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जम्मू कश्मीर: दो नेताओं ने खाली किए सरकारी आवास, 6 प्रक्रिया में, विभाग में उच्च न्यायालय ने दी जानकारी

Fri, 07 Jun 2024 10:21 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 07 Jun 2024 10:21 AM IST
सार

एडवोकेट जनरल डीसी रैना ने खंडपीठ को बताया कि अन्य आवास परिसरों के संबंध में मामला समिति के समक्ष विचाराधीन है। रैना ने मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए 2 महीने का समय मांगा। 
 

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Jammu Kashmir : Two leaders vacated government accommodation 6 in process dept report High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी आवासों को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। दो नेताओं ने आवास खाली कर दिए हैं, जबकि 6 के खाली करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिन दो नेताओं ने आवास खाली किए हैं, इनमें वजीरा बेगम और सोनाउल्लाह लोन शामिल हैं। वीरवार को उच्च न्यायालय में इसकी जानकारी दी गई। संबंधित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह एवं न्यायाधीश मोक्षा खजूरिया काजमी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई की।

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एडवोकेट जनरल डीसी रैना ने खंडपीठ को बताया कि अन्य आवास परिसरों के संबंध में मामला समिति के समक्ष विचाराधीन है। रैना ने मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए 2 महीने का समय मांगा। 
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वहीं दूसरी तरफ एडवोकेट शेख शकील ने दलील देते हुए कहा कि 3 अप्रैल 2024 को खंडपीठ द्वारा पारित निर्देशों का उचित अनुपालन नहीं हुआ है, क्योंकि खंडपीठ ने इस्टेट विभाग के निदेशक को सभी 43 बंगले खाली कराने के लिए कहा था। तर्क दिया कि एक जैसी स्थिति में दो कानून नहीं हो सकते हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर सरकार ने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती और कई पूर्व मंत्रियों सहित 200 से अधिक राजनेताओं को बेदखल कर दिया है, लेकिन शेष 41 राजनेताओं को अनुचित लाभ दिया जा रहा है जिनकी सत्ता के गलियारों में पहुंच है। 
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यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 3 अप्रैल, 2024 के आदेश के अनुसरण में इस्टेट विभाग द्वारा की गई कवायद को दो सीलबंद लिफाफों में रखा गया है। जो भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ द्वारा व्यक्त की गई टिप्पणियों के विपरीत है, जिन्होंने सीलबंद लिफाफों में दस्तावेज दाखिल करने की निंदा की थी। वहीं दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने रजिस्ट्री को 7 अगस्त, 2024 को तत्काल जनहित याचिका को फिर से अधिसूचित करने का निर्देश दिया।

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