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#ladengecoronase : कश्मीर घाटी में दूत बनकर सामने आ रहे हैं युवा सिख वॉलंटियर्स
Fri, 23 Apr 2021 02:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 23 Apr 2021 02:06 AM IST
सार
- मरीजों को लंगर के साथ-साथ मृतकों के अंतिम संस्कार में भी कर रहे मदद
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युवा वॉलंटियर्स...
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में पिछले एक साल से अधिक समय से जारी कोरोना महामारी के बीच कई ऐसे लोग हैं जो अपनी ही नहीं बल्कि अन्य लोगों की इस काल में मदद के लिए आगे आए हैं। ऐसा ही एक स्वयंसेवकों का ग्रुप है कोविड-19 सिख वालंटियर्स ग्रुप कश्मीर। इसके बैनर तले कई संस्थाओं के युवा एक साथ मिलकर अपने समुदाय के कोरोना मरीजों की मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं।
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मरीजों को मुफ्त ऑनलाइन डॉक्टर कंसल्टेशन, लंगर, दवाइयां, ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर आदि उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ-साथ मृतकों का अंतिम संस्कार भी किया जा रहा है। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से युवाओं का समूह लोगों की मदद कर रहा है।
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शुरू में हुई थी दिक्कत, अब रात में घर भी जाते हैं मदद करने
ग्रुप के सदस्य सरदार जगजीत सिंह दिव्यांग हैं, लेकिन उनका जज्बा ग्रुप के बाकी सदस्यों को मरीजों की सेवा करने के लिए प्रेरित करता है। इस ग्रुप की कोविड हेल्पलाइन 9055509055 का संचालन जगजीत सिंह अकेले करते हैं। जगजीत सिंह ने बताया कि इस महामारी के शुरू होने के साथ ही एक जैसी सोच रखे वाले लोग एक साथ बैठे और उन्होंने अपने सिख समुदाय के लिए कुछ करने की ठानी। शुरू-शुरू में दिक्कतें आईं, लेकिन सब आहिस्ता-आहिस्ता ठीक होने लगा। जगजीत ने बताया कि उनके पास कुछ डॉक्टर हैं जो सेवा कर रहे हैं।
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इस ग्रुप के वालंटियर्स रोजाना 15 से 20 मरीजों का दोपहर और रात का खाना अस्पतालों में पहुंचाते हैं। कई बार रात के समय भी कॉल आती है और वालंटियर्स घर जाकर डॉक्टर के निर्देश पर मरीज को मदद देते हैं।
50 से ज्यादा मरीजों के अंतिम संस्कार में मदद
इस ग्रुप के सदस्य पिछले एक साल से करीब 50 से अधिक लोगों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं। ग्रुप के सदस्य मनमीत सिंह ने बताया कि जब पद्मश्री अवार्डी भाई निर्मल सिंह का कोरोना के चलते देहांत हो गया और उनके अंतिम संस्कार के लिए उन्हें जगह नहीं मुहैया करवाई गई तो इस घटना ने उन्हें प्रेरित किया।
उन्होंने ठान ली कि ऐसी घड़ी में जब परिवार वाले भी कोरोना मरीजों के शवों को हाथ लगाने से डरते हैं उस समय में वह लोग मर्यादा के साथ उनके आत्म सम्मान का ध्यान रखते हुए उनका अंतिम संस्कार करेंगे। अंतिम संस्कार के बाद सभी लोग एसओपी का पालन करते हैं।