधिक मशरूम की प्रजातियों का पता लगाया है। इनमें से जियोपोरा (कुंडी), अरेनीकोला, मोरेलस (गुच्छी), हेररिक्युम क्रिनसियुस, स्परसिस क्रिस्पा, फ्लेमयुनिया, वेलुटाइप्स, टेरमिटोमाइसेस, मेक्रोलेपिओटा, प्रोसेरा और रिजोपोगान आदि मशरूम की प्रजातियां खाने योग्य बताई गई हैं। साथ ही औषधि के लिए कारगर बताया गया है।
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प्रोफेसर यशपाल ने कहा कि प्रजातियों को इकठ्ठा करने के दौरान स्थानीय लोगों से भी जानकारी प्राप्त की गई है। इसके अलावा वैज्ञानिक अध्ययन भी किया गया है। इससे खुलासा हुआ है कि कुछ प्रजातियां मानवजाति के लिए हानिकारक भी होती हैं। बिना किसी विशेषज्ञ की राय के सेवन करने से सेहत को भी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों और आम लोगों को कार्यशालाओं और कार्यक्रमों के जरिये जागरूक किया जा रहा है।
कैंसर की बीमारी में भी मिलता है लाभ
मशरूम की प्रजातियों को सुरक्षित करने की जरूरत है। प्रो. यशपाल ने कहा कि अध्ययन से पता चला है कि गनोड्रामा, साइलोसाइब, क्यूबेंसिस, लैक्टिपोरस सलफर्स आदि मशरूम की किस्मों के सेवन से कैंसर की बीमारी में लाभ मिलता है। इसके अलावा विटामिन डी और प्रोटीन की कमी को भी पूरा करती है।
जंगलों में मशरूम का संरक्षण जरूरी
पेड़ पौधों के साथ वन विभाग मशरूम का संरक्षण भी करे। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि कई पेड़ पौधे मशरूम से ही बनते हैं। जब मशरूम की प्रजाति लुप्त होगी तो पारिस्थितिकि तंत्र और पर्यावरण पर इसका प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जंगल में हर चीज को सुरक्षित रखना विभाग का दायित्व है।
घर में भी उगा सकते हैं जंगली प्रजातियां
जंगली मशरूम घरों में भी उगाई जा सकती है। ऐसा करने से इन प्रजातियों का संरक्षण होगा और लोग स्वरोजगार के रूप में इन्हें उगा सकेंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार मशरूम का बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।