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Jammu News: शब्दों, रंगों और सुरों के संग अगले साल फिर आने का वादा कर संपन्न हुआ चिनार पुस्तक महोत्सव
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श्रीनगर। नौ दिवसीय ‘चिनार पुस्तक महोत्सव 2025’ का समापन रविवार को एसकेआईसीसी में हो गया। परिसर, स्टॉल और हॉल अपने हाथों में किताबें और पुरस्कार थामे बच्चों से भरा था। विदा होते यह उत्सव गर्व, आभार और आने वाले कई यादगार पलों की उम्मीद के साथ पूर्ण हुआ। चिनार पुस्तक महोत्सव के दूसरे संस्करण का अंतिम दिन उमंग, रचनात्मकता और सौहार्द के साथ खत्म हुआ।
बाल मंच का ग्रैंड फिनाले ठहाकों, लर्निंग और रचनात्मकता के साथ हुआ। महोेत्सव के आखिरी दिन सुबह की शुरुआत ‘मीट द चीता फन विद राष्ट्रीय ई-लाइब्रेरी’ से हुई जिसमें बच्चों और शिक्षकों ने राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एप के बारे में जाना। रोचक क्विज़ में भाग लेकर पुरस्कार जीतनेे के साथ ही बच्चों ने चीता के शुभंकर के साथ डांस और मस्ती भी की। स्टूडेंट्स के ओपन माइक में रूफ डांस, गीत और नई शिक्षा नीति पर एक नाटक प्रस्तुत किया।
समूह चर्चाओं में भविष्य से संबंधित विषयों को शामिल किया गया। ड्रोन, एआई और लेज़र टेक्नोलॉजी सत्र में महेश कुमार, प्रणव विरमानी और दक्ष भारद्वाज ने बताया कि कैसे ये उपकरण हमारी दुनिया को बदल रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भूमिका विषय पर नदीन क़ादरी, जन्नत तारिक, जगजीत सिंह, डॉ. तौसीफ़ अहमद और अयान सरूरी ने युवाओं को हैशटैग और सुर्खियों से आगे बढ़कर जलवायु सहनशीलता, संरक्षण और सतत जीवन के लिए ठोस कार्रवाई का आह्वान किया।
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चिनार पुस्तक महोत्सव ढलती शाम के साथ साहित्यिक ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव का समा बंध गया जो कश्मीर की रचनात्मक रूह में नई सांस भर रहा था। नौ दिनों में यह लेखक, कलाकार, शिक्षाविद, विद्यार्थी और आम कश्मीरी का संगम बना, जिसने याद दिलाया कि साहित्य और संस्कृति एक जिंदा समाज की धड़कन हैं। तालियों की गूंज और चाय के अंतिम प्याले के साथ, अगले संस्करण की प्रतीक्षा शुरू हो चुकी है।
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बाल मंच का ग्रैंड फिनाले ठहाकों, लर्निंग और रचनात्मकता के साथ हुआ। महोेत्सव के आखिरी दिन सुबह की शुरुआत ‘मीट द चीता फन विद राष्ट्रीय ई-लाइब्रेरी’ से हुई जिसमें बच्चों और शिक्षकों ने राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एप के बारे में जाना। रोचक क्विज़ में भाग लेकर पुरस्कार जीतनेे के साथ ही बच्चों ने चीता के शुभंकर के साथ डांस और मस्ती भी की। स्टूडेंट्स के ओपन माइक में रूफ डांस, गीत और नई शिक्षा नीति पर एक नाटक प्रस्तुत किया।
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समूह चर्चाओं में भविष्य से संबंधित विषयों को शामिल किया गया। ड्रोन, एआई और लेज़र टेक्नोलॉजी सत्र में महेश कुमार, प्रणव विरमानी और दक्ष भारद्वाज ने बताया कि कैसे ये उपकरण हमारी दुनिया को बदल रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भूमिका विषय पर नदीन क़ादरी, जन्नत तारिक, जगजीत सिंह, डॉ. तौसीफ़ अहमद और अयान सरूरी ने युवाओं को हैशटैग और सुर्खियों से आगे बढ़कर जलवायु सहनशीलता, संरक्षण और सतत जीवन के लिए ठोस कार्रवाई का आह्वान किया।
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चिनार पुस्तक महोत्सव ढलती शाम के साथ साहित्यिक ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव का समा बंध गया जो कश्मीर की रचनात्मक रूह में नई सांस भर रहा था। नौ दिनों में यह लेखक, कलाकार, शिक्षाविद, विद्यार्थी और आम कश्मीरी का संगम बना, जिसने याद दिलाया कि साहित्य और संस्कृति एक जिंदा समाज की धड़कन हैं। तालियों की गूंज और चाय के अंतिम प्याले के साथ, अगले संस्करण की प्रतीक्षा शुरू हो चुकी है।