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Jammu News: बीमा एजेंट बनकर बैंक में बैठता था साहिल, रकम दोगुना करने का देता था झांसा
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अरनिया/आरएसपुरा। जम्मू व कश्मीर बैंक की आरएस पुरा शाखा में ग्राहकों से करीब 30 लाख रुपये ठगी करने के मामले में हैरानीजनक खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि आरोपी साहिल कुमार बैंक में पीएनबी मेटलाइफ का एजेंट बनकर बैठता था। पांच साल में रकम दोगुना करने का झांसा देता था। उसे बैंक में बैठने के लिए जगह भी दी गई थी।
आरोप है कि बैंक में एफडी करवाने और एफडी मैच्योर होने के बाद समय सीमा बढ़ाने के लिए जब ग्राहक पहुंचते थे तो बैंक कर्मी ग्राहकों को साहिल कुमार के पास भेज देते थे। वह लोगों को एफडी कराने के बजाय मेटलाइफ कंपनी में आकर्षक निवेश का प्लान बताता था। पांच साल में रकम दोगुना करने का ऑफर देता था। बैंक कर्मी समझकर लोग उस पर विश्वास कर लेते थे। आरोप है कि साहिल कुमार खुद ही ग्राहकों का वाउचर भरने के बाद पैसे निकलवा लेता था और रसीद भी नहीं देता था। नकद पैसे निकलवाने के अलावा ग्राहकों के खाते से ऑनलाइन लेनदेन भी कर लेता था।
हैरानी ये है कि बिना खातेदार की सहमति के ये सारा लेनदेन चलता रहा। बैंक प्रबंधन का इस ओर ध्यान नहीं गया। ग्राहकों का आरोप है कि ऐसा बैंक की मिलीभगत के बिना संभव नहीं हो सकता। इस बात की भी पुख्ता जांच होनी चाहिए।
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मामला तब खुला जब एक मार्च को एक सुदेश कुमारी नाम की एक महिला बैंक पहुंची। उसने जब अपने खाते के बारे में पता किया तो उसके पांव तले जमीन खिसक गई। उसके खाते से चार लाख रुपये निकाल लिए गए थे। उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने साहिल से पूछताछ की और उसे गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के बाद से बैंक में भी हड़कंप मच गया। बैंक कर्मी ग्राहकों को खुद फोन करके बैंक बुलाकर उनके साथ हुए फ्रॉड के बारे में बताने लगे। ठगी के शिकार लोग लगातार बैंक और आरएस पुरा थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं। इसके अलावा ज्यादातर लोगों ने आरबीआई और जम्मू व कश्मीर बैंक की अपर मैनेजमेंट को ईमेल के जरिए शिकायत दर्ज कराई है। पर अभी तक बैंक द्वारा ग्राहकों को पैसा वापस करने का आश्वासन नहीं दिया गया है। जिसके चलते ठगी के शिकार लोग परेशान हैं।
पीड़ित राकेश सिंह ने बताया कि उनके पिता बैंक में चार एफडी करवाने गए थे। चार में से तीन एफडी मुकम्मल कर ली गई, परंतु चौथी एफडी के बदले उनकी मर्जी बगैर 1,13000 रुपये पीएनबी मेटलाइफ में इन्वेस्टमेंट कराकर 3,50000 रुपये उनके खाते से निकाल लिए गए। उन्होंने बैंक मैनेजमेंट से बात की तो बताया गया कि आपके मसले का हल कर दिया जाएगा, लेकिन लिखित में पैसे लौटाने का आश्वासन नहीं दिया। उनका पैसा किसी मनदीप के खाते में ट्रांसफर किया गया है। आरोप है कि साहिल ग्राहकों के पैसे इसी तरह अपने लोगों के खाते में ट्रांसफर करा लेता और फिर यूपीआई के जरिए ट्रांसफर कर लेता था।
आरएस पुरा के संदीप कुमार ने बताया कि वह मेच्योर हुई एफडी की समय सीमा बढ़ाने के लिए बैंक पहुंचे थे। वहां पर बैंक कर्मी ने साहिल कुमार से इन्वेस्टमेंट प्लान समझने के लिए कहा। साहिल कुमार ने लुभावना प्लान बताकर उन्हें पॉलिसी के लिए तैयार कर लिया और उनसे दो लाख रुपये जमा करा लिए लेकिन रसीद नहीं दी। उन्होंने कहा कि जम्मू व कश्मीर बैंक में साहिल के बैठने के नाते ग्राहक उस पर भरोसा कर लेते थे। इसके लिए बैंक भी बराबर का दोषी है।
धोखाधड़ी के शिकार दबलैहड़ निवासी जोगिंदर कुमार ने बताया कि वह चार लाख की एफडी करवाने बैंक गए थे। वहां पर साहिल कुमार ने एफडी के बदले पांच साल में रकम दोगुनी करने के साथ 10 लाख रुपये का बीमा कवर मिलने का भी ऑफर दिया। उन्होंने बैंक कर्मी समझ कर पैसा निवेश करने की अनुमति दे दी। बाद में उन्हें पता चला कि पॉलिसी की बजाय उनके साथ चार लाख की धोखाधड़ी हो गई है। उन्होंने इसके लिए जम्मू व कश्मीर बैंक को भी कसूरवार ठहराया है।
बैंक कर्मी नहीं है आरोपी साहिल : मैनेजर
