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Jammu News: अरनिया में 102 एंबुलेंस सेवा ठप ड्राइवर पिछले बीस दिन से नहीं
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अरनिया। अरनिया अस्पताल में पिछले 20 दिन से 102 नंबर एंबुलेंस का ड्राइवर मौजूद नहीं है। इसके चलते मरीजों के परिजनों और डॉक्टरों के बीच बहसबाजी और कहासुनी होना आम बात हो गई है।
बिश्नाह अस्पताल में 30 जनवरी को एक ड्राइवर रिटायर हुआ है। इसके चलते अरनिया के एंबुलेंस ड्राइवर को बिश्नाह वापस बुला लिया गया। अरनिया अस्पताल में एंबुलेंस के ड्राइवर के रिक्त पड़े स्थान को भरने के लिए तकरीबन एक महीना पहले ही बिश्नाह से ड्राइवर को अटैच किया था। अस्पताल में आपातकाल में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टर द्वारा जीएमसी रेफर करने के बाद ड्राइवर न होने से मरीजों को निजी तौर पर टैक्सी करनी पड़ रही है। इसके लिए उन्हें 2500 से 3000 रुपए देने पड़ रहे हैं।
अरनिया अस्पताल में एक एंबुलेंस 108 नंबर तैनात है। जिसे आपातकाल में इस्तेमाल किया जा रहा है। परंतु 108 नंबर एंबुलेंस शव को नहीं ले जाती है। वहीं दूसरी ओर अस्पताल में एक समय पर आपातकाल में दो मरीज पहुंचने पर 102 नंबर एंबुलेंस का ड्राइवर न होने के चलते मरीज को खुद का विकल्प तैयार करना पड़ रहा है। इस मौके पर स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। लोगों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अच्छी सेवा देने के दावे जमीनी स्तर पर खोखले साबित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस तो अस्पताल में खड़ी की गई है। परंतु ड्राइवर ही तैनात नहीं है। इससे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही साफ तौर पर नजर आ रही है।
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108 नंबर एंबुलेंस पहले से ही मरीज को लेकर अगर जम्मू जीएमसी गई है, तो पीछे से कोई हृदय रोगी आता है तो ड्राइवर का प्रबंध करने में समय निकल जाता है। इससे मरीज की जान को खतरा रहता है। इसके चलते प्राथमिकता पर एंबुलेंस और ड्राइवर का होना जरूरी है।
कोट
अरनिया के एंबुलेंस ड्राइवर को वापस बिश्नाह अस्पताल बुला लिया गया है। फिलहाल के लिए 108 नंबर एंबुलेंस ड्राइवर से ही काम लिया जा रहा है। एक समय पर दो मरीज आपातकाल में पहुंचने पर समस्या आ रही है। एंबुलेंस ड्राइवर के न होने पर उत्पन्न होने वाली समस्या से बीएमओ बिश्नाह को अवगत किया गया है।
-प्रेमलाल, जेडएमओ अरनिया
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बिश्नाह अस्पताल में 30 जनवरी को एक ड्राइवर रिटायर हुआ है। इसके चलते अरनिया के एंबुलेंस ड्राइवर को बिश्नाह वापस बुला लिया गया। अरनिया अस्पताल में एंबुलेंस के ड्राइवर के रिक्त पड़े स्थान को भरने के लिए तकरीबन एक महीना पहले ही बिश्नाह से ड्राइवर को अटैच किया था। अस्पताल में आपातकाल में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टर द्वारा जीएमसी रेफर करने के बाद ड्राइवर न होने से मरीजों को निजी तौर पर टैक्सी करनी पड़ रही है। इसके लिए उन्हें 2500 से 3000 रुपए देने पड़ रहे हैं।
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अरनिया अस्पताल में एक एंबुलेंस 108 नंबर तैनात है। जिसे आपातकाल में इस्तेमाल किया जा रहा है। परंतु 108 नंबर एंबुलेंस शव को नहीं ले जाती है। वहीं दूसरी ओर अस्पताल में एक समय पर आपातकाल में दो मरीज पहुंचने पर 102 नंबर एंबुलेंस का ड्राइवर न होने के चलते मरीज को खुद का विकल्प तैयार करना पड़ रहा है। इस मौके पर स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। लोगों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अच्छी सेवा देने के दावे जमीनी स्तर पर खोखले साबित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस तो अस्पताल में खड़ी की गई है। परंतु ड्राइवर ही तैनात नहीं है। इससे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही साफ तौर पर नजर आ रही है।
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108 नंबर एंबुलेंस पहले से ही मरीज को लेकर अगर जम्मू जीएमसी गई है, तो पीछे से कोई हृदय रोगी आता है तो ड्राइवर का प्रबंध करने में समय निकल जाता है। इससे मरीज की जान को खतरा रहता है। इसके चलते प्राथमिकता पर एंबुलेंस और ड्राइवर का होना जरूरी है।
कोट
अरनिया के एंबुलेंस ड्राइवर को वापस बिश्नाह अस्पताल बुला लिया गया है। फिलहाल के लिए 108 नंबर एंबुलेंस ड्राइवर से ही काम लिया जा रहा है। एक समय पर दो मरीज आपातकाल में पहुंचने पर समस्या आ रही है। एंबुलेंस ड्राइवर के न होने पर उत्पन्न होने वाली समस्या से बीएमओ बिश्नाह को अवगत किया गया है।
-प्रेमलाल, जेडएमओ अरनिया