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Jammu News: सांबा जिले में दस्तकारी विभाग की ‘कारखानदार योजना’ से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
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सांबा। जिले में दस्तकारी विभाग की ओर से चलाई जा रही कारखानादार योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में सराहनीय पहल की गई है। इस योजना के अंतर्गत जिले में चार यूनिट चल रहे हैं। इनमें 44 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं। प्रत्येक यूनिट में 10 महिलाओं के लिए एक प्रशिक्षक महिला होती है। महिलाओं ने छह महीने की प्रशिक्षण अवधि पूरी कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
जिले के गांव बड़ाली की प्रशिक्षक अंजू शर्मा ने बताया कि योजना के तहत महिलाओं को स्वेटर बुनाई, क्रोशिया कार्य, टोकरी निर्माण सहित अन्य हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। छह माह के प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक प्रतिभागी को सरकार की ओर से प्रतिमाह दो हजार रुपये स्टाइपेंड भी दिया जाता है, जिससे महिलाओं को सीखने के साथ आर्थिक सहयोग भी मिलता है।
अंजू शर्मा ने कहा कि उन्होंने स्वयं यह कला सीखने के बाद अब अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया है। उनका मानना है कि हुनर सीखकर महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं और अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। उन्होंने सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस योजना से गरीब परिवारों की महिलाओं को बड़ा सहारा मिला है। प्रशिक्षण के बाद इच्छुक महिलाओं को ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें।
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प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं ने कहा कि पहले वे घर पर खाली रहती थीं, लेकिन अब वे स्वेटर, कोट और अन्य ऊनी वस्त्र तैयार करना सीख चुकी हैं। उनका कहना है कि यह केंद्र उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया है और वह चाहती हैं कि अधिक से अधिक महिलाएं इससे जुड़कर अपना रोजगार शुरू करें।
कोट
दस्तकारी विभाग की यह पहल सांबा जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इसमें कोई भी महिला यूनिट में प्रशिक्षण ले सकती है। मास्टर प्रशिक्षक ही महिलाओं की सूची देती है। जिले में चार यूनिट चल रहे हैं।
-इकशु शर्मा, सहायक निर्देशक हस्तशिल्प विभाग सांबा
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जिले के गांव बड़ाली की प्रशिक्षक अंजू शर्मा ने बताया कि योजना के तहत महिलाओं को स्वेटर बुनाई, क्रोशिया कार्य, टोकरी निर्माण सहित अन्य हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। छह माह के प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक प्रतिभागी को सरकार की ओर से प्रतिमाह दो हजार रुपये स्टाइपेंड भी दिया जाता है, जिससे महिलाओं को सीखने के साथ आर्थिक सहयोग भी मिलता है।
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अंजू शर्मा ने कहा कि उन्होंने स्वयं यह कला सीखने के बाद अब अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया है। उनका मानना है कि हुनर सीखकर महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं और अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। उन्होंने सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस योजना से गरीब परिवारों की महिलाओं को बड़ा सहारा मिला है। प्रशिक्षण के बाद इच्छुक महिलाओं को ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें।
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प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं ने कहा कि पहले वे घर पर खाली रहती थीं, लेकिन अब वे स्वेटर, कोट और अन्य ऊनी वस्त्र तैयार करना सीख चुकी हैं। उनका कहना है कि यह केंद्र उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया है और वह चाहती हैं कि अधिक से अधिक महिलाएं इससे जुड़कर अपना रोजगार शुरू करें।
कोट
दस्तकारी विभाग की यह पहल सांबा जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इसमें कोई भी महिला यूनिट में प्रशिक्षण ले सकती है। मास्टर प्रशिक्षक ही महिलाओं की सूची देती है। जिले में चार यूनिट चल रहे हैं।
-इकशु शर्मा, सहायक निर्देशक हस्तशिल्प विभाग सांबा