{"_id":"69f3c1cb6d8e8c9a33065b00","slug":"jammu-kashmir-news-samba-news-c-290-1-pgl1001-101634-2026-05-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: परगवाल में पहरेदारों ने बचाई गेहूं की फसल, किसान खुश होकर दे रहे मेहनताना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: परगवाल में पहरेदारों ने बचाई गेहूं की फसल, किसान खुश होकर दे रहे मेहनताना
विज्ञापन
परगवाल में फसल के पहरेदार गेहूं एकत्रित करते हुये संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परगवाल। कृषि प्रधान क्षेत्र परगवाल में किसान अपनी धान की फसल समेटने में जुटे हुए हैं। फसल निकलती देख फसल के पहरेदार भी किसानों से गेहूं एकत्रित करने में जुट गये हैं। 20 की संख्या में पहरेदार किसानों के घर द्वार पहुंच कर प्रति एकड़ एक पीपा (करीब 15 किलो गेहूं ) मेहनताना ले रहे हैं। इसको वह व्यापारियों को बेचकर राशि आपस में बांटेंगे।
यही नहीं किसान भी इनको हंसी-खुशी गेहूं देकर चाय पानी के लिए भी पूछ रहे हैं क्योंकि इन पहरेदारों ने रात दिन सर्दी-गर्मी-आंधी तूफान में खेतों में रहकर किसानों की फसल को जंगली मवेशियों से बचाया है। ये पहरेदार कोई और नहीं बल्कि अलग-अलग गांवों के ही युवा हैं जिन्होंने गेहूं की बुआई से लेकर फसल पकने तक खेतों में पहरेदारी की है। इससे किसानों की फसल सुरक्षित रही।
बता दें परगवाल एक कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां के ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर हैं, लेकिन यहां किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या खेतों में खड़ी अपनी फसल को मवेशियों से बचाने को लेकर रहती है। क्षेत्र के एक तरफ दरिया चिनाब तथा दूसरी तरफ पाकिस्तान की सीमा है। रात को मवेशी सैकड़ों की संख्या में फसल पर हमला बोल देते हैं और फसल बर्बाद करके वापस दरिया चिनाब के बीच बने टापू पर लौट जाते हैं।
विज्ञापन
जमीन एक जगह नहीं होने के कारण एक आदमी के लिए रखवाली करना आसान नहीं रहता लेकिन पहरेदारों ने फसल को जंगली मवेशियों से बचाया है। हम इनके आभारी हैं
-सुरजीत सिह, किसान
ये अनोखी पहल है। पहले किसान अपने खेतों में बैठकर रखवाली करते थे। मवेशियों की संख्या सैकड़ों मे होती है। अकेले फसल को बचाना आसान नहीं रहता। एक आदमी को देखकर जंगली मवेशी उसको मारने दौड़ते हैं लेकिन गांव के ही युवाओं ने एकत्रित होकर पहरेदारी की है और फसल को बचाया है।
-बिशन लाल, किसान
यह सराहनीय कदम है। इससे रखवाली करने वाले युवाओं को भी मेहनताना मिल रहा है और किसान भी खुश हैं। हम कोशिश करेंगे पहरेदारी को आगे भी जारी रखें। धान का सीजन शुरू होने वाला है। उससे पहले हम सब गांव वाले बैठकर रणनीति तय करेंगे और आगे भी इस क्रम को जारी रखेंगे। यह एक सराहनीय कदम है।
-भूपेन्द्र सिंह मन्हास, पूर्व सरपंच पंचायत सरवाल
हमने दिन रात पहरेदारी की है। हमारा करीब 20 आदमियों का एक ग्रुप है। जहां से मवेशी खेतों में घुसते थे वहां हमने अस्थायी ठिकाने बनाए। हमने बारी-बारी बैठकर फसलों की रखवाली की है। अब हम सभी गेहूं बेचकर राशि आपस में बांटेंगे। कई किसानों ने खुश होकर हमें मेहनत से ज्यादा गेहूं भी दिया है।
-बहादुर सिंह, पहरेदार
विज्ञापन
यही नहीं किसान भी इनको हंसी-खुशी गेहूं देकर चाय पानी के लिए भी पूछ रहे हैं क्योंकि इन पहरेदारों ने रात दिन सर्दी-गर्मी-आंधी तूफान में खेतों में रहकर किसानों की फसल को जंगली मवेशियों से बचाया है। ये पहरेदार कोई और नहीं बल्कि अलग-अलग गांवों के ही युवा हैं जिन्होंने गेहूं की बुआई से लेकर फसल पकने तक खेतों में पहरेदारी की है। इससे किसानों की फसल सुरक्षित रही।
विज्ञापन
बता दें परगवाल एक कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां के ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर हैं, लेकिन यहां किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या खेतों में खड़ी अपनी फसल को मवेशियों से बचाने को लेकर रहती है। क्षेत्र के एक तरफ दरिया चिनाब तथा दूसरी तरफ पाकिस्तान की सीमा है। रात को मवेशी सैकड़ों की संख्या में फसल पर हमला बोल देते हैं और फसल बर्बाद करके वापस दरिया चिनाब के बीच बने टापू पर लौट जाते हैं।
विज्ञापन
जमीन एक जगह नहीं होने के कारण एक आदमी के लिए रखवाली करना आसान नहीं रहता लेकिन पहरेदारों ने फसल को जंगली मवेशियों से बचाया है। हम इनके आभारी हैं
-सुरजीत सिह, किसान
ये अनोखी पहल है। पहले किसान अपने खेतों में बैठकर रखवाली करते थे। मवेशियों की संख्या सैकड़ों मे होती है। अकेले फसल को बचाना आसान नहीं रहता। एक आदमी को देखकर जंगली मवेशी उसको मारने दौड़ते हैं लेकिन गांव के ही युवाओं ने एकत्रित होकर पहरेदारी की है और फसल को बचाया है।
-बिशन लाल, किसान
यह सराहनीय कदम है। इससे रखवाली करने वाले युवाओं को भी मेहनताना मिल रहा है और किसान भी खुश हैं। हम कोशिश करेंगे पहरेदारी को आगे भी जारी रखें। धान का सीजन शुरू होने वाला है। उससे पहले हम सब गांव वाले बैठकर रणनीति तय करेंगे और आगे भी इस क्रम को जारी रखेंगे। यह एक सराहनीय कदम है।
-भूपेन्द्र सिंह मन्हास, पूर्व सरपंच पंचायत सरवाल
हमने दिन रात पहरेदारी की है। हमारा करीब 20 आदमियों का एक ग्रुप है। जहां से मवेशी खेतों में घुसते थे वहां हमने अस्थायी ठिकाने बनाए। हमने बारी-बारी बैठकर फसलों की रखवाली की है। अब हम सभी गेहूं बेचकर राशि आपस में बांटेंगे। कई किसानों ने खुश होकर हमें मेहनत से ज्यादा गेहूं भी दिया है।
-बहादुर सिंह, पहरेदार

परगवाल में फसल के पहरेदार गेहूं एकत्रित करते हुये संवाद