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मौसम के कहर से जम्मू-कश्मीर बेहाल: तेज बारिश और भूस्खलन से अप्रैल-जुलाई में भारी तबाही, 33 लोगों की गई जान

Mon, 28 Jul 2025 01:10 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Mon, 28 Jul 2025 01:10 PM IST
सार

अप्रैल से जुलाई तक जम्मू-कश्मीर में तेज बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसी मौसमी आपदाओं में 33 लोगों की मौत, हजारों मवेशियों की जान गई और सैकड़ों घर व फसलें तबाह हो गईं। केंद्र ने आपदा राहत के लिए राशि जारी की, जबकि पुनर्वास की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर है।

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jammu kashmir Weather disasters hit the state, 33 people lost their lives
Jammu Kashmir Weather - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में अप्रैल से जुलाई के मध्य तक तेज बारिश, भूस्खलन और बाढ़ की कई घटनाएं सामने आईं हैं। इन माैसमी आपदाओं से अब तक 33 लोगों की जान जा चुकी है। 10,590 मवेशियों की मौत और 2,418 घर आंशिक या पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।

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1,239 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है।केंद्र सरकार ने संसद में यह जानकारी दी है। बताया गया कि केंद्र शासित प्रदेश के कई जिले इस दौरान गंभीर रूप से प्रभावित हुए। सबसे ज्यादा नुकसान रामबन में हुआ, जहां भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह बाधित कर दिया और राष्ट्रीय राजमार्ग तक ठप हो गया।
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रामबन जिले के बागना गांव में 20 अप्रैल को हुआ भूस्खलन राज्य में सबसे बड़ी आपदा के रूप में सामने आया। भारी बारिश के बाद पहाड़ी दरकने से कई मकान मलबे में दब गए। तीन लोगों की मौत और कई अन्य घायल हो गए।
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जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलबा आने से यातायात ठप हो गया। रामबन के अलावा राजोरी, पुंछ और कठुआ जिलों में भी आपदाओं ने कहर ढाया। राजोरी के कलाकोट में एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से छात्र की मौत हो गई और कई घायल हो गए। पुंछ में अचानक आई बाढ़ से दर्जनों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा। कठुआ में भारी बारिश के कारण रेल पटरी पर मलबा जमा हो गया, जिससे एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई।

एसडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई से टले बड़े नुकसान

राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) ने संकट की इस घड़ी में मोर्चा संभाला। रामबन, पुंछ, डोडा समेत कई जिलों में विशेष टीमें तैनात की गईं। समय रहते चेतावनी जारी की गई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

इसके चलते कई संभावित जान-माल के नुकसान को टालने में सफलता मिली। केंद्रीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून 24 मई को केरल पहुंच गया, जो सामान्य तिथि से आठ दिन पहले था। मानसून की यह तेजी कई राज्यों में असामान्य रूप से तेज बारिश और बाढ़ की वजह बनी।

केंद्र ने जारी की राहत राशि, पुनर्वास की जिम्मेदारी राज्य कीगृह मंत्रालय ने जानकारी दी कि इस वर्ष अब तक जम्मू-कश्मीर सहित 22 राज्यों को राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) के तहत कुल 9,578.40 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।

यह राशि केवल तात्कालिक राहत के लिए होती है, जबकि पुनर्वास और मुआवजे की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रदेश के किसानों को करीब 2.70 करोड़ रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है। हालांकि, अभी भी कई किसानों के बीमा दावे प्रक्रिया में हैं या तकनीकी कारणों से अटके हुए हैं। कृषि विभाग इन मामलों की निगरानी कर रहा है।

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