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चौधरीगुंड से पलायन करने वाले 13 कश्मीरी पंडित परिवारों ने प्रवासी के रूप में पंजीकृत करने का किया आवेदन
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जम्मू। टारगेट किलिंग की घटनाओं के बीच दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के चौधरीगुंड गांव से पलायन करने वाले 13 कश्मीरी पंडित परिवारों ने उन्हें प्रवासी के रूप में पंजीकृत करने की अपील की। इन 43 सदस्यों वाले 13 परिवारों में से दस 26 अक्तूबर को जम्मू पहुंचे थे। शेष तीन परिवार पहले ही शहर पहुंच गए थे।
वीजे कौल ने कहा कि हमने घाटी से जम्मू में स्थानांतरण के मद्देनजर प्रवासियों के रूप में 13 परिवारों के पंजीकरण के लिए जम्मू में राहत और पुनर्वास आयुक्त के कार्यालय में संयुक्त आवेदन दिया है। इन परिवारों ने अपने गांव को असुरक्षा के कारण छोड़ दिया है और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उनका पंजीकरण करे। आवेदन में परिवारों ने कहा कि वे दिनदहाड़े पूरण कृष्ण भट की हत्या के बाद जम्मू चले आए थे। उन्होंने कहा कि चौधरीगुंड के निवासियों ने पिछले 32 वर्षों में आतंकवाद का दंश झेला और अपने भाइयों के साथ पीड़ा साझा की लेकिन भट की हत्या ने हमें घाटी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
उन्होंने कहा कि भट की हत्या से पहले एक सरकारी प्राथमिक स्कूल पर हमला किया गया था, लेकिन सौभाग्य से अल्पसंख्यक समुदाय के तीन शिक्षक बाल-बाल बच गए। इसी दिन जेहादियों ने सोशल मीडिया पर धमकी भरा पत्र वायरल किया था जिसमें चेतावनी दी गई थी कि कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ दें अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहें। हम अपनी जान खतरे में डालने को तैयार नहीं हैं और जम्मू चले आए।
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पलायन से प्रशासन ने किया था इन्कार
बता दें, गत वीरवार को शोपियां में अधिकारियों ने जिले से कश्मीरी पंडितों का कोई पलायन नहीं होने का दावा किया था। जम्मू में डेरा डाले अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने घाटी में लौटने की किसी भी योजना से इन्कार किया है। शोपियां के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सत्यापित ट्विटर अकाउंट पर दावा किया गया कि कश्मीरी गैर-प्रवासी हिंदू आबादी के पलायन की खबर निराधार थी। हालांकि, पूरण कृष्ण भट के भाई अश्विनी कुमार भट ने जम्मू में संवाददाताओं से कहा था कि वह पलायन कर चुके हैं और घाटी में कभी नहीं लौटेंगे। पूरण कृष्ण भट को 15 अक्तूबर को चौधरीगुंड गांव में उनके पुश्तैनी घर के बाहर आतंकवादियों ने गोली मार दी थी। तीन दिन बाद 18 अक्तूबर को शोपियां में घर में सो रहे उत्तर प्रदेश के मजदूर मुनेश कुमार और राम सागर की आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला कर हत्या कर दी थी।
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वीजे कौल ने कहा कि हमने घाटी से जम्मू में स्थानांतरण के मद्देनजर प्रवासियों के रूप में 13 परिवारों के पंजीकरण के लिए जम्मू में राहत और पुनर्वास आयुक्त के कार्यालय में संयुक्त आवेदन दिया है। इन परिवारों ने अपने गांव को असुरक्षा के कारण छोड़ दिया है और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उनका पंजीकरण करे। आवेदन में परिवारों ने कहा कि वे दिनदहाड़े पूरण कृष्ण भट की हत्या के बाद जम्मू चले आए थे। उन्होंने कहा कि चौधरीगुंड के निवासियों ने पिछले 32 वर्षों में आतंकवाद का दंश झेला और अपने भाइयों के साथ पीड़ा साझा की लेकिन भट की हत्या ने हमें घाटी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
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उन्होंने कहा कि भट की हत्या से पहले एक सरकारी प्राथमिक स्कूल पर हमला किया गया था, लेकिन सौभाग्य से अल्पसंख्यक समुदाय के तीन शिक्षक बाल-बाल बच गए। इसी दिन जेहादियों ने सोशल मीडिया पर धमकी भरा पत्र वायरल किया था जिसमें चेतावनी दी गई थी कि कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ दें अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहें। हम अपनी जान खतरे में डालने को तैयार नहीं हैं और जम्मू चले आए।
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पलायन से प्रशासन ने किया था इन्कार
बता दें, गत वीरवार को शोपियां में अधिकारियों ने जिले से कश्मीरी पंडितों का कोई पलायन नहीं होने का दावा किया था। जम्मू में डेरा डाले अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने घाटी में लौटने की किसी भी योजना से इन्कार किया है। शोपियां के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सत्यापित ट्विटर अकाउंट पर दावा किया गया कि कश्मीरी गैर-प्रवासी हिंदू आबादी के पलायन की खबर निराधार थी। हालांकि, पूरण कृष्ण भट के भाई अश्विनी कुमार भट ने जम्मू में संवाददाताओं से कहा था कि वह पलायन कर चुके हैं और घाटी में कभी नहीं लौटेंगे। पूरण कृष्ण भट को 15 अक्तूबर को चौधरीगुंड गांव में उनके पुश्तैनी घर के बाहर आतंकवादियों ने गोली मार दी थी। तीन दिन बाद 18 अक्तूबर को शोपियां में घर में सो रहे उत्तर प्रदेश के मजदूर मुनेश कुमार और राम सागर की आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला कर हत्या कर दी थी।