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Jammu News: सही तरीके से नहीं हो रहा नशा मुक्ति केंद्रों का संचालन, हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के गृह विभाग के सचिव और नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो के निदेशक से दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे नशामुक्ति केंद्रों का विवरण मांगा है।
सार्वजनिक हित की याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तान और न्यायमूर्ति एमए चौधरी की खंडपीठ ने आदेश दिया कि संबंधित हलफनामा 30 दिसंबर तक दाखिल किया जाए। इसके बाद याचिका पर अगली सुनवाई होगी।
27 फरवरी 2023 को फॉरेंसिक साइंस लैब्स के निदेशक ने एक स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें सुधार के लिए उठाए गए कदमों का विवरण था। रिपोर्ट में कहा गया था कि रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके बाद, अदालत को सूचित किया गया कि अब तक नशामुक्ति केंद्रों के संबंध में कोई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है। इन सेंटरों का संचालन सही तरीके से नहीं हो रहा है। इस पर अदालत ने अधिकारियों को सरकारी, निजी और एनजीओ द्वारा संचालित नशामुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली पर रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या फॉरेंसिक साइंस लैब्स में रिक्तियां भर दी गई हैं या नहीं।
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सार्वजनिक हित की याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तान और न्यायमूर्ति एमए चौधरी की खंडपीठ ने आदेश दिया कि संबंधित हलफनामा 30 दिसंबर तक दाखिल किया जाए। इसके बाद याचिका पर अगली सुनवाई होगी।
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27 फरवरी 2023 को फॉरेंसिक साइंस लैब्स के निदेशक ने एक स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें सुधार के लिए उठाए गए कदमों का विवरण था। रिपोर्ट में कहा गया था कि रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके बाद, अदालत को सूचित किया गया कि अब तक नशामुक्ति केंद्रों के संबंध में कोई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है। इन सेंटरों का संचालन सही तरीके से नहीं हो रहा है। इस पर अदालत ने अधिकारियों को सरकारी, निजी और एनजीओ द्वारा संचालित नशामुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली पर रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या फॉरेंसिक साइंस लैब्स में रिक्तियां भर दी गई हैं या नहीं।
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