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Jammu News: प्रदेश में बछड़े नहीं, ज्यादातर बछड़ियां ही होंगी पैदा
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जम्मू। प्रदेश में बछड़े नहीं अब ज्यादातर बछड़ियां ही पैदा होंगी। अब हक्कल लैब में आने वाले समय में सेक्स आडिट सीमैन की सुविधा मिलेगी। पशुपालन विभाग की ओर से कार्रवाई को पूरा किया जा रहा है।
कार्रवाई के बाद यहां पर सुविधा दी जाएगी। मौजूदा समय में देशभर में सेक्स आडिट सीमैन पर काम कर रही निजी कंपनियों की तकनीक का प्रयोग प्रदेश में हो रहा है। अब हक्कल लैब में ही प्रयोग होंगे और सीमैन का प्रयोग किया जा सकेगा।
पशुपालन विभाग के अनुसार मौजूदा समय में सांडों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब खेतीबाड़ी का काम ट्रैक्टरों के माध्यम से हो रहा है। ऐसे में गौशालाओं से सांडों को छोड़ दिया जा रहा है। इससे सड़कों में लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ रही है। इस तकनीक से गायों की नस्ल में सुधार होगा और ज्यादा बछड़ियां ही पैदा होंगी। इससे गायों की संख्या में इजाफा होगा। साथ ही दूध के कारोबार में भी बढ़ोतरी होगी।
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मौजूदा समय में पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा सहित अन्य प्रदेशों में सुविधा मिल रही है। मगर प्रदेश में यह सुविधा अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में बाहरी राज्यों से तकनीक का प्रयोग किया जाता था। इस पर पशुपालक को 300 से 400 रुपये भी खर्च करने पड़ते थे। इसका लाभ प्रदेश भर में जानकार पशुपालक ही ले पा रहे थे। अन्य पशुपालक पहले की तकनीक का ही प्रयोग कर रहे थे।
कोट
हक्कल स्थित लैब में सैक्स आडिट सीमैन की सुविधा मिलेगी। कार्रवाई को पूरा किया जा रहा है। इससे 99 फीसदी तक बछड़ियां ही पैदा होंगी।
- परविंदर सूदन, निदेशक, पशुपालन विभाग
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कार्रवाई के बाद यहां पर सुविधा दी जाएगी। मौजूदा समय में देशभर में सेक्स आडिट सीमैन पर काम कर रही निजी कंपनियों की तकनीक का प्रयोग प्रदेश में हो रहा है। अब हक्कल लैब में ही प्रयोग होंगे और सीमैन का प्रयोग किया जा सकेगा।
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पशुपालन विभाग के अनुसार मौजूदा समय में सांडों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब खेतीबाड़ी का काम ट्रैक्टरों के माध्यम से हो रहा है। ऐसे में गौशालाओं से सांडों को छोड़ दिया जा रहा है। इससे सड़कों में लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ रही है। इस तकनीक से गायों की नस्ल में सुधार होगा और ज्यादा बछड़ियां ही पैदा होंगी। इससे गायों की संख्या में इजाफा होगा। साथ ही दूध के कारोबार में भी बढ़ोतरी होगी।
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मौजूदा समय में पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा सहित अन्य प्रदेशों में सुविधा मिल रही है। मगर प्रदेश में यह सुविधा अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में बाहरी राज्यों से तकनीक का प्रयोग किया जाता था। इस पर पशुपालक को 300 से 400 रुपये भी खर्च करने पड़ते थे। इसका लाभ प्रदेश भर में जानकार पशुपालक ही ले पा रहे थे। अन्य पशुपालक पहले की तकनीक का ही प्रयोग कर रहे थे।
कोट
हक्कल स्थित लैब में सैक्स आडिट सीमैन की सुविधा मिलेगी। कार्रवाई को पूरा किया जा रहा है। इससे 99 फीसदी तक बछड़ियां ही पैदा होंगी।
- परविंदर सूदन, निदेशक, पशुपालन विभाग