इस मुद्दे पर जम्मू व कश्मीर बैंक आरएस पुरा शाखा की ब्रांच मैनेजर नंदिता बख्शी का कहना है कि साहिल बैंक कर्मी नहीं है। हो सकता है लोगों से वह बीमा की किस्त लेने बैंक आता हो। बैंक में किस हैसियत से वह बैठता था। इस सवाल पर उन्होंने चुप्पी साध ली। थाना प्रभारी आरएस पुरा रवि परिहार ने कहा कि मामले की जांच जारी है।
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आरोप है कि बैंक में एफडी करवाने और एफडी मैच्योर होने के बाद समय सीमा बढ़ाने के लिए जब ग्राहक पहुंचते थे तो बैंक कर्मी ग्राहकों को साहिल कुमार के पास भेज देते थे। वह लोगों को एफडी कराने के बजाय मेटलाइफ कंपनी में आकर्षक निवेश का प्लान बताता था। पांच साल में रकम दोगुना करने का ऑफर देता था। बैंक कर्मी समझकर लोग उस पर विश्वास कर लेते थे। आरोप है कि साहिल कुमार खुद ही ग्राहकों का वाउचर भरने के बाद पैसे निकलवा लेता था और रसीद भी नहीं देता था। नकद पैसे निकलवाने के अलावा ग्राहकों के खाते से ऑनलाइन लेनदेन भी कर लेता था।
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हैरानी ये है कि बिना खातेदार की सहमति के ये सारा लेनदेन चलता रहा। बैंक प्रबंधन का इस ओर ध्यान नहीं गया। ग्राहकों का आरोप है कि ऐसा बैंक की मिलीभगत के बिना संभव नहीं हो सकता। इस बात की भी पुख्ता जांच होनी चाहिए।
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मामला तब खुला जब एक मार्च को एक सुदेश कुमारी नाम की एक महिला बैंक पहुंची। उसने जब अपने खाते के बारे में पता किया तो उसके पांव तले जमीन खिसक गई। उसके खाते से चार लाख रुपये निकाल लिए गए थे। उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने साहिल से पूछताछ की और उसे गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के बाद से बैंक में भी हड़कंप मच गया। बैंक कर्मी ग्राहकों को खुद फोन करके बैंक बुलाकर उनके साथ हुए फ्रॉड के बारे में बताने लगे। ठगी के शिकार लोग लगातार बैंक और आरएस पुरा थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं। इसके अलावा ज्यादातर लोगों ने आरबीआई और जम्मू व कश्मीर बैंक की अपर मैनेजमेंट को ईमेल के जरिए शिकायत दर्ज कराई है। पर अभी तक बैंक द्वारा ग्राहकों को पैसा वापस करने का आश्वासन नहीं दिया गया है। जिसके चलते ठगी के शिकार लोग परेशान हैं।
पीड़ित राकेश सिंह ने बताया कि उनके पिता बैंक में चार एफडी करवाने गए थे। चार में से तीन एफडी मुकम्मल कर ली गई, परंतु चौथी एफडी के बदले उनकी मर्जी बगैर 1,13000 रुपये पीएनबी मेटलाइफ में इन्वेस्टमेंट कराकर 3,50000 रुपये उनके खाते से निकाल लिए गए। उन्होंने बैंक मैनेजमेंट से बात की तो बताया गया कि आपके मसले का हल कर दिया जाएगा, लेकिन लिखित में पैसे लौटाने का आश्वासन नहीं दिया। उनका पैसा किसी मनदीप के खाते में ट्रांसफर किया गया है। आरोप है कि साहिल ग्राहकों के पैसे इसी तरह अपने लोगों के खाते में ट्रांसफर करा लेता और फिर यूपीआई के जरिए ट्रांसफर कर लेता था।
आरएस पुरा के संदीप कुमार ने बताया कि वह मेच्योर हुई एफडी की समय सीमा बढ़ाने के लिए बैंक पहुंचे थे। वहां पर बैंक कर्मी ने साहिल कुमार से इन्वेस्टमेंट प्लान समझने के लिए कहा। साहिल कुमार ने लुभावना प्लान बताकर उन्हें पॉलिसी के लिए तैयार कर लिया और उनसे दो लाख रुपये जमा करा लिए लेकिन रसीद नहीं दी। उन्होंने कहा कि जम्मू व कश्मीर बैंक में साहिल के बैठने के नाते ग्राहक उस पर भरोसा कर लेते थे। इसके लिए बैंक भी बराबर का दोषी है।
धोखाधड़ी के शिकार दबलैहड़ निवासी जोगिंदर कुमार ने बताया कि वह चार लाख की एफडी करवाने बैंक गए थे। वहां पर साहिल कुमार ने एफडी के बदले पांच साल में रकम दोगुनी करने के साथ 10 लाख रुपये का बीमा कवर मिलने का भी ऑफर दिया। उन्होंने बैंक कर्मी समझ कर पैसा निवेश करने की अनुमति दे दी। बाद में उन्हें पता चला कि पॉलिसी की बजाय उनके साथ चार लाख की धोखाधड़ी हो गई है। उन्होंने इसके लिए जम्मू व कश्मीर बैंक को भी कसूरवार ठहराया है।
बैंक कर्मी नहीं है आरोपी साहिल : मैनेजर
इस मुद्दे पर जम्मू व कश्मीर बैंक आरएस पुरा शाखा की ब्रांच मैनेजर नंदिता बख्शी का कहना है कि साहिल बैंक कर्मी नहीं है। हो सकता है लोगों से वह बीमा की किस्त लेने बैंक आता हो। बैंक में किस हैसियत से वह बैठता था। इस सवाल पर उन्होंने चुप्पी साध ली। थाना प्रभारी आरएस पुरा रवि परिहार ने कहा कि मामले की जांच जारी है।