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Jammu News: फिरन पहन युवाओं ने रैंप पर बिखेरा जलबा, झलकी घाटी की संस्कृति
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श्रीनगर। घाटी की संस्कृति को उजागर करती पोशाक फिरन को विश्वभर में लोकप्रिय बनाने के लिए शनिवार को लाल चौक में घंटाघर के सामने अंतरराष्ट्रीय फिरन दिवस मनाया गया। स्थानीय युवाओं-युवतियों ने फिरन पहनकर रैंप पर जलवा बिखेरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कटआउट को कश्मीरी फिरन पहनाकर प्रदर्शित किया गया। इसे देखने बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों व पर्यटकों की भीड़ उमड़ी।
पीएम के कटआउट को फिरन पहनाने वाले बडगाम के कवि जमाल अली करबलाई उर्फ जमाल बडगामी ने बताया कि हम बीते चार वर्षों से फिरन-डे मना रहे हैं। यह दूसरी बार है जब पीएम मोदी को पारंपरिक लिबास पहनाया गया। हमने इजबंद भी जलाया और मिठाइयां अर्पित कीं। पारंपरिक रूप से इजबंद के बीजों को जलते कोयले या कांगड़ी में रखा जाता है। ये सुगंधित धुआं छोड़ते हैं। मान्यता है कि इससे बुरी शक्तियां दूर भागती हैं। बडगामी ने कहा, हम चाहते हैं कि फिरन दुनिया भर में मशहूर हो।
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पहचान और गौरव का प्रतीक है फिरन
कार्यक्रम में रंग और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। इस आयोजन ने कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को उजागर किया। पारंपरिक लिवास में युवाओं ने रैंप वॉक कर सबका मन जीत लिया। एक युवती ने कश्मीरी शॉल के साथ फिरन को इतने खूबसूरत अंदाज में पेश किया। शीर्ष कश्मीरी डिजाइनरों ने विभिन्न प्रकार के फिरन और शॉल प्रस्तुत किए। इनमें पारंपरिक कढ़ाई की बारीकियां और समकालीन शैली का अद्भुत मेल देखने को मिला। शॉल की उत्कृष्ट कारीगरी और बारीक डिजाइन ने फिरन की सुंदरता को चार चांद लगा दिए। प्रतिभागियों ने गर्व के साथ रैंप पर कश्मीरी परिधानों के कालातीत आकर्षण को दर्शाया। एक उत्साही प्रतिभागी बिस्मा ने कहा, फिरन पहनना और कश्मीरी शॉल ओढ़ना केवल एक परंपरा नहीं है। यह हमारी पहचान और गौरव का प्रतीक है।
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पीएम के कटआउट को फिरन पहनाने वाले बडगाम के कवि जमाल अली करबलाई उर्फ जमाल बडगामी ने बताया कि हम बीते चार वर्षों से फिरन-डे मना रहे हैं। यह दूसरी बार है जब पीएम मोदी को पारंपरिक लिबास पहनाया गया। हमने इजबंद भी जलाया और मिठाइयां अर्पित कीं। पारंपरिक रूप से इजबंद के बीजों को जलते कोयले या कांगड़ी में रखा जाता है। ये सुगंधित धुआं छोड़ते हैं। मान्यता है कि इससे बुरी शक्तियां दूर भागती हैं। बडगामी ने कहा, हम चाहते हैं कि फिरन दुनिया भर में मशहूर हो।
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पहचान और गौरव का प्रतीक है फिरन
कार्यक्रम में रंग और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। इस आयोजन ने कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को उजागर किया। पारंपरिक लिवास में युवाओं ने रैंप वॉक कर सबका मन जीत लिया। एक युवती ने कश्मीरी शॉल के साथ फिरन को इतने खूबसूरत अंदाज में पेश किया। शीर्ष कश्मीरी डिजाइनरों ने विभिन्न प्रकार के फिरन और शॉल प्रस्तुत किए। इनमें पारंपरिक कढ़ाई की बारीकियां और समकालीन शैली का अद्भुत मेल देखने को मिला। शॉल की उत्कृष्ट कारीगरी और बारीक डिजाइन ने फिरन की सुंदरता को चार चांद लगा दिए। प्रतिभागियों ने गर्व के साथ रैंप पर कश्मीरी परिधानों के कालातीत आकर्षण को दर्शाया। एक उत्साही प्रतिभागी बिस्मा ने कहा, फिरन पहनना और कश्मीरी शॉल ओढ़ना केवल एक परंपरा नहीं है। यह हमारी पहचान और गौरव का प्रतीक है।
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