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मांगें पूरी न होने से खफा ट्रांसपोर्टर 30 मार्च को करेंगे चक्का जाम

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jammu kashmir news
जम्मू। मांगें पूरी न होने से खफा प्रदेश के ट्रांसपोर्टरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 30 मार्च को पूरे प्रदेश में चक्का जाम करने का एलान कर दिया है। चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गौर नहीं किया गया तो नवरात्र के बाद अनिश्चितकाल के लिए चक्का जाम किया जाएगा। ट्रांसपोर्टरों ने सरकार के सामने 5 मांगें मुख्य रूप से रखी हैं। इनमें वाहनों में जीपीएस लगाने पर रोक, वाहनों की आयु सीमा 25 वर्ष तक करने, वाहनों पर कोरोना के समय लगाए यात्री शुल्क को माफ करना, ऑटो रिक्शा चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना और एसआरटीसी के परिचालन का वक्त तय करना शामिल है।
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रविवार को पत्रकार वार्ता में ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान विजय चिब ने कहा कि सरकार के समक्ष मांगों का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन कोई फैसला नहीं लिया गया। दो साल तक उनके वाहन कोविड की वजह से नहीं चल पाए। ऐसे में वह लोग यात्री शुल्क कैसे दे सकते हैं। कोई भी वाहन बिना शुल्क के पास नहीं किया जा रहा। उनकी मांग है कि दो साल का शुल्क माफ करें और इसके बाद किश्तों में लें, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। निजी वाहनों को 8 बजे से पहले बीसी रोड में घुसने नहीं दिया जाता, लेकिन सरकारी बसें पहले ही घुस जाती हैं, जिनका कोई चलने का कोई वक्त नहीं। ऑटो रिक्शा चालकों के लाइसेंस नहीं बनाए जा रहे। जब उन लोगों ने चलाना ही रिक्शा है तो वह कैसे 4 पहिया वाहनों का ट्रायल दे सकते हैं। सरकार के पास जीपीएस के लिए कोई कंट्रोल रूम तक नहीं और आदेश दिया गया है कि सब लोग जीपीएस लगाएं। अधिकतर इलाकों में जाने पर तो सिग्नल गायब हो जाता है। ऐसे में यह सिस्टम कैसे काम करेगा। यदि जीपीएस लगाना है तो सरकार खरीद कर दे या फिर नए वाहनों के लिए यह व्यवस्था हो। पुराने वाहनों को इससे छूट मिले। ट्रांसपोर्टरों ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगें हल नहीं हुईं तो वह आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। किसानों की तरह ही उनका भी आंदोलन होगा।
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चक्का जाम का यह होगा असर
प्रदेश में मौजूदा समय में 70 हजार से अधिक व्यावसायिक वाहन हैं। इनमें मेटाडोर, बसें, ऑटो रिक्शा, ट्रक व अन्य वाहन शामिल हैं। 30 मार्च के चक्का जाम से सबसे बड़ी दिक्कत आम लोगों को होगी, जो रोज मेटाडोर से अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। ऑटो रिक्शा न चलने से ये दिक्कत और बढ़ जाएगी। दूसरे राज्यों के लिए निजी बसें न चलने से लोगों का परेशान होना लाजिमी है। उन्हें सिर्फ सरकारी बसों पर निर्भर रहना पड़ेगा। ट्रकों के न चलने से कारोबारियों को दिक्कत होगी, उनका माल नहीं पहुंच पाएगा।
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