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Jammu Kashmir: कश्मीर में मंदिरों की जमीन अवैध पट्टे पर देने के मामलों की एसआईटी करेगी जांच

Sat, 08 Apr 2023 11:19 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाल नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाल नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Sat, 08 Apr 2023 11:19 AM IST
सार

उपराज्यपाल प्रशासन के निगरानी प्रकोष्ठ को शिकायत मिली थी कि कश्मीर घाटी के मंदिरों की जमीन को अवैध तरीके से पट्टे पर दे दिया गया है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी जांच के आदेश दिए गए हैं

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Jammu Kashmir: SIT will investigate cases of illegal leasing of temple land in Kashmir
जम्मू सचिवालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कश्मीर में विभिन्न मंदिरों की जमीन को अवैध तरीके से पट्टे पर दिए जाने की शिकायतों पर उप राज्यपाल प्रशासन ने गंभीर रुख अपनाया है। प्रशासन ने कश्मीर के मंडलायुक्त को जांच अधिकारी बनाते हुए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है।

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इस आदेश के बाद कश्मीर के सभी 10 जिलों के डीसी से अवैध लीज मामले की जांच कर रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सौंपने को कहा गया है।

उपराज्यपाल प्रशासन के निगरानी प्रकोष्ठ को शिकायत मिली थी कि कश्मीर घाटी के मंदिरों की जमीन को अवैध तरीके से पट्टे पर दे दिया गया है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी जांच के आदेश दिए गए हैं। 
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मंडलायुक्त ने सभी 10 जिलों श्रीनगर, बडगाम, गांदरबल, बांदीपोरा, कुपवाड़ा, बारामुला, कुलगाम, अनंतनाग, पुलवामा व शोपियां के उक्युक्तों को पत्र भेजकर कहा है कि यह मामला काफी गंभीर है। तत्काल यह पता लगाया जाए कि कौन कौन से जिलों में मंदिर की जमीन को लीज पर देने का गठजोड़ चल रहा है। साथ ही कितनी जमीन अभी तक लीज पर दी गई है, इस बारे में भी जानकारी जुटाने को कहा गया है। यह भी कहा गया है कि नियमों के तहत ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। 
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अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की भी जानकारी मांगी

कश्मीर के सभी जिलों में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों तथा उनकी संपत्ति के बारे में अद्यतन जानकारी भी मांगी गई है। सभी 10 जिलों के डीसी से कहा गया है कि मंदिरों के साथ-साथ गुरुद्वारे तथा अन्य के बारे में भी जानकारी दी जाए।

अस्तित्व खो चुके ट्रस्ट सदस्यों व कर्मचारियों के गठजोड़ की शिकायत

जम्मू -कश्मीर पीस फोरम की ओर से एलजी सचिवालय में इस बाबत शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसमें कहा गया कि मंदिरों की जमीन को अस्तित्व खो चुके मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों तथा राज्य सरकार के कर्मचारियों की ओर से या तो बेचा जा रहा है या फिर अवैध तरीके से लीज पर दिया गया है। विस्थापन के 33 साल तक किसी भी सरकार ने मंदिरों की जमीन को बचाने के लिए कोई पहल नहीं की। 

कोर्ट के आदेश के बाद भी राजस्व विभाग कब्जे खाली करवाने में नाकाम रहा है। कश्मीरी पंडितों के घाटी से बाहर रहने की वजह से कुछ लोग सरकारी मुलाजिमों की मदद से 1989 से 2022 तक अवैध रूप से मंदिर के ट्रस्ट चला रहे हैं।


एलजी प्रशासन के फैसले से जगी उम्मीद

संगठन के चेयरमैन सतीश महालदार ने कहा कि घाटी में 1272 मंदिर हैं, लेकिन किसी का भी पंजीकरण सोसाइटी एक्ट के तहत नहीं है। 1990 से अब तक कोई चुनाव नहीं हुए। ऐसे में सभी ट्रस्ट अवैध रूप से चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एलजी प्रशासन के एसआईटी जांच के आदेश से उम्मीद जगी है। यह आदेश कश्मीरी पंडितों समेत अल्पसंख्यकों के जख्म पर मरहम लगाने की कोशिश है। लेकिन डर यह भी है कि कहीं जांच को दबा न दिया जाए।

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