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जम्मू-कश्मीर: पुरानी पाइप बदलने में ही बीता एक साल, साढ़े तीन करोड़ लैप्स, मार्च तक आधे शहर में ही हो पाया काम

Wed, 26 Apr 2023 08:52 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Wed, 26 Apr 2023 08:52 PM IST
सार

जलशक्ति विभाग ने दावा किया था कि गर्मी से पहले पुरानी पाइपों को बदल देंगे। मगर हालात सभी के सामने हैं। पहले चरण में विभाग को 100 करोड़ का अतिरिक्त बजट भी नहीं मिल पाया।

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jammu kashmir: One year spent in changing old pipe in Jammu, 35 million laps
जम्मू में पानी की किल्लत शुरू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू शहर में पुरानी पेयजल पाइपों को बदलने के लिए कागजी प्रक्रिया में ही करीब एक साल बीत गया। पिछले साल जून में टेंडर प्रक्रिया आरंभ हुई थी। अगस्त में साढ़े सात करोड़ रुपये वार्डों को मिले। सितंबर में प्रति वार्ड दस लाख के एस्टीमेट तैयार करने का प्रोसेस शुरू हुआ, जो दिसंबर तक चला। जनवरी से काम शुरू हुए।

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मार्च में हालात ऐसे रहे कि आधे से ज्यादा वार्डों में पाइप ही नहीं बिछाए जा सके। तीन महीने की समयावधि पूरी के बाद करीब साढ़े तीन करोड़ की ग्रांट लेप्स हो गई। यही नहीं, लोगों को सुविधाएं देने के लिए लाया प्रोजेक्ट दुविधा बन गया, क्योंकि कालिका कॉलोनी, कासिम नगर रोड, यूनिवर्सिटी रोड, बीसी रोड, पुराना शहर समेत अन्य सड़कों को उखाड़ा गया।
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इससे एक तो आवाजाही प्रभावित हुई, दूसरी ओर एक करोड़ से ज्यादा का नुकसान अलग से हुआ। प्रोजेक्ट का मकसद 50 साल पुरानी पौनी इंच से लेकर आठ इंच साइज की पाइपों को बदलना था, ताकि पानी के प्रेशर में बाधा उत्पन्न न हो।
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20 साल की मियाद पूरी होने के बावजूद 75 में से मात्र 36 वार्डों में ही 10-10 लाख से पाइपें बदली गईं। कुछ जगहों में खोदाई और पाइपें बिछाने में चार से पांच माह लग गए। इस कारण अब अगले माह से आधे शहर में पेयजल किल्लत गहरा सकती है।

100 करोड़ के अतिरिक्त बजट की जरूरत

जलशक्ति विभाग ने दावा किया था कि गर्मी से पहले पुरानी पाइपों को बदल देंगे। मगर हालात सभी के सामने हैं। पहले चरण में विभाग को 100 करोड़ का अतिरिक्त बजट भी नहीं मिल पाया। वहीं, नगर निगम ने टाटा कंपनी की पाइपें बिछाने के निर्देश जारी किए थे।

इनकी मियाद 20 से 30 साल निर्धारित की है। पुराना शहर, न्यू प्लाट, मुट्ठी, नरवाल, गंग्याल, कुंजवानी, सतवारी और अन्य वार्डों में काम पूरा हो चुका है। 2018 में बने नए वार्डों में काम ही शुरू नहीं हो पाया। ग्रामीण इलाकों को नगर निगम में शामिल किया था।

राशि ही नहीं मिली तो काम कैसे होगा

वार्ड नंबर 73 के पार्षद प्रो. युद्धवीर सिंह ने कहा कि पुरानी पाइपों को बदलने के लिए सदन में आवाज उठाई गई थी, पर काम शुरू नहीं हुआ। वार्ड नंबर 74 के पार्षद शौबत अली ने कहा कि एस्टीमेट ही बने, पर काम आरंभ नहीं हुआ। गर्मी में फिर टैंकर हायर कर लोगों की प्यास बुझाई जाएगी। वार्ड नंबर 75 के पार्षद धार सिंह ने कहा कि वार्ड को ज्यादा पैसा मिलना चाहिए था।

शहर में पेयजल किल्लत का समाधान किया जा रहा है। पहले भी वार्डों को राशि जारी की गई है। इस साल भी ग्रांट दी जाएगी। - राजिंदर शर्मा, मेयर

एस्टीमेट के हिसाब से वार्डों में काम चल रहा है। पाइपों को बदला जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया करवा दी गई है। - विजय गुप्ता, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग

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