जम्मू-कश्मीर: प्रदेश टीम की बजाय क्लबों के लिए खेलने को प्राथमिकता दे रहे खिलाड़ी
कम वित्तीय पैकेज और बुनियादी सुविधाओं का अभाव बड़ा कारण। संतोष फुटबॉल ट्रॉफी में चार में से एक ही मुकाबला जीत पाई जम्मू-कश्मीर की टीम।
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जम्मू-कश्मीर के फुटबॉल खिलाड़ी प्रदेश टीम की बजाय क्लबों के लिए खेलने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा कारण वित्तीय पैकेज कम होना और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। हाल ही में हुई संतोष ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों ने प्रदेश टीम के बजाय क्लबों के लिए खेलने को प्राथमिकता दी। इससे संतोष ट्रॉफी (नॉर्थ जोन) के ग्रुप मुकाबलों में प्रदेश टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और टीम चार में से एक ही मुकाबला जीत पाई।
ग्रुप-ए में टीम सिर्फ हिमाचल प्रदेश को हार सकी। पिछले वर्ष टीम ने तीन में से दो मुकाबले जीते थे। जम्मू-कश्मीर फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष जमीर ठाकुर ने कहा कि खिलाड़ी प्रदेश टीम की बजाय क्लबों के लिए खेलने को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्लबों की ओर से खिलाड़ियों को अच्छा पैकेज मिल रहा है, जबकि सरकार खिलाड़ियों को उस तरह का पैकेज नहीं दे पा रही।
संतोष ट्रॉफी के लिए हमने जिन संभावित खिलाड़ियों को चुना था, उन्होंने क्लबों के लिए खेलने को प्राथमिकता दी, जिससे टीम कमजोर हो गई। कोविड के कारण भी खिलाड़ी अभ्यास मैच नहीं खेल सके थे। चैंपियनशिप के चुनी गई टीम के लिए सिर्फ छह दिन का ही कैंप लगा, जिससे खिलाड़ी तैयारियों को अच्छे से नहीं कर सके। एसोसिएशन अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खेलने वाली टीम के लिए पर्याप्त अभ्यास मैच सहित अन्य जरूरी सुविधाओं को पूरा करने को प्राथमिकता देगी।
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टीम का प्रदर्शन
संतोष ट्रॉफी में चंडीगढ़ के साथ ड्रॉ, सर्विस टीम से 3-0 से हार, यूपी के साथ 1-1 मैच ड्रॉ, हिमाचल को 3-2 से हराया।