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Jammu News: 1400 लोगों पर गहराया पेयजल संकट, दूषित पानी पीने को मजबूर
Sun, 21 Jun 2026 02:00 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 21 Jun 2026 02:00 AM IST
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संगड़ गांव में 1400 लोगों पर गहराया पेयजल संकट, दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण दृश्य स्रोत सं
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जल जीवन मिशन पर करोड़ों खर्च के बावजूद नहीं मिल रहा पानी
महिलाएं बोलीं- पानी के बिना घर चलाना हुआ मुश्किल, ग्रामीणों ने एलजी और डीसी सांबा से लगाई गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। क्षेत्र के संगड़ गांव में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। गांव के करीब 230 परिवारों और 1400 लोगों को वर्षों से पीने के पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को मजबूरी में दूर-दराज स्थित कुओं से दूषित पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ रही है जिससे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में दशकों से चली आ रही पेयजल समस्या के समाधान के लिए जल जीवन मिशन योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये खर्च कर एक पेयजल केंद्र स्थापित किया गया था। इसके साथ ही घर-घर तक पाइपलाइन भी बिछाई गई और जलापूर्ति स्टेशन को शुरू किया गया। बोरवेल से पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण योजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि योजना पर भारी धनराशि खर्च होने के बावजूद आज भी उन्हें नियमित पेयजल सुविधा नहीं मिल रही है। कई बार इस समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों से लेकर उच्च प्रशासनिक अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचाई गईं। ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन भी किए लेकिन इसके बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
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गांव की महिलाओं ने बताया कि पानी की कमी के कारण घरेलू जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। शारदा देवी, मखनी देवी, विमला देवी, रश्मि देवी, गारो देवी, पुष्पा देवी और निशा शर्मा ने बताया कि एक गृहिणी के लिए रसोई में खाना बनाने, बर्तन साफ करने, कपड़े धोने, शौचालय की सफाई और अन्य दैनिक कार्यों के लिए पानी सबसे आवश्यक जरूरत है। पानी की कमी के कारण उन्हें रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी के मौसम में स्थिति और भी विकट हो जाती है। जहां लोगों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं पशुओं के लिए भी पानी की भारी कमी बनी हुई है। कई बार ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी होती है।
विजय कुमार, रोमेश कुमार, जोगिंदर शर्मा, राकेश कुमार, राम चंद और कुलदीप कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया है। मगर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि लोगों को पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
ग्रामीणों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, डीसी सांबा आयुषी सुदान तथा जल शक्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो संगड़ गांव के लोग अपने परिवारों सहित पलायन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल जीवन मिशन के तहत स्थापित योजना की तकनीकी जांच करवाई जाए और वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था कर गांव के लोगों को शीघ्र राहत प्रदान की जाए।
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महिलाएं बोलीं- पानी के बिना घर चलाना हुआ मुश्किल, ग्रामीणों ने एलजी और डीसी सांबा से लगाई गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। क्षेत्र के संगड़ गांव में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। गांव के करीब 230 परिवारों और 1400 लोगों को वर्षों से पीने के पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को मजबूरी में दूर-दराज स्थित कुओं से दूषित पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ रही है जिससे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में दशकों से चली आ रही पेयजल समस्या के समाधान के लिए जल जीवन मिशन योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये खर्च कर एक पेयजल केंद्र स्थापित किया गया था। इसके साथ ही घर-घर तक पाइपलाइन भी बिछाई गई और जलापूर्ति स्टेशन को शुरू किया गया। बोरवेल से पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण योजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि योजना पर भारी धनराशि खर्च होने के बावजूद आज भी उन्हें नियमित पेयजल सुविधा नहीं मिल रही है। कई बार इस समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों से लेकर उच्च प्रशासनिक अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचाई गईं। ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन भी किए लेकिन इसके बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
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गांव की महिलाओं ने बताया कि पानी की कमी के कारण घरेलू जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। शारदा देवी, मखनी देवी, विमला देवी, रश्मि देवी, गारो देवी, पुष्पा देवी और निशा शर्मा ने बताया कि एक गृहिणी के लिए रसोई में खाना बनाने, बर्तन साफ करने, कपड़े धोने, शौचालय की सफाई और अन्य दैनिक कार्यों के लिए पानी सबसे आवश्यक जरूरत है। पानी की कमी के कारण उन्हें रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी के मौसम में स्थिति और भी विकट हो जाती है। जहां लोगों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं पशुओं के लिए भी पानी की भारी कमी बनी हुई है। कई बार ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी होती है।
विजय कुमार, रोमेश कुमार, जोगिंदर शर्मा, राकेश कुमार, राम चंद और कुलदीप कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया है। मगर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि लोगों को पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
ग्रामीणों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, डीसी सांबा आयुषी सुदान तथा जल शक्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो संगड़ गांव के लोग अपने परिवारों सहित पलायन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल जीवन मिशन के तहत स्थापित योजना की तकनीकी जांच करवाई जाए और वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था कर गांव के लोगों को शीघ्र राहत प्रदान की जाए।