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जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश नहीं मानते : उपमुख्यमंत्री
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श्रीनगर। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने शनिवार को कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस क्षेत्र को राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश नहीं बल्कि एक राज्य मानते हैं। चौधरी ने कहा, हम राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने रुख पर स्पष्ट हैं। हम उन ताकतों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे जिन्होंने जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया।
पत्रकारों से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षाबलों को उपायों को मजबूत करना चाहिए और अपनी ड्यूटी को पूरी लगन से निभाना चाहिए। उन्होंने कहा, आतंकी हमले बंद होने चाहिएं। यह लोगों की सरकार है और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व, खासकर फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में स्वीकार किया है कि जम्मू-कश्मीर में जमीन और नौकरियां यहां के निवासियों की हैं। लेकिन इन्हें सुरक्षित रखने के लिए क्षेत्र को विशेष दर्जा देने की आवश्यकता होगी जो उनके अपने बयान के विपरीत प्रतीत होता है।
एक सवाल के जवाब में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा रोजगार, औद्योगिक नीतियों, अवैध खनन, आशा कार्यकर्ताओं, दिहाड़ी मजदूरों और जम्मू-कश्मीर में नशीली दवाओं की आमद जैसे मुद्दों को संबोधित करेगी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि ये मुद्दे उनके लिए बहुत कम रुचिकर प्रतीत होते हैं। इसके बजाय ऐसा लगता है कि उनका प्राथमिक ध्यान सत्ता और पद हासिल करने पर है। उन्होंने भाजपा के मौजूदा रुख की आलोचना करते हुए कहा, जम्मू-कश्मीर में भाजपा अपने फायदे, कमीशन और प्रभाव बनाए रखने के बारे में अधिक चिंतित है। विडंबना यह है कि यह वही भाजपा है जिसने कभी भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ने का वादा किया था लेकिन आज जमीन पर उनके कार्य कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। यह स्पष्ट है कि उनकी प्राथमिकताएं कहां हैं।
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पत्रकारों से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षाबलों को उपायों को मजबूत करना चाहिए और अपनी ड्यूटी को पूरी लगन से निभाना चाहिए। उन्होंने कहा, आतंकी हमले बंद होने चाहिएं। यह लोगों की सरकार है और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व, खासकर फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में स्वीकार किया है कि जम्मू-कश्मीर में जमीन और नौकरियां यहां के निवासियों की हैं। लेकिन इन्हें सुरक्षित रखने के लिए क्षेत्र को विशेष दर्जा देने की आवश्यकता होगी जो उनके अपने बयान के विपरीत प्रतीत होता है।
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एक सवाल के जवाब में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा रोजगार, औद्योगिक नीतियों, अवैध खनन, आशा कार्यकर्ताओं, दिहाड़ी मजदूरों और जम्मू-कश्मीर में नशीली दवाओं की आमद जैसे मुद्दों को संबोधित करेगी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि ये मुद्दे उनके लिए बहुत कम रुचिकर प्रतीत होते हैं। इसके बजाय ऐसा लगता है कि उनका प्राथमिक ध्यान सत्ता और पद हासिल करने पर है। उन्होंने भाजपा के मौजूदा रुख की आलोचना करते हुए कहा, जम्मू-कश्मीर में भाजपा अपने फायदे, कमीशन और प्रभाव बनाए रखने के बारे में अधिक चिंतित है। विडंबना यह है कि यह वही भाजपा है जिसने कभी भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ने का वादा किया था लेकिन आज जमीन पर उनके कार्य कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। यह स्पष्ट है कि उनकी प्राथमिकताएं कहां हैं।
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