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Jammu News: साक्ष्यों के अभाव में सड़क हादसे के मामले में आरोपी बरी
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सांबा। जिला सांबा की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने वर्ष 2023 में हुए सड़क हादसे के मामले में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
मामले के अनुसार 28 जून 2023 को विजयपुर क्षेत्र में एक मोटरसाइकिल को पीछे से आ रही कार ने टक्कर मार दी थी। इसमें एक महिला घायल हो गई थी। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच के बाद आरोपी रविंदर सिंह उर्फ रोहित निवासी सुंजवां, विजयपुर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
सुनवाई के दौरान पेश किए गए गवाहों में से मुख्य चश्मदीद और घायल महिला दोनों ही आरोपी की पहचान नहीं कर सके। एक गवाह ने अदालत में स्पष्ट कहा कि उसे यह जानकारी नहीं है कि दुर्घटना के समय कार कौन चला रहा था जबकि घायल महिला भी अपने बयान से मुकर गई।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में आरोपी की पहचान और लापरवाही सिद्ध करना जरूरी होता है लेकिन इस मामले में न तो चालक की पहचान साबित हुई और न ही लापरवाही के पर्याप्त साक्ष्य सामने आए।
जांच में भी कई खामियां सामने आईं। जैसे स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं करना और पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत न करना। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए मामला खारिज कर दिया।
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मामले के अनुसार 28 जून 2023 को विजयपुर क्षेत्र में एक मोटरसाइकिल को पीछे से आ रही कार ने टक्कर मार दी थी। इसमें एक महिला घायल हो गई थी। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच के बाद आरोपी रविंदर सिंह उर्फ रोहित निवासी सुंजवां, विजयपुर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
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सुनवाई के दौरान पेश किए गए गवाहों में से मुख्य चश्मदीद और घायल महिला दोनों ही आरोपी की पहचान नहीं कर सके। एक गवाह ने अदालत में स्पष्ट कहा कि उसे यह जानकारी नहीं है कि दुर्घटना के समय कार कौन चला रहा था जबकि घायल महिला भी अपने बयान से मुकर गई।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में आरोपी की पहचान और लापरवाही सिद्ध करना जरूरी होता है लेकिन इस मामले में न तो चालक की पहचान साबित हुई और न ही लापरवाही के पर्याप्त साक्ष्य सामने आए।
जांच में भी कई खामियां सामने आईं। जैसे स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं करना और पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत न करना। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए मामला खारिज कर दिया।