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Jammu News: बिजली बिल में वृद्धि केे खिलाफ प्रदर्शन
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बढ़े हुए बिजली बिल के खिलाफ गुरेज घाटी के दावर कस्बे के लोगों ने प्रदर्शन किया।
- फोटो : jammu kashmir news
बांदीपोरा। गुरेज घाटी के सीमावर्ती कस्बे दावर के निवासियों ने बिजली बिलों में हाल ही में हुई भारी बढ़ोतरी के खिलाफ शनिवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
दावर चौक पर जुटे आक्रोशित लोगों ने रोड जाम कर विद्युत विकास विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली बिल दोगुना कर दिया गया।
नाराज लोगों ने बढ़ी हुई दरों को तुरंत वापस लेने और बढ़े हुए बिलों को माफ करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को नज़रअंदाज़ किया गया तो पूरे क्षेत्र में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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एक स्थानीय निवासी ने कहा, पिछले महीने तक घर का बिल लगभग 500 रुपये था। अब यह अचानक बढ़कर 1,040 हो गया है, जबकि बिजली आपूर्ति दिन में केवल छह से आठ घंटे ही उपलब्ध है। उन्होंने इस कदम को गरीब परिवारों के साथ अन्याय बताया।
सामाजिक कार्यकर्ता हमजा लोन ने सरकार से गुरेज निवासियों की शिकायतों को गंभीरता से लेने का आग्रह करते और चेतावनी दी कि अगर इस मुद्दे का समाधान नहीं किया गया तो जनता का गुस्सा और बढ़ सकता है। एडवोकेट जाकिर ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि जनता से सलाह-मशविरा किए बिना इस तरह के एकतरफा कदम लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
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दावर चौक पर जुटे आक्रोशित लोगों ने रोड जाम कर विद्युत विकास विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली बिल दोगुना कर दिया गया।
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नाराज लोगों ने बढ़ी हुई दरों को तुरंत वापस लेने और बढ़े हुए बिलों को माफ करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को नज़रअंदाज़ किया गया तो पूरे क्षेत्र में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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एक स्थानीय निवासी ने कहा, पिछले महीने तक घर का बिल लगभग 500 रुपये था। अब यह अचानक बढ़कर 1,040 हो गया है, जबकि बिजली आपूर्ति दिन में केवल छह से आठ घंटे ही उपलब्ध है। उन्होंने इस कदम को गरीब परिवारों के साथ अन्याय बताया।
सामाजिक कार्यकर्ता हमजा लोन ने सरकार से गुरेज निवासियों की शिकायतों को गंभीरता से लेने का आग्रह करते और चेतावनी दी कि अगर इस मुद्दे का समाधान नहीं किया गया तो जनता का गुस्सा और बढ़ सकता है। एडवोकेट जाकिर ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि जनता से सलाह-मशविरा किए बिना इस तरह के एकतरफा कदम लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ हैं।