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Jammu News: श्रीनगर में झेलम का जलस्तर घटने लगा, प्रशासन की निगरानी जारी

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jammu kashmir news
श्रीनगर की सड़कों पर भरा बारिश का पानी। - फोटो : shrinagar news
श्रीनगर। कश्मीर में बाढ़ का खतरा वीरवार को कम हो गया क्योंकि मौसम में सुधार के बाद झेलम नदी और घाटी के अन्य जलाशयों का जलस्तर कम होने लगा।
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संभागीय प्रशासन ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले 12 घंटों में कश्मीर घाटी में बहुत कम बारिश हुई है और मौसम में सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि मौसम में सुधार के कारण झेलम और घाटी के अन्य जलाशयों का जलस्तर कम होने लगा है। अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के संगम पर झेलम नदी का जलस्तर वीरवार सुबह बाढ़ की चेतावनी के स्तर से नीचे आ गया। उन्होंने बताया कि हालांकि श्रीनगर में बहाव अभी भी खतरे के स्तर से ऊपर है लेकिन नदी का जलस्तर कम हो रहा है। झेलम नदी की सहायक नदियां भी बाढ़ की चेतावनी के स्तर से नीचे बह रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को बाढ़ग्रस्त इलाकों में भी पानी कम होना शुरू हो गया है।
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हालांकि अधिकारियों ने कहा कि विभिन्न विभागों द्वारा निगरानी जारी है और टीमें अलर्ट पर हैं। मौसम विभाग ने कहा कि घाटी में अब तक मौसम मुख्यतः शुष्क बना हुआ है लेकिन कुछ स्थानों पर दोपहर और देर रात के समय हल्की बारिश/गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा कि 30 अगस्त से 1 सितंबर तक जम्मू के कुछ जिलों में मध्यम से भारी बारिश/गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर छिटपुट से लेकर काफी व्यापक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अनुसार 2 से 6 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर हल्की बारिश/गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।
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इस बीच संभागीय प्रशासन ने वीरवार को कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है लेकिन मानसून के कारण अगला पखवाड़ा महत्वपूर्ण है। कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर (डिव कॉम) अंशुल गर्ग ने स्थिति से निपटने के तरीके के लिए कश्मीर के लोगों की प्रशंसा की। मैंने उनसे सतर्क रहने और प्रशासन तथा मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। नदियों और सहायक नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की ज़रूरत है, अगले 10-15 दिन महत्वपूर्ण हैं। हमारी ज़िला आपदा प्रबंधन टीमें चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रखने के लिए मौजूद रहेंगी। उन्होंने कहा, ‘जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष और केंद्र शासित प्रदेश स्तर के आपातकालीन नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे काम करते रहेंगे ताकि लोग प्रशासन से संपर्क कर सकें।’’ गर्ग ने कहा कि हालांकि ये अगले 15-20 दिनों के लिए अल्पकालिक उपाय हैं जब तक कि मौसम की स्थिति में सुधार न हो जाए।
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