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Jammu Kashmir: जमीन से बेदखली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल से किया इंकार

Sat, 21 Jan 2023 12:26 AM IST
kumar गुलशन कुमार एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Sat, 21 Jan 2023 12:26 AM IST
सार

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने हालांकि आज कोई लिखित आदेश पारित करने पर अपनी अनिच्छा व्यक्त की लेकिन मौखिक तौर पर केंद्र शासित प्रदेश से यह जरूर कहा कि फिलहाल किसी भी घर को नहीं गिराया जाए।

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Jammu Kashmir: Supreme Court refuses to intervene in matter of eviction from land issue
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा जारी उस सर्कुलर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया जिसमें उपायुक्तों को 31 जनवरी, 2023 तक रोशनी भूमि और कचरई भूमि सहित राज्य भूमि पर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया था।

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जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने हालांकि आज कोई लिखित आदेश पारित करने पर अपनी अनिच्छा व्यक्त की लेकिन मौखिक तौर पर केंद्र शासित प्रदेश से यह जरूर कहा कि फिलहाल किसी भी घर को नहीं गिराया जाए। पीठ ने जम्मू-कश्मीर के वकील से कहा, ''हम आज कोई आदेश पारित नहीं कर रहे हैं। आप उन्हें (अथॉरिटी) को मौखिक रूप से किसी भी घर को नहीं गिराने का निर्देश दें। हम सामान्य रोक नहीं लगाएंगे। दूसरों को लाभ नहीं मिलना चाहिए।''
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सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि कई आदिवासी भूमि पर निवास कर रहे हैं और राहत के लिए अदालत का सहारा लिया है। जस्टिस शाह ने पूछा, ''अगर स्टे दिया जाता है तो इससे जमीन हड़पने वालों को भी फायदा होगा?'' केंद्र शासित प्रदेश की ओर से पेश वकील ने स्पष्ट किया कि सर्कुलर मुख्य रूप से रोशनी भूमि पर केंद्रित है। उन्होंने आवेदकों के लोकस पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कल मुझे आवेदन दिया गया था। इसमें यह भी उल्लेख नहीं है कि आवेदक वहां रहते हैं। उन्होंने कहा कि उक्त भूमि में केवल दुकानें और प्रतिष्ठान हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
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याचिका में जम्मू एवं कश्मीर सरकार द्वारा जारी उस सर्कुलर पर रोक लगाने की मांग की गई है जिसमें रोशनी भूमि और कचहरी भूमि सहित केंद्र शासित प्रदेश के स्वामित्व वाली भूमि पर सभी अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया गया है।


जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के रोशनी अधिनियम के फैसले को चुनौती देने वाली कई समीक्षा याचिकाओं के लंबित होने के दौरान, जम्मू और कश्मीर सरकार ने 9 जनवरी को सभी उपायुक्तों को 31 जनवरी, 2023 तक ऐसी भूमि पर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। निवासियों से कहा गया था कि वे या तो अपनी ओर से संरचनाओं को ध्वस्त कर दें या विध्वंस के लिए खर्च वहन करें।

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