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कश्मीर में कई युवा सिखों को मतदाता सूची से बाहर किया गया : एपीएससीसी
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श्रीनगर। ऑल पार्टीज सिख कोआर्डिनेशन कमेटी (एपीएससीसी) ने घाटी में कई युवा सिख मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करने की आशंका जताई है। कहा कि 2011 में हुई जनगणना व्यवस्थित तरीके से नहीं की गई थी। समिति ने सिख मतदाताओं के बिखराव पर भी चिंता व्यक्त करते कहा कि इसका एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सिख एकजुट न हों। ये मुद्दा एपीएससीसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जम्मू एवं कश्मीर के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान उठाया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एपीएससीसी के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने किया।
समिति ने कुछ सप्ताह पहले जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाली भारतीय चुनाव आयोग की टीम के साथ इन मुद्दों को उठाने की योजना बनाई थी। चूंकि समिति समय की कमी के कारण चुनाव आयोग से नहीं मिल सकी। इसलिए चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को उनसे संपर्क करने और उनकी बात सुनने का निर्देश दिया था। इसके बाद एपीएससीसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को यहां मुख्य चुनाव कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। एपीएससीसी के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने कहा कि समिति ने सरकार को 2011 में कश्मीर घाटी में जनगणना करते समय सिख समुदाय की एक टीम को भी साथ रखने का प्रस्ताव दिया था।
उन्होंने कहा कि चूंकि अधिकांश सिख परिवार गांव छोड़कर मेहजूर नगर, अलूची बाग, जवाहर नगर और अन्य इलाकों में बस गए हैं इसलिए यह जरूरी है कि जनगणना के दौरान समुदाय के सदस्यों को साथ ले जाया जाए। रैना ने कहा, कई युवा सिख मतदाता आगामी विधानसभा चुनावों में मत का इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि मतदाता सूची में उनके नाम गायब हो सकते हैं। इससे समुदाय को मताधिकार से वंचित होना पड़ेगा और परिणाम किसी आपदा से कम नहीं होंगे। एपीएससीसी अध्यक्ष ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने समिति से मुलाकात की होती तो मामले को सुलझाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि समुदाय से संबंधित अन्य मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है और कोई जवाबदेही नहीं है।
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समिति ने कुछ सप्ताह पहले जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाली भारतीय चुनाव आयोग की टीम के साथ इन मुद्दों को उठाने की योजना बनाई थी। चूंकि समिति समय की कमी के कारण चुनाव आयोग से नहीं मिल सकी। इसलिए चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को उनसे संपर्क करने और उनकी बात सुनने का निर्देश दिया था। इसके बाद एपीएससीसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को यहां मुख्य चुनाव कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। एपीएससीसी के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने कहा कि समिति ने सरकार को 2011 में कश्मीर घाटी में जनगणना करते समय सिख समुदाय की एक टीम को भी साथ रखने का प्रस्ताव दिया था।
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उन्होंने कहा कि चूंकि अधिकांश सिख परिवार गांव छोड़कर मेहजूर नगर, अलूची बाग, जवाहर नगर और अन्य इलाकों में बस गए हैं इसलिए यह जरूरी है कि जनगणना के दौरान समुदाय के सदस्यों को साथ ले जाया जाए। रैना ने कहा, कई युवा सिख मतदाता आगामी विधानसभा चुनावों में मत का इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि मतदाता सूची में उनके नाम गायब हो सकते हैं। इससे समुदाय को मताधिकार से वंचित होना पड़ेगा और परिणाम किसी आपदा से कम नहीं होंगे। एपीएससीसी अध्यक्ष ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने समिति से मुलाकात की होती तो मामले को सुलझाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि समुदाय से संबंधित अन्य मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है और कोई जवाबदेही नहीं है।
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