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लोगों की मांगः उज्ज परियोजना से पहले हमें बसाएं, बिजली-पानी और नौकरी दिलवाएं

Fri, 17 Jul 2020 03:40 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 17 Jul 2020 03:40 PM IST
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Jammu Kashmir Ujj project, Public hearing in Dungada village of Bilawar for first multipurpose
उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना - फोटो : सोशल मीडिया

पंजतीर्थी में प्रदेश की पहली मल्टीपर्पज उज्ज परियोजना के लिए गुरुवार को बिलावर के डुंगाडा गांव में जन सुनवाई हुई। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले इलाकों के लोगों ने इस दौरान अपनी-अपनी मांगें रखीं।

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लोगों ने कहा कि परियोजना से निकलने वाली बिजली और पानी उन्हें मुफ्त में दिया जाए। परियोजना से पहले उन्हें बसाया जाए। साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी मिलनी चाहिए। इस दौरान डीसी ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखेंगे। दरूंग गांव सेरिकल्चर नर्सरी, तुतें दा बाग में जन सुनवाई के दौरान जनप्रतिनिधि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय जल आयोग और एडीसी बिलावर भी मौजूद रहे।
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लोगों ने ये मांगें रखीं

  • परियोजना का काम शुरू किए जाने से पहले प्रभावितों को मुआवजा जारी किया जाए।
  • जिन लोगों की जमीनें परियोजना की जद में आ रही हैं, उन्हें कृषि भूमि के लिए 25 लाख प्रति कनाल और आवासीय व्यवस्था के तहत पुनर्वास में मकान के लिए एक कनाल और पशु शालाओं के लिए दो कनाल जमीनें उपलब्ध कराई जाए।
  • परियोजना से होने वाले बिजली उत्पादन से उन्हें निशुल्क बिजली, पानी की सुविधा दी जाए।
  • जहां तक संभव हो सके उन्हें अपनी पंचायतों में ही बसाया जाए और कॉलोनी में रखा जाए।
  • बच्चों के लिए बेहतर स्कूलों की व्यवस्था करने के साथ ही शिक्षा के खर्च का वहन और कॉलोनियों का रखरखाव भी उज्ज परियोजना प्रबंधन की ओर से कराया जाए।
  • भिनी, डडवारा और फिंतर को भिनी पुल के जरिये सीधे संपर्क से जोड़ा जाए।
  • बची हुई भूमि का भी अधिग्रहण करने और उसके ऐवज में उन्हें भूमि दी जाए।
  • गांवों के 95 प्रतिशत लोगों का पेशा किसानी है, इसलिए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी का प्रावधान किया जाए।

 

लोगों ने अपनी मांगों को प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखा है। मांगों को मंजूरी और विचार विमर्श के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। सरकार की ओर से किशन गंगा परियोजना की तर्ज पर इस परियोजना के प्रभावितों के लिए मुआवजे का प्रावधान रखा गया है। मंजूरी के बाद यह प्रावधान डीपीआर में शामिल होंगे। -ओम प्रकाश भगत, डीसी कठुआ

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