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एक्शन में आएंगे थानेदार, हाइब्रिड आतंकियों की थमेगी पिस्टल वार
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जम्मू। कश्मीर के हाइब्रिड आतंकियों पर कड़ा प्रहार करने की तैयारी कर ली गई है। इस प्रहार को धार देंगे जम्मू कश्मीर पुलिस के थानेदार। किसी भी इलाके में अपराधियों से लेकर बदमाशों तक की थानेदार को जानकारी होती है। ऐसे में अब कश्मीर के थानों में तैनात थानेदार इन आतंकियों की तलाश करेंगे और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर सफाया करेंगे। टारगेट किलिंग को रोकने के लिए थानेदारों को विशेष रूप से सक्रिय किया गया है। यह लोग आम लोगों के बीच विश्वास पैदा करेंगे, ताकि आतंकियों को स्थानीय लोगों का समर्थन न मिले। केंद्रीय गृह मंत्रालय का मानना है कि हाइब्रिड आतंकियों की पहचान करने और इनके खात्मे में स्थानीय लोगों का साथ मिलना बहुत जरूरी है, लिहाजा एक थानेदार और उसके थाने में तैनात पुलिसकर्मी भी ऐसा कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि कश्मीर के सभी थानों में तैनात थानेदारों से कहा गया है कि वह आम लोगों के बीच अपने थाने के लोगों को भेजें और इनकी मदद से आतंकियों की पहचान करें। आतंकियों को उनके बिलों से बाहर निकलने को मजबूर कर दें, ताकि उनका खात्मा किया जाए।
कुछ हो, इससे पहले पता चल जाए
सूत्रों का कहना है कि थानेदारों से कहा गया है कि वह लोगों के बीच खुद जाएं। चाहे गुप्त तरीके से ही जाएं। उनको विश्वास में लाएं, ताकि किसी भी हाइब्रिड आतंकी के कुछ करने से पहले उनको पता चल जाए। यह जानकारी सिर्फ स्थानीय लोग ही दे सकते हैं। लिहाजा लोगों को विश्वास में लें। जब पता चले तो आतंकी को कुछ करने से पहले मार गिराएं। यदि कोई नया युवक ऐसा करने की कोशिश करता है, तो उसे रोके।
खालिस्तान मूवमेंट भी ऐसे ही खत्म की गई
जानकारी के अनुसार 1990 में पंजाब में खालिस्तान मूवमेंट को खत्म करने के लिए पंजाब पुलिस ने ऐसा ही किया था। तब कोई पता नहीं होता था कि किस घर और गली से खालिस्तानी निकल आए और हत्या कर दे। जब पुलिस ने अपने थानेदारों को सक्रिय किया। थानेदारों ने लोगों को इस कद्र विश्वास में लिया कि कुछ होने से पहले ही पुलिस को पता चल जाता था और मार गिराया जाता था।
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कोट
कोई ऐसा थानेदार नहीं जिसको यह नहीं पता होता कि उसके इलाके में कौन अपराधी है। उसको सब पता होता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि टारगेट किलिंग रोकने के लिए थानेदारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में इन लोगों को चाहिए कि वह लोगों के बीच जाएं और विश्वास बनाएं। लोग खुद आतंकियों से परेशान हैं। उनको सिर्फ हिम्मत देने की जरूरत है। यदि यह विश्वास बन गया तो आतंकियों को ढूंढने में परेशानी नहीं होगी। हाइब्रिड आतंकी के कुछ करने से पहले ही उसको मारा जा सकता है।
एसपी वैद, पूर्व डीजीपी, जेके पुलिस
खुफिया एजेंसियों को कमी दूर करनी होगी
पूर्व डीजीपी एसपी वैद कहते हैं कि कश्मीर में टारगेट किलिंग होना और इसका लगातार बढ़ना कहीं न कहीं खुफिया तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है। यह बात माननी होगी कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट में कमी है। इसमें सुधार की जरूरत है। तभी इनको रोका जा सकेगा। खुफिया तंत्र को इतना मजबूत होना होगा कि आतंकियों की पहचान की जाए और उनका सफाया हो।
आतंकियों की नई चाल, पिस्टल से करो हमला
पिछले कुछ समय से आतंकियों ने कश्मीर में हमले की रणनीति बदल दी है। नए युवाओं से टारगेट किलिंग कराई जा रही है। इसके लिए उनको पिस्टल मुहैया करवाई जा रही है। इससे इन लोगों के लिए हमला करना आसान हो रहा है। अकेले मई महीने में ही कश्मीर में 8 टारगेट किलिंग हुई हैं, जबकि पिछले 8 महीने में कश्मीर में पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षाबलों ने मिलकर आतंकियों द्वारा इस्तेमाल होने वाली 136 पिस्टल बरामद की हैं। एक तरह से कश्मीर में आतंकी संगठन पिस्टल वार कर रहे हैं।
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कुछ हो, इससे पहले पता चल जाए
सूत्रों का कहना है कि थानेदारों से कहा गया है कि वह लोगों के बीच खुद जाएं। चाहे गुप्त तरीके से ही जाएं। उनको विश्वास में लाएं, ताकि किसी भी हाइब्रिड आतंकी के कुछ करने से पहले उनको पता चल जाए। यह जानकारी सिर्फ स्थानीय लोग ही दे सकते हैं। लिहाजा लोगों को विश्वास में लें। जब पता चले तो आतंकी को कुछ करने से पहले मार गिराएं। यदि कोई नया युवक ऐसा करने की कोशिश करता है, तो उसे रोके।
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खालिस्तान मूवमेंट भी ऐसे ही खत्म की गई
जानकारी के अनुसार 1990 में पंजाब में खालिस्तान मूवमेंट को खत्म करने के लिए पंजाब पुलिस ने ऐसा ही किया था। तब कोई पता नहीं होता था कि किस घर और गली से खालिस्तानी निकल आए और हत्या कर दे। जब पुलिस ने अपने थानेदारों को सक्रिय किया। थानेदारों ने लोगों को इस कद्र विश्वास में लिया कि कुछ होने से पहले ही पुलिस को पता चल जाता था और मार गिराया जाता था।
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कोई ऐसा थानेदार नहीं जिसको यह नहीं पता होता कि उसके इलाके में कौन अपराधी है। उसको सब पता होता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि टारगेट किलिंग रोकने के लिए थानेदारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में इन लोगों को चाहिए कि वह लोगों के बीच जाएं और विश्वास बनाएं। लोग खुद आतंकियों से परेशान हैं। उनको सिर्फ हिम्मत देने की जरूरत है। यदि यह विश्वास बन गया तो आतंकियों को ढूंढने में परेशानी नहीं होगी। हाइब्रिड आतंकी के कुछ करने से पहले ही उसको मारा जा सकता है।
एसपी वैद, पूर्व डीजीपी, जेके पुलिस
खुफिया एजेंसियों को कमी दूर करनी होगी
पूर्व डीजीपी एसपी वैद कहते हैं कि कश्मीर में टारगेट किलिंग होना और इसका लगातार बढ़ना कहीं न कहीं खुफिया तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है। यह बात माननी होगी कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट में कमी है। इसमें सुधार की जरूरत है। तभी इनको रोका जा सकेगा। खुफिया तंत्र को इतना मजबूत होना होगा कि आतंकियों की पहचान की जाए और उनका सफाया हो।
आतंकियों की नई चाल, पिस्टल से करो हमला
पिछले कुछ समय से आतंकियों ने कश्मीर में हमले की रणनीति बदल दी है। नए युवाओं से टारगेट किलिंग कराई जा रही है। इसके लिए उनको पिस्टल मुहैया करवाई जा रही है। इससे इन लोगों के लिए हमला करना आसान हो रहा है। अकेले मई महीने में ही कश्मीर में 8 टारगेट किलिंग हुई हैं, जबकि पिछले 8 महीने में कश्मीर में पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षाबलों ने मिलकर आतंकियों द्वारा इस्तेमाल होने वाली 136 पिस्टल बरामद की हैं। एक तरह से कश्मीर में आतंकी संगठन पिस्टल वार कर रहे हैं।