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Jammu News: रसूखदार को मुफ्त में स्मार्ट मीटर, आमजन को खरीदने को मजबूर
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अरनिया। बिश्नाह सब डिवीजन के अंतर्गत अरनिया क्षेत्र में बिजली विभाग ने एक रसूखदार व्यक्ति के घर मुफ्त स्मार्ट मीटर की सुविधा दी है। वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग आमजन के कनेक्शन लेने पर खुद मीटर खरीदकर लगाने के लिए कह रहा है। आमजन को मीटर खरीदने के लिए 2000 से 3000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके चलते क्षेत्र के लोगों में भारी रोष है। लोगों ने बिजली विभाग के पक्षपात वाले रवैये को गलत करार देते हुए विभाग के उच्च अधिकारियों को उक्त मामले में संज्ञान लेने के लिए कहा है।
जानकारी के अनुसार पिछले दिनों कुंडी काटे जाने के बाद अरनिया के एक रसूखदार उपभोक्ता ने नए कनेक्शन के लिए आवेदन दिया और स्मार्ट मीटर लगाने की अर्जी दी। इसके बाद बिजली विभाग ने मीटर खरीद कर खुद लगाने के लिए कहा। इस पर उपभोक्ता ने बिजली विभाग के अधिकारियों को नियमों का पाठ पढ़ाते हुए स्मार्ट मीटर की सुविधा मुफ्त में देने के लिए कहा। उपभोक्ता ने बिजली विभाग से कहा कि अगर वह स्मार्ट मीटर स्थापित नहीं कर सकते तो उन्हें लिखित में दें, ताकि वह अपने पैसों से स्मार्ट मीटर लगा सकें। उपभोक्ता की जानकारी के आगे बिजली विभाग के अधिकारी चुपी साध बैठे और कनेक्शन के तीसरे दिन उपभोक्ता के घर जाकर मीटर लगा दिया। इसके चलते आमजन में पक्षपात करने पर बिजली विभाग के खिलाफ व्यापक रोष है।
अरनिया के स्थानीय निवासी सौरव सिंह ने बताया कि हाल ही में उन्होंने बिजली का नया कनेक्शन लिया है। सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद विभाग की तरफ से खुद के पैसों से मीटर खरीदने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्होंने 5500 रुपये में नया मीटर खरीदकर लगाया है। बिजली विभाग का यह रवैया तानाशाही से कम नहीं है।
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अरनिया के स्थानीय निवासी भारत भूषण ने बताया कि नया कनेक्शन लेने के बाद खुद के पैसों से मीटर खरीद कर लगाया गया है। बिजली विभाग को उनके स्तर पर मीटर लगाने का आग्रह किया गया लेकिन उन्होंने उनकी बात को अनसुना कर दिया। रसूखदार उपभोक्ताओं को सुविधा देना और आमजन को ठगना बिजली विभाग का पेशा बन चुका है। इस जालसाजी का पर्दाफाश होना जरूरी है।
अरनिया कस्बे के पूर्व पार्षद और व्यापार मंडल के प्रधान कैलाश चंद्र सैनी ने कहा कि मामला विचारनीय है। विभाग की तरफ से सभी को एक समान सुविधाएं देनी चाहिएं। बिजली विभाग को आमजन की भावनाओं से खेलने का कोई हक नहीं। इस मामले पर कड़ी आपत्ति दायर की जाएगी। जरूरत पड़ने पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। कसूरवारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। (संवाद)
कोट
नया कनेक्शन निकलने के साथ ही निजी कंपनी को उपभोक्ता का डाटा भेज दिया जाता है। इसके बाद कंपनी अपने स्तर पर स्मार्ट मीटर की सुविधा देती है। विभाग के पास स्मार्ट मीटर खत्म हैं।
-सुनील सिंह, एईई, बिजली विभाग, बिश्नाह
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जानकारी के अनुसार पिछले दिनों कुंडी काटे जाने के बाद अरनिया के एक रसूखदार उपभोक्ता ने नए कनेक्शन के लिए आवेदन दिया और स्मार्ट मीटर लगाने की अर्जी दी। इसके बाद बिजली विभाग ने मीटर खरीद कर खुद लगाने के लिए कहा। इस पर उपभोक्ता ने बिजली विभाग के अधिकारियों को नियमों का पाठ पढ़ाते हुए स्मार्ट मीटर की सुविधा मुफ्त में देने के लिए कहा। उपभोक्ता ने बिजली विभाग से कहा कि अगर वह स्मार्ट मीटर स्थापित नहीं कर सकते तो उन्हें लिखित में दें, ताकि वह अपने पैसों से स्मार्ट मीटर लगा सकें। उपभोक्ता की जानकारी के आगे बिजली विभाग के अधिकारी चुपी साध बैठे और कनेक्शन के तीसरे दिन उपभोक्ता के घर जाकर मीटर लगा दिया। इसके चलते आमजन में पक्षपात करने पर बिजली विभाग के खिलाफ व्यापक रोष है।
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अरनिया के स्थानीय निवासी सौरव सिंह ने बताया कि हाल ही में उन्होंने बिजली का नया कनेक्शन लिया है। सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद विभाग की तरफ से खुद के पैसों से मीटर खरीदने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्होंने 5500 रुपये में नया मीटर खरीदकर लगाया है। बिजली विभाग का यह रवैया तानाशाही से कम नहीं है।
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अरनिया के स्थानीय निवासी भारत भूषण ने बताया कि नया कनेक्शन लेने के बाद खुद के पैसों से मीटर खरीद कर लगाया गया है। बिजली विभाग को उनके स्तर पर मीटर लगाने का आग्रह किया गया लेकिन उन्होंने उनकी बात को अनसुना कर दिया। रसूखदार उपभोक्ताओं को सुविधा देना और आमजन को ठगना बिजली विभाग का पेशा बन चुका है। इस जालसाजी का पर्दाफाश होना जरूरी है।
अरनिया कस्बे के पूर्व पार्षद और व्यापार मंडल के प्रधान कैलाश चंद्र सैनी ने कहा कि मामला विचारनीय है। विभाग की तरफ से सभी को एक समान सुविधाएं देनी चाहिएं। बिजली विभाग को आमजन की भावनाओं से खेलने का कोई हक नहीं। इस मामले पर कड़ी आपत्ति दायर की जाएगी। जरूरत पड़ने पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। कसूरवारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। (संवाद)
कोट
नया कनेक्शन निकलने के साथ ही निजी कंपनी को उपभोक्ता का डाटा भेज दिया जाता है। इसके बाद कंपनी अपने स्तर पर स्मार्ट मीटर की सुविधा देती है। विभाग के पास स्मार्ट मीटर खत्म हैं।
-सुनील सिंह, एईई, बिजली विभाग, बिश्नाह