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डीडीसी चुनावः स्कूटी लेकर आईं थी साजरा, उपाध्यक्ष बनने पर भाई को फोन कर मंगाई गाड़ी

Thu, 11 Feb 2021 03:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा विकास बड़ू, रियासी
विकास बड़ू, रियासी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 11 Feb 2021 03:21 AM IST
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Jammu kashmir news: Now Sajra Qadir will take charge of DDC Vice President
साजरा - फोटो : amar ujala

डीडीसी उपाध्यक्ष पद की दावेदार साजरा चुनाव के लिए घर से स्कूटी पर आई थीं। सात-सात वोटों की बराबरी पर लक्की ड्रा के निकलते ही वे डीडीसी उपाध्यक्ष बन गईं। घर से स्कूटी पर अकेली आईं साजरा कादिर ने जीत दर्ज करने के बाद भाई को फोन कर गाड़ी मंगवाई। साजरा की कहानी में पहले कड़ा संघर्ष था, जिसे बुधवार को किस्मत का भी साथ मिल गया।

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दिलचस्प है कि साजरा ने शौक पूरा करने के लिए पहले थिएटर आर्टिस्ट के तौर पर कई चर्चित नाटकों में अभिनय किया। बाद में वह एलएलबी कर वकील बन गईं। अब उन्हें रियासी जिला में डीडीसी उपाध्यक्ष का पद मिल गया है। साजरा ने कहा कि किसी ने जब उपाध्यक्ष की दावेदारी नहीं जताई तो उन्होंने निर्दलीय अपना नाम आगे किया।
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जिला मुख्यालय से बीस किलोमीटर दूर स्थित कुंडरा गांव में 1989 को कवि अब्दुल कादिर कुंडरिया के घर पैदा हुईं साजरा कादिर ने बचपन में जम्मू-कश्मीर अकादमी ऑफ आर्ट कल्चर एवं लैंगवेज की तरफ से वर्कशाप में हिस्सा लिया। इसके बाद रंगमंच व थियेटर के प्रति उन का काफी लगाव बढ़ता गया। नटरंग थियेटर ग्रुप के साथ सफल नाटक घुमाईं बाबा जित्तो, आप हमारे हैं कौन, मेरे हिस्से की धूप कहां है, छूना है आसमां, माइंड गेम्स, कौवा चला हंस की चाल, बाबा जी की जय हो, बिच्छू आदि में हिस्सा लिया। 15 साल तक थिएटर करने के साथ ही शाजरा कादिर ने वकालत भी की। साजरा का निकाह का गुलाबगढ़ में असिस्टेंट प्रोफेसर शफकत अहमद से हुआ था। चुनाव के दिन व्यस्तता के लिए पति साथ नहीं आ सके। 
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3230 मत से जीता था डीडीसी चुनाव 
डीडीसी चुनावों की घोषणा होते ही एडवोकेट साजरा कादिर ने ग्रामीण क्षेत्र शडोल, रंगलाई, खौड़, लार, पगीवाला, बरनसाल, हरगाम, गुलाबगढ़, कैनडोरा, वंदारा, पाइनाड, देवल, डोग्गा नयोच, शिबरास, बद्दर का दौरा कर लोगों का विश्वास हासिल किया। चुनाव में छह प्रतिद्वंद्वियों को हरा कर 3230 वोट से जीत हासिल की।


मेहनत पर भरोसा था, राजनीतिक दलों का नहीं लिया सहारा
जम्मू यूनिवर्सिटी से स्नातक एडवोकेट साजरा कादिर ने बताया कि मेहनत पर पूरा भरोसा था। चुनाव में भी किसी राजनीतिक दल का सहारा नहीं लिया। उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करने से पहले सभी सदस्यों से उन के हक में मतदान करने की अपील की थी। नतीजे बता रहे हैं कि अपील काम आई है।

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