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महबूबा ने मलिक को भेजा 10 करोड़ का कानूनी नोटिस
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श्रीनगर। पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को कानूनी नोटिस भेजकर रोशनी एक्ट का लाभार्थी बताने पर 10 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है। मुफ्ती ने मलिक के बयान को झूठ से प्रेरित बताते हुए 30 दिनों के भीतर जुर्माने की रकम अदा करने के लिए कहा है।
अधिवक्ता अनिल सेठी के माध्यम से भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि अविभाजित जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल मलिक ने महबूबा को रोशनी अधिनियम का लाभार्थी कहकर पूर्व मुख्यमंत्री की छवि और प्रतिष्ठा को धूमिल किया है। उन्हें 30 दिनों के भीतर हर्जाने की रकम का भुगतान करना होगा ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
नोटिस में लिखा है कि मीडिया में एक वीडियो प्रसारित किया गया है, जहां आपको (मलिक को) मेघालय के राजभवन एक प्रेस कान्फ्रेंस करते हुए दिखाया गया है। तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य में राज्यपाल के रूप में अपने दिनों को याद करते हुए, उक्त वीडियो क्लिप के 0.23 सेकंड में आपने आरोप लगाया है कि मेरे मुवक्किल (महबूबा मुफ्ती) ने जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि (अधिभोगियों को स्वामित्व का अधिकार) अधिनियम, 2001 के तहत राज्य की भूमि का लाभ उठाया है। इस अधिनियम को रोशनी अधिनियम के रूप में जाना जाता है। यह आरोप झूठा और गलत है। आपने मेरे मुवक्किल को बदनाम किया, निंदनीय और गंभीर आरोप लगा कर उनकी राजनीतिक क्षेत्र में साफ -सुथरी छवि को इरादतन खराब करने की कोशिश की। जबिक सच यह है कि महबूबा मुफ्ती ने कभी भी रोशनी अधिनियम का कभी कोई लाभ नहीं लिया और न ही कोई ऐसी जमीन हासिल की जिसे आवंटन के बाद अब रद्द कर दिया गया हो। इस तरह के झूठे बयान से आपने मेरी मुवक्किल की छवि खराब कर उन्हें बदनाम किया। आपके द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक मिलीभगत के संकेत दे रहे हैं।
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कोई मुआवजा प्रतिष्ठा खराब करने की भरपाई नहीं कर सकता
नोटिस में लिखा है- हालांकि हर्जाने की कोई भी राशि प्रतिष्ठा और उनके नाम को हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। फिर भी प्रतिष्ठा और नाम के नुकसान के लिए मुआवजे के रुप में दस करोड़ रुपये का भुगतान 30 दिन के भीतर करने का नोटिस आपको दिया जाता है। हर्जाने की राशि का उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाएगा। यदि तय समय सीमा में हर्जाने का भुगतान नहीं किया जाता है तो आपको कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
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अधिवक्ता अनिल सेठी के माध्यम से भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि अविभाजित जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल मलिक ने महबूबा को रोशनी अधिनियम का लाभार्थी कहकर पूर्व मुख्यमंत्री की छवि और प्रतिष्ठा को धूमिल किया है। उन्हें 30 दिनों के भीतर हर्जाने की रकम का भुगतान करना होगा ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
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नोटिस में लिखा है कि मीडिया में एक वीडियो प्रसारित किया गया है, जहां आपको (मलिक को) मेघालय के राजभवन एक प्रेस कान्फ्रेंस करते हुए दिखाया गया है। तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य में राज्यपाल के रूप में अपने दिनों को याद करते हुए, उक्त वीडियो क्लिप के 0.23 सेकंड में आपने आरोप लगाया है कि मेरे मुवक्किल (महबूबा मुफ्ती) ने जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि (अधिभोगियों को स्वामित्व का अधिकार) अधिनियम, 2001 के तहत राज्य की भूमि का लाभ उठाया है। इस अधिनियम को रोशनी अधिनियम के रूप में जाना जाता है। यह आरोप झूठा और गलत है। आपने मेरे मुवक्किल को बदनाम किया, निंदनीय और गंभीर आरोप लगा कर उनकी राजनीतिक क्षेत्र में साफ -सुथरी छवि को इरादतन खराब करने की कोशिश की। जबिक सच यह है कि महबूबा मुफ्ती ने कभी भी रोशनी अधिनियम का कभी कोई लाभ नहीं लिया और न ही कोई ऐसी जमीन हासिल की जिसे आवंटन के बाद अब रद्द कर दिया गया हो। इस तरह के झूठे बयान से आपने मेरी मुवक्किल की छवि खराब कर उन्हें बदनाम किया। आपके द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक मिलीभगत के संकेत दे रहे हैं।
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कोई मुआवजा प्रतिष्ठा खराब करने की भरपाई नहीं कर सकता
नोटिस में लिखा है- हालांकि हर्जाने की कोई भी राशि प्रतिष्ठा और उनके नाम को हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। फिर भी प्रतिष्ठा और नाम के नुकसान के लिए मुआवजे के रुप में दस करोड़ रुपये का भुगतान 30 दिन के भीतर करने का नोटिस आपको दिया जाता है। हर्जाने की राशि का उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाएगा। यदि तय समय सीमा में हर्जाने का भुगतान नहीं किया जाता है तो आपको कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।