फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   jammu kashmir news

Jammu News: प्रशासनिक मामलों को लेकर जम्मू-कश्मीर सरकार और राजभवन के बीच मनभेद

विज्ञापन
jammu kashmir news
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की नवनिर्वाचित उमर अब्दुल्ला सरकार कथित तौर पर कई प्रशासनिक मुद्दों पर राजभवन के साथ मतभेदों का सामना कर रही है।
विज्ञापन

हाल ही में एलजी प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाइयों को मतभेद का कारण माना जा रहा है। विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के कई तबादलों को लेकर। ये आदेश तब दिए गए थे जब मुख्यमंत्री अब्दुल्ला तीर्थयात्रा के लिए सऊदी अरब में थे।

सूत्रों ने कहा कि आईएएस अधिकारियों के तबादले एलजी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन निर्वाचित सरकार एलजी द्वारा आदेशित जम्मू-कश्मीर के कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों को उचित नहीं मानती है। इसके चलते नाराजगी है।
विज्ञापन

विवाद के एक अन्य बिंदु में महाधिवक्ता डीसी रैना का पद शामिल है। रैना ने अब्दुल्ला सरकार के गठन से पहले अपना इस्तीफा सौंप दिया था। रैना को 2018 में पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक ने महाधिवक्ता बनाया था। एलजी मनोज सिन्हा ने भी उन्हें बनाए रखा। निर्वाचित सरकार आने के बाद रैना ने इस्तीफा दिया। इसके बाद से महाधिवक्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि महाधिवक्ता की नियुक्ति पर राज्य सरकार अपना अधिकार मानती है और राजभवन अपना। इस महत्वपूर्ण पद पर तैनाती न होने को राजभवन और सरकार के बीच मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सूत्रों ने कहा कि अब्दुल्ला सरकार और राजभवन दोनों वर्तमान में बिजनेस रूल के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय से जारी होने वाली अधिसूचना का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद ही राजभवन और सरकार के बीच अधिकारों में स्पष्टता आ सकेगी। 2018 में जम्मू और कश्मीर में केंद्रीय शासन लागू होने के बाद राज्यपाल और उसके बाद वर्तमान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा राज्य का संचालन करते रहे हैं। 16 अक्तूबर को निर्वाचित सरकार के सत्ता संभालने के बाद स्थिति में बदलाव आ गया। संसद द्वारा अधिनियमित कानूनों के तहत, लेफ्टिनेंट गवर्नर अन्य जिम्मेदारियों के अलावा अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों और कानून प्रवर्तन पर अधिकार रखता है।

-----
बिजनेस रूल नहीं बनने तक संशय बरकरार रहेगा
वरिष्ठ पत्रकार राजू केरनी का कहना है कि जम्मू कश्मीर सरकार को बने हुए लगभग एक माह हो गया है, लेकिन बिजनेस रूल नहीं बनने से सरकार को भी पता नहीं है कि उसके अधिकार क्षेत्र में क्या शक्तियां हैं या नहीं। इसका आगामी बजट पर भी असर दिख सकता है। सरकार अपनी शक्तियों के मुताबिक ही बजट का डिजाइन तैयार करेगी, लेकिन अभी स्थिति स्पष्ट ही नहीं है। आगामी जनवरी-फरवरी के बीच बजट पेश किया जाना है। सरकार के मंत्री चाहे कुछ भी घोषणाएं कर लें, लेकिन उन्हें जमीन पर उतारना आसान नहीं है। अगर उमर सरकार के केंद्र से संपर्क बेहतर होते तो अब तक बिजनेस रूल आ जाना चाहिए था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